बेखौफ हैं सुपारी किलर!

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दो कुख्यातों की हत्याओं से पनप रहे सवाल?
हत्या, अरेस्टिंग और सारे राज ‘दफन’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। गजब बात है कि एक ओर सरकार ने 2025 तक उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त करने का संकल्प लिया था जिससे आम जनमानस के मन में एक विश्वास की भावना थी कि उत्तराखण्ड अब अपराधमुक्त होगा और उन्हें आजादी के साथ कहीं पर भी आते-जाते हुए किसी का कोई भय नहीं होगा। उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ वर्षों से आपसी विवाद में हत्यायें और जानलेवा हमले के मामले तो देखे गये लेकिन ऐसे अपराधों से आवाम के मन में कभी कोई भय पैदा नहीं हुआ। वहीं पिछले कुछ महीनों के भीतर सुपारी लेकर दो कुख्यातों की जिस तरह से सरेआम गोलियों से भूनकर हत्यायें हुई उसने आम जनमानस के मन में एक बडा डर पैदा कर दिया? एक कुख्यात को जहां पुलिस अभिरक्षा में बदमाशों ने सरेआम मौत की नींद सुलाने के लिए उसे गोलियों से भूनकर मौत दी तो वहीं झारखंड के कुख्यात डॉन को जिस प्लानिंग के तहत राजपुर जैसे वीआईपी इलाके में जिम से बाहर निकलते समय उसकी सीढियों पर ही उसे गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाया उसने राजधानी ही नहीं बल्कि उत्तराखण्ड में एक बडी हलचल मचा दी। सवाल यह तैर रहे हैं कि हत्या के बाद हत्यारों की अरेस्टिंग और उसके बाद मौत की नींद सुलाये गये बदमाशों को लेकर जो राज कई कहानी बयां कर सकते थे वह हमेशा के लिए इसलिए भी दफन होती हुई नजर आ रही है क्योंकि सरकार ने इन दोनो मामलों में आज तक कोई बडी जांच कराने का दम नहीं भरा है?
उत्तराखण्ड के अन्दर दो बडे हत्याकांड ने आम जनमानस के मन में बडे अपराधियों को लेकर जो भावना अपने मन में बना ली है वह सरकार और सिस्टम के लिए एक बडा चिंता का विषय भी होना चाहिए? सवाल यह है कि आखिरकार जिस उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त करने का संकल्प लिया गया था उस उत्तराखण्ड में कैसे सुपारी लेकर भाडे के हत्यारे सरेआम पुलिस को खुली चुनौती देते हुए मौत का खेल खेलने से पीछे नहीं हट रहे हैं? पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विनय त्यागी पर भले ही काफी मुकदमें दर्ज थे लेकिन जब वह पुलिस अभिरक्षा में था तो उसे सुरक्षा देने का जिम्मा पुलिस के पास ही था। पुलिस अभिरक्षा में अगर दो बदमाश दिन दहाडे़ फ्लाई ओवर पर फिल्मी अंदाज में विनय त्यागी को गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाने में कामयाब हुये तो यह पुलिस को भी कटघरे में खडा कर गया था कि आखिर जिन पुलिसकर्मियों के हाथों में हथियार थे वह क्या एक शोपीस थे जिसके चलते उन्होंने भाग रहे सुपारी किल्लर को अपना निशाना बनाने के लिए अपने आपको आगे करने से दूर रखा था? हत्या के बाद अरेस्टिंग और उसके बाद वो सारे राज दफन जो शायद विनय त्यागी के दिल मे थे? हत्यारों ने बस यही बयां किया कि उनका लेनदेन को लेकर विवाद था जिसमें उन्होंने यह हत्याकांड किया? हालांकि यह हत्याकांड कई सवालों को जन्म दे गया है?
वहीं चंद दिन पूर्व झारखंड के कुख्यात डॉन विक्रम शर्मा जो कि एक लम्बे दशक से राजधानी में बेखौफ होकर रह रहा था और उसके पास लाइसेंसी पिस्टल से लेकर स्टोन क्रशर तक का लाइसेंस था उसे जब राजपुर के वीआईपी इलाके में दिन निकलते ही बदमाशों ने गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाया और वह आराम से दुपहिया वाहन पर सवार होकर देहरादून से हरिद्वार और उसके बाद न जाने कहां गायब हो गये यह कई सवालों को जन्म दे गया था? हत्या जिस बेफिक्री से बदमाशों द्वारा की गई थी वह पुलिस को भी कटघरे में खडा कर गई थी और इस कुख्यात को सुपारी किलर मारने के लिए दून आये और उसके बाद वह अपना इंतकाम लेकर फरार हो गये वह काफी रहस्यमय ही नजर आया? सवाल यह है कि आखिरकार उत्तराखण्ड के अन्दर कैसे भाडे के हत्यारे हत्यायें करने के लिए बेखौफ होकर अपनी एंट्री कर रहे हैं और पुलिस सिर्फ हत्या के बाद सुपारी किलर की अरेस्टिंग करके ही अपने आपकी पीठ थपथपा रही है लेकिन दोनो कुख्यातों की मौत के बाद कई ऐसे राज दफन हो गये जो शायद कभी आवाम के सामने नहीं आ पायेंगे?

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