कोरोनेशन के आपातकालीन विभाग पर भड़के ‘सचिव’

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राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीएम को बताया अस्पताल का सच
गैर जिम्मेदार अधिकारी-स्टाफ के तबादले की लगाई हुंकार
देहरादून(संवाददाता)। कितनी हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो सरकार रजत जयंती समारोह मनाकर दम भर रही है कि राज्य को गुलजार करने के लिए एक बडी छलांग सरकार ने लगाई है लेकिन अगर दर्द से तडफती युवती अस्पताल प्रशासन में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज भी सरकार के कुछ सरकारी अस्पताल एक आम इंसान को इलाज देने में सफल नहीं हो पा रहे हैं? सचिव संयुक्त नागरिक संगठन ने डीएम को मेल करके बताया है कि दून के कोरोनेशन अस्पताल के आपातकालीन विभाग में व्याप्त कुव्यवस्थाओं को दून करने तथा एक युवती को अमरजेंसी में समुचित चिकित्सा न मिलने के जिम्मेदार अधिकारी, स्टाफ को दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर करने की मांग कर अपनी नाराजगी प्रकट की है।
सचिव संयुक्त नागरिक संगठन के सुशील त्यागी ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी मेल किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि दून के कोरोनेशन अस्पताल के आपातकालीन विभाग में व्याप्त कुव्यवस्थाओं को दूर करने प्रियंका चौहान को इमरजेंसी में समुचित चिकित्सा न मिलने के जिम्मेदार अधिकारी स्टाफ को दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर करने, पूर्व स्वास्थ्य सचिव राजेश कुमार द्वारा इमरजेंसी सेवाओं हेतु एक साल पूर्व जारी एसओपी के अंतर्गत मरीजों की चिकित्सा में नैतिक दायित्वो,मरीज के अधिकारों को भी सुनिश्चित करने के साथ साथ सभी निर्देशों को राज्य के चिकित्सालयों के आपातकालीन कक्षों के बाहर प्रदर्शित करने की मांग उठाई है। संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से राज्यपाल, मुख्यमंत्री मुख्यसचिव, स्वास्थ्य सचिव, जिलाधिकारी को भेजे गए मेल में कहा गया कि दर्द से तड़पती युवती ने अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल खोली है। हादसे में घायल युवती प्रियंका चौहान के आंसू पीड़ाओं को व्यक्त करती वीडियो देखकर संगठन सचिव सुशील त्यागी ने लिखा है की राजधानी के कोरोनेशन अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्थाओ पर हमें शर्म आती है,दुख भी। लिखा है सरकारी तंत्र के मुखिया आप सब इस अस्पताल से मात्र कुछ किलोमीटर की परिधि में कार्यरत है लेकिन जिम्मेदार कुछ चिकित्सकों में लापरवाही व्याप्त जो दुर्भाग्य है। इसे रोका जाना होगा।
इन्होंने अनुरोध किया है की इस दर्दनाक घटना में कठोर कार्यवाही करते हुए पूर्व स्वास्थ्य सचिव राजेश कुमार द्वारा जनवरी 2025 में जनहित में आपातकालीन सेवाओं के संबंध में जारी एसओपी को प्रदेश के सभी चिकित्सालयों के आपातकालीन कक्षाओं के बाहर सूचनापट्ट लगाकर सार्वजनिक करने का कष्ट करें।इससे आपातकालीन सेवाओं की सुलभता तथा चिकित्सा अधिकारियों की आंखें चौबीस घंटे खुली रहेगी तथा गंभीर रोगी भी राहत महसूस कर सकेंगे। एसओपी के अंतर्गत जारी निर्देश में आपातकालीन चिकित्सा के दौरान मरीज की देखभाल में नैतिक दायित्वों को भी रेखांकित करते हुए रोगियों के हितों और अधिकारों को प्राथमिकता स्पष्ट करने,आपातकाल चिकित्सा में मरीज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने को आवश्यक बनाते हुए आपातकाल व्यक्ति-केंद्रित देखभाल व्यवस्था सुनिश्चित करने,एसओपी के अंतर्गत पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की व्यवस्था करने तथा इलाज में अनावश्यक देरी पर जिम्मेदार कार्मिक पर कार्यवाही को भी गिनाया गया है। ज्ञातव है की पूर्व में सभी चिकित्सा अधिकारियों को ये निर्देश जारी किए गए पर नतीजा सिफर है।
सुशील त्यागी ने आपातकालीन चिकित्सा में विभाग को तत्काल उचित जीवन रक्षक देखभाल प्रदान करने,भावनात्मक सुरक्षा और व्यक्ति-केंद्रित देखभाल करने के साथ आपातकालीन विभाग रोगी की देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी निर्देशों का उल्लेखनीय भाग बताया है। इनमें किसी मरीज को देखने में हुई अनावश्यक देरी की स्थिति में इमरजेंसी प्रभारीध्एमएस दोषी ईएमओ,एसआर या संकाय सदस्य के विरुद्ध कार्रवाई करने के भी निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं और एसओपी में शामिल हैं।

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