यूकेडी ने उठाई सशक्त भू-कानून लागू करने की आवाज

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखंड राज्य में सशक्त भू-कानून लागू किये जाने की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना दिया और प्रशासनिक अधिकारी के जरिये मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इस अवसर पर कहा गया है कि जल्द ही सशक्त भू-कानून लागू नहीं किया जाता है तो आंदोलन को तेज किया जायेगा।
यहां दल के कार्यकर्ता महानगर अध्यक्ष दीपक रावत के नेतृत्व में सशक्त भू-कानून लागू किये जाने की मांग को लेकर गांधी पार्क में इकटठा हुए और वहां पर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया और धरने पर बैठे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड राज्य गठन की मांग के पीछे प्रमुख कारण इस राज्य की भौगोलिक , सामाजिक , आर्थिक एवं सांस्कृतिक विशिष्टतायें थी। राज्य का गठन तो हो गया किंतु दुर्भाग्यवश ना तो राज्य पुनर्गठन विधेयक में और न ही उसके बाद इन विशिष्टताओं के संरक्षण उन्नयन के लिए कोई सार्थक कदम उठाए गए।
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड राज्य की उक्त विशिष्टताओं के अतिरिक्त इस राज्य के सामरिक महत्व को भी नकारा जाता रहा जबकि राज्य की सीमाएं नेपाल और तिब्बत (चीन ) से मिलती है। उत्तराखंड क्रांति दल राज्य गठन के आंदोलन के दौर में भी राज्य गठन के बाद भी इस राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने और यहां की जमीन की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने की मांग करता रहा है । ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य गठन के बाद पहली निर्वाचित स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी सरकार ने एक लचीला व कमजोर भू कानून बनाया जिसका कोई लाभ प्रदेश को नहीं मिल पाया। पुन: दूसरी निर्वाचित सेनि मेजर जनरल बीसी खंडूरी सरकार ने कुछ पावबंदियों को बढ़ाते हुए नया कानून बनाया, किंतु वह भी कारगर साबित नहीं हुआ। लिहाजा जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त जारी रही वर्तमान में निवर्तमान त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने प्रदेश की भूमि की खरीद फरोख्त के असीमित रास्ते खोल दिए हैं ।
ज्ञापन में कहा गया है कि यही स्थित जारी रही तो आने वाले समय में राज्य के मूल निवासियों के सामाजिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक ताने-बाने को बहुत अधिक क्षति पहुंचेगी। साथ ही सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राज्य के महत्व को भी नुकसान पहुंचेगा।इस अवसर पर ज्ञापन में सरकार सख्त भूकानून लागू कर जमीनों की खरीद-फरोख्त को प्रतिबंधित करे।
ज्ञापन में कहा गया कि सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित करें कि प्रदेश में संविधान की धारा 371 के अंतर्गत प्रावधान किया जाए कि राज्य के बाहर के किसी व्यक्ति पर यहां की भूमि खरीदने पर पूर्ण प्रतिबंध हो अथवा कठोर प्रतिबंधों के साथ बहुत सीमित खरीद-फरोख्त की इजाजत हो। सरकार उक्त प्रस्ताव को केंद्र सरकार को प्रेषित करे ताकि संसद में इसे पारित किया जा सके। ज्ञापन में कहा गया है कि स्थाई निवास (डोमिसाइल) प्रमाण पत्र प्राप्त करने के प्रावधानों को अधिक कठोर बनाते हुए उनका कठोरता से अनुपालन करवाया जाए। प्रदेश में वर्ष 198० से पूर्व के निवासियों को ही मूल निवासी माना जाए और उन्हीं निवासियों को मूल निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

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