जन प्रहार का दो टूक संदेश

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पिटकुल एमडी को बचा रही सरकार
न्यायालय के आदेश पर आखिर किसने मंूद ली आंखे?
देहरादून। उत्तराखंड में कुछ अधिकारी अपने आप को भगवान समझने लगे हैं वह समझने लगे हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता? सरकार, शासन हाईकोर्ट कोई भी इनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता और अगर कोई आवाज उठाता भी है तो फिर भी यह सब कुछ अनसुना करके अपनी कुर्सी पर चुपके हुए रहते हैं हम यह बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उत्तराखंड में पिटकुल जैसे बड़े विभाग में एक अधिकारी सब कुछ देख करके भी अनजान ओर बेफिक्र बैठा है। 18 फरवरी 2026 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में आदेश देकर नियुक्ति निरस्त की लेकिन सवाल आज भी खड़ा है कि आखिर सरकार किसके इशारे पर चुप है? क्यों एक ऐसा अधिकारी, जिसकी नियुक्ति अदालत ने अवैध ठहरा दी, अब भी पूरे अधिकारों के साथ कुर्सी पर बैठा है? क्या शासन में बैठे जिम्मेदार लोग न्यायालय के आदेश को हल्के में ले रहे हैं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं यह सिर्फ एक पद का मामला नहीं, बल्कि शासन की नीयत और प्रशासनिक ईमानदारी की परीक्षा है। अगर अदालत का फैसला भी तत्काल कार्रवाई नहीं करा पा रहा, तो फिर अधिकारियों में कानून का डर कैसे बैठेगा? क्या सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अदालत का आदेश अंतिम नहीं, बल्कि वैकल्पिक है आखिरकार क्यों ऐसे अधिकारियों की वजह से अपनी छवि के बारे न भी कोई नहीं सोच रहा है।
जन प्रहार ने मुख्य सचिव को दिये पत्र में साफ मांग की है कि प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए, उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। पत्र में मांग की गई है कि यह जांच भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से कराई जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर जनता के सामने रखी जाए। जन प्रहार ने पिटकुल के एमडी को तत्काल पद से हटाने और उनकी नियुक्ति को लेकर जांच कराने की आवाज पिछले चंद दिनों से बुलंद कर रखी है तो वहीं वह मुख्य सचिव से मुलाकात कर पिटकुल एमडी को तत्काल हटाने और सीएजी जांच की मांग को लेकर अपना पत्र भी देने के लिए आगे बढ़ा है। जन प्रहार उत्तराखंड के प्रतिनिधि मंडल ने उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 18 फरवरी 2026 को दिए गए महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन को लेकर राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पिटकुल एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। उक्त आदेश में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया गया है। जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्ति निरस्त किए जाने के बावजूद यदि संबंधित अधिकारी पद पर बने रहते हैं, तो यह न केवल न्यायालय की भावना के विपरीत है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
जन प्रहार के सह संयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यह मामला पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति का ही नही, बल्कि उनके पद पर लगातार कार्यरत रह कर सामान्य रूप से कार्य करने से शासन की पारदर्शिता, नियमों के पालन और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़े सवालों को खड़ा करता है। केस की पक्षकार दीप्ति पोखरियाल ने सवाल उठाया कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने अब तक एमडी का चार्ज प्रकाश चंद्र ध्यानी से क्यों नही लिया है। प्रदेश प्रवक्ता जन प्रहार रविंद्र सिंह गुसाईं ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारी को क्यों बचाना चाहती है जिनके खिलाफ उच्च न्यायालय तक आदेश दे चुकी है। मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन आनंद बर्धन ने जनप्रहर के प्रतिनिधिमंडल को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जन प्रहार संयोजक श्रीमती सुजाता पॉल सहसंयोजक पंकज सिंह क्षेत्री, रविंद्र सिंह गुसाईं एवं दीप्ति पोखरियाल मौजूद रहीं। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो जन प्रहार लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलन करेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी उत्तराखंड शासन की होगी।

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