नेता प्रतिपक्ष ने सदन में दागा सवाल आखिर कौन है अनिल जोशी?

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सवालः क्या अंकिता को मिलेगा न्याय
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में एक लम्बे दशक से अंकिता भंडारी हत्याकांड की गंूज समय-समय पर सदन के अन्दर और बाहर गूंजती रही है। हत्याकांड में शामिल तीन गुनाहगारों को उम्रकैद की सजा होने के बाद जब एक पूर्व भाजपा विधायक की कथित पत्नी ने सोशल मीडिया पर आकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के नाम का खुलासा किया था तो उससे उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में भूचाल आ गया था। विपक्ष और तमाम संगठनों के दबाव के चलते मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी और उसके बाद यह मामला सीबीआई के हाथों मे है। विपक्ष और तमाम संगठन सरकार की मंशा पर सवाल खडे कर रहे हैं कि ऐसी जांच का क्या फायदा जो सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में नहीं करवाई जा रही? वहीं बजट सत्र में सदन के अन्दर नेता विपक्ष ने सरकार से सवाल किया कि आखिर अनिल जोशी है कौन? सवाल यह भी दागा कि क्या ऐसे में अंकिता भंडारी को न्याय मिल पायेगा।
गैरसैंण में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और वहां सदन की कार्यवाही काफी गर्माहट लाये हुये है क्योंकि जहां सदन के बाहर सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस और उक्रांद ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया उसने सरकार और सिस्टम के माथे पर ंिचता की लकीरें डाली दी। वहीं सदन के अन्दर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार से सवाल किया कि आखिरकार अनिल जोशी कौन है जिसने अंकिता भंडारी हत्याकांड में एफआईआर दर्ज कराई है। यशपाल आर्य ने कहा कि सीबीआई जांच की संस्तुति होती है और सीबीआई जांच हो रही है लेकिन अनिल जोशी कौन हैं, क्या उनके परिजन हैं, क्या उनके परिवार के हैं, कौन हैं अनिल जोशी? यशपाल आर्य ने सवाल उठाया कि क्या प्राथमिकी उनको कराने का किसने अधिकार दिया। अंकिता भंडारी सबकी जुबान पर है, बच्चों से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं की, क्योंकि अंकिता पर जो हत्याचार और जुल्म हुआ बार-बार जिक्र आता है कि वो कौन लोग थे जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया, किसने हत्या की, उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि आज भी कई लोग शक के दायरे मे नहीं बल्कि उसमें सम्मिलित हैं, वांछित हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई की जांच सरकार ने स्वीकार कर ली। उन्होंने यह आशंका उठाई कि क्या अंकिता को न्याय मिल पायेगा। यशपाल आर्य के इस आरोप पर सरकार की ओर से भी सवाल दागा गया कि क्या उन्हें सीबीआई की जांच पर कोई शक है। कुल मिलाकर जिस तरह से सदन के अन्दर भी अंकिता भंडारी हत्याकांड की एफआईआर अनिल जोशी द्वारा दर्ज कराई गई है उसको लेकर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष ने जिस आक्रामक रूख से अपनी बात रखी उससे कहीं न कहीं एक बार फिर अनिल जोशी द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड में एफआईआर दर्ज कराना कई सवालो को जन्म दे गया है।

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