चंद अफसर अपने आपको समझ रहे ‘सरकार’
कुछ अधिकारी घमंड के सागर में लगा रहे गोते
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि जब भी किसी सरकार में कुछ अफसरों ने अंहकार पालकर अपने आपको ‘सरकार’ समझने का भ्रम पाला उनका हश्र दूसरी सरकारों में क्या हुआ था यह किसी से छिपा नहीं है? हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री तो उत्तराखण्ड को विकास के पथ पर ले जाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं लेकिन उनके कुछ अफसर अपने आपको सरकार समझकर वो खेल खेलने में जुटे हुये हैं जो आम जनमानस के लिए घातक ही माना जा रहा है? उत्तराखण्ड की फिजाओं में यह बात तैर रही है कि कुछ अफसर घमंड के सागर में जिस तरह से गोते लगाने के आगे आ रखे हैं उससे वह कांग्रेस के निशाने पर भी आ चुके हैं और कुछ अफसरों की तो उन्होंने कुंडली निकाल ली है जो भ्रष्टाचार का खेल अपने आपको ‘सरकार’ समझकर खेल रहे हैं?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबका साथ सबका विकास का नारा दिया हुआ है और वह विकास की राजनीति पर ही अपने आपको आगे किये हुये हैं लेकिन यह भी सत्य है कि राज्य के कुछ अफसर आवाम को अपनी पॉवर का अहंकार दिखाने की कोशिश में आगे बढे़ हुये हैं। राज्य के अन्दर सिस्टम के कुछ अफसर अपने आपको ‘सरकार’ मानकर आवाम को अपनी पॉवर का खुलकर अहंकार दिखाने के एजेंडे पर आगे बढे़ हुये हैं? सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य के कुछ अफसरों के सर पर अहंकार का जो भूत सवार हो रखा है वह आम जनमानस को हैरान कर रहा है और उनका मानना है कि हर सरकार में कुछ अफसर ऐसे दिखाई देते रहे हैं जो अपने आपको ‘सरकार’ समझने का भ्रम पाल लेते हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर पिछले लम्बे अर्से से राज्य के कुछ अधिकारी घमंड के सागर में खूब गोते लगा रहे हैं लेकिन उन्हें शायद इस बात का इल्म नहीं है कि उनका यह घमंड भविष्य में उन्हें किस राह पर लाकर खडा कर देगा?
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि हर सरकार के कार्यकाल में कुछ ऐसे अफसर नजर आ ही जाते हैं जो अपने आपको सरकार के अन्दर खुदा समझने का भ्रम पाल लेते हैं और वह जिस उडान पर उडने के लिए आगे रहते हैं उनकी इस उडान को भले ही सरकार में बैठे कुछ नेता अपने चश्मे से देखते हों, लेकिन आवाम की आंखों में ऐसे अफसर हमेशा खटकते रहते हैं कि आखिरकार कुछ अफसरों को ऐसी कौन सी दिव्य शक्ति मिल जाती है जिसके चलते वह सिस्टम के अन्दर अपने आपको ‘सरकार’ समझने के खेल में जुट जाते हैं? हालांकि ऐसे अहंकारी अफसरों को इस बात का इल्म नहीं है कि अधिकांश सरकारों के कार्यकाल में अपने आपको ‘सरकार’ समझने वाले कुछ अफसर पॉवर जाते ही किस तरह से पिक्चर से गायब हो जाते हैं यह किसी से छिपा नहीं है? उत्तराखण्ड के अन्दर भी आज भले ही सरकार पारदर्शिता से चलाने का दम भर रही हो लेकिन राज्य में खुद को ‘सरकार’ समझने वाले कुछ अफसर पर्दे के पीछे रहकर क्या-क्या गुल खिला रहे हैं यह भले ही सरकार को न दिखाई दे रहा हो लेकिन आवाम को ऐसे अफसरों का काला अध्याय याद है। सवाल यह पनप रहे हैं कि आखिरकार कुछ अफसरों को इतना भ्रम क्यों हो गया है कि वह सरकार के अन्दर सशक्त पॉवरफुल हैं और वह चाहे जो कर ले उन पर कोई सवाल नहीं कर सकता?
आश्चर्यचकित बात यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अफसरशाही को साफ चेता रखा है कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी अधिकारी को उसके सरकारी नम्बर के फोन पर कॉल करेगा तो उसे उठाना अधिकारी की नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने यह संदेश भी दिया हुआ है कि अगर जन मानस का फोन अधिकारी उठाने के लिए आगे नहीं आये तो उनके खिलाफ एक्शन होगा। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि राज्य के कुछ अफसर तो आज भी आम जनमानस का फोन उठाने के लिए आगे नहीं आते और तो और वह अपने अहंकार में इतने मश्गूल हैं कि वह कुछ अफसरों के भी फोन उठाने की जहमत नहीं करते ऐसा दर्द कुछ अफसरों का सुनने को मिला है? सियासत के अन्दर हर सरकार मंे कुछ अफसर ऐसे जरूर नजर आते हैं जो अपने आपको ‘सरकार’ समझकर यह संदेश देने के लिए आगे बढ जाते हैं कि वह सरकार के लाडले हैं और वह इतने पॉवरफुल हैं कि चाहे कोई कितना भी उन्हें अपने निशाने पर लेने की कोशिश करे वह अपने एजेंडे में सफल नहीं हो पायेंगे।
