नदियों का सीना चीरते खनन माफिया

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सरकार को सफेद सोना उड़ा रहे बेखौफ ‘शैतान’
गजब बिना नम्बर प्लेट के दौड़ रहे ट्रैक्टर?
विकासनगर(संवाददाता)। सरकार के मुखिया खनन माफियाओं को सख्त लहजे में अल्टीमेटम देते आ रहे हैं कि अगर किसी ने भी अवैध खनन करने का दुसाहस किया तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। सरकार के सख्त रूख के बावजूद भी पछुवादून के कुछ इलाकों में खनन माफिया नदियों का सीना चीरकर बेखौफ होकर सरकार का सफेद सोना उडा रहे हैं और उन पर शिकंजा कसने के लिए सिस्टम के लोग क्यों आगे नहीं आ रहे यह हैरान करने जैसा है? गजब की बात है कि नदियों में काफी ट्रैक्टर ऐसे दौड रहे हैं जिनमंे नम्बर प्लेट तक नहीं है और वह सरकार का खनन चौरी कर वहां अपना खुला तांडव दिखा रहे हैं जिससे सरकार के राजस्व को जमकर नुकसान हो रहा है और खनन माफिया इस अवैध खनन से अपना खजाना भरने के मिशन में आगे बढे़ हुये हैं।
सरकारी दावों और ‘जीरो टॉलरेंस’ की हवा निकालते हुए खनन माफिया एक बार फिर बेखौफ होकर नदियों पर उतर आया है। वायरल हो रहे एक ताजा वीडियो ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नदी किनारे के इलाकों से बड़े-बड़े पत्थरों से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली धड़ल्ले से निकल रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट तक नहीं है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर इनकी बॉडी की ऊँचाई (ओवर हाईट) बढ़ा दी गई है, जिससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि ये सड़क पर चलते राहगीरों के लिए साक्षात ‘यमराज’ साबित हो रहे हैं? सबसे हैरान करने वाली बात है कि सरकार को राजस्व का खनन माफिया खूब चूना लगा रहे हैं और रवन्ने के नाम पर एक स्लीप में मोहर लगाने का खुला खेल भी वीडियों में कैद हुआ है।
भ्रष्टाचार का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आता है जब वीडियो में एक व्यक्ति को रसीद (गेट पास) पर धड़ाधड़ हाथ से मोहर लगाते देखा गया। आरोप है कि यह वैध एक वैध रवन्ना नहीं बल्कि अवैध वसूली और गैर-कानूनी खनन को संरक्षण देने का एक टोकन है। सवाल यह है कि आखिर ये मोहरें किसके आदेश पर और किसके फायदे के लिए लगाई जा रही हैं? खनन माफियाओं के इस सारे खेल पर सिस्टम के जिम्मेदार लोग क्यों खामोश हैं यह काफी हैरान करने वाला है? वीडियो में दिख रहा यह खुला खेल किसी सुनसान जंगल में नहीं, बल्कि खुलेआम हो रहा है। इसके बावजूद खनन विभाग की चुप्पी कई गहरे राज खोलती है। सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या इन माफियाओं को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त है? सबसे चौकाने वाली बात है कि कुछ नदियों में बिना नंबर प्लेट दर्जनों ट्रैक्टर बिना किसी पहचान के नदियों से लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं और ओवरलोडिंग के चलते वह आम जनमानस की सुरक्षा से भी एक बडा खिलवाड कर रहे हैं। कितनी अजीब बात है कि सिस्टम को चुनौती देने के लिए फर्जीवाड़ा गेट पास पर अवैध मोहरें लगाकर खनन को अंजाम दिया जा रहा।यह सिर्फ खनन नहीं, बल्कि कानून के साथ सीधा खिलवाड है? अगर इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो सरकारी खजाने के साथ-साथ आम जनता की जान भी सुरक्षित नहीं रहेगी?

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