गैरसैंण में ठंड पर ‘सियासत’

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तो फिर कैसे बनेगी गैरसैंण स्थाई राजधानी?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भाजपा व कांग्रेस हमेशा गैरसैंण में स्थाई राजधानी को लेकर अपने-अपने दावे करती रही है और उसने गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी में बजट सत्र कराने के लिए दम भरा तो उसके बाद नौ मार्च को गैरसैंण मंे विधानसभा का बजट सत्र होना तय हो गया लेकिन इसी बीच पहाड के लैंसडॉन से भाजपा विधायक ने कहा कि विधानसभा भवन के लिए स्थान चयन उपयुक्त नहीं है और वहां आक्सीजन की काफी कमी है। भाजपा विधायक के इस बयान से उत्तराखण्ड की सियासत में एकाएक फिर भूचाल आ गया है और यह बहस छिड गई है कि अगर पहाड के नेताओं को भी गैरसैंण में ठंड लग रही है तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि गैरसैंण में बजट सत्र की तारीख जारी होते ही ठंड लगनी शुरू हो गयी है। व्यवस्था का भी रोना धोना शुरू हो गया है। इस बार ठेठ पहाड़ी विधानसभा के भाजपा विधायक ने गैरसैंण के बजट सत्र पर सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र 9 से 13 मार्च तक गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में प्रस्तावित है। सत्र से पहले भवन की भौगोलिक स्थिति और मूलभूत सुविधाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत ने कहा कि विधानसभा भवन के लिए स्थान चयन उपयुक्त नहीं रहा। उनका तर्क है कि ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और बर्फबारी की स्थिति में विधायकों व कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से आधारभूत सुविधाएं बेहतर करने की मांग की है। वहीं उत्तराखंड सचिवालय संघ ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर सत्र के दौरान गैरसैंण में तैनात किए जाने वाले कर्मचारियों की संख्या सीमित रखने का अनुरोध किया है। संघ का कहना है कि भोजन, आवास और अन्य व्यवस्थाओं में कठिनाइयां आती हैं, इसलिए केवल आवश्यक अधिकारियों-कर्मचारियों को ही बुलाया जाए। वहीं कांग्रेस ने सरकार पर गैरसैंण के प्रति अनिच्छा का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि व्यवस्थाएं जुटाना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि इच्छाशक्ति हो तो हर समस्या का समाधान संभव है। इस बार भाजपा विधायक के बयान से एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भराड़ीसैंण में व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ किया जाए या सत्रों के आयोजन को लेकर नई नीति बनाई जाए। आगामी बजट सत्र में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है।
वहीं भाजपा के फायर ब्रांड विधायक विनोद चमोली से जब गैरसैंण में भाजपा विधायक द्वारा ठंड लगने की बात पर मीडिया ने सवाल दागा तो वह अपना फ्रस्टेªशन कांग्रेस और मीडिया पर निकालने लगे और पत्रकारों से यहां तक कह दिया कि आपको ठंड नहीं लगती क्या, आप राहुल गांधी हो क्या? अस्सी-अस्सी साल के हमारे विधायक हैं, आप अपने पिता जी को भेजोगे क्या वहां? विधायक विनोद चमोली ने जिस तरह से मीडिया पर अपने शब्दबाण चलाये उससे साफ नजर आ रहा है कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र कराने को लेकर किस तरह से अब राजनीति का तापमान गर्मा गया है?

उत्तराखण्ड के लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि हमारे पहाड़ के रहने वाले विधायक जो हैं वो गैरसैंण में जाना नहीं चाहते कहते हैं कि वहां ठंडा है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि विधायक कहते हैं कि हमारा राज्य पहाड़ी राज्य है और वहां जाने के लिए मीटिंग एटेंड करने के लिए कह रहे हैं वहां जाडा है इधर-उधर मीटिंग कर लो। नरेन्द्र सिंह नेगी कहते हैं कि इसमें मसूरी के विधायक गणेश जोशी भी हैं जिन्हें मसूरी की ठंड बर्दाश्त है लेकिन गैरसैंण की ठंड बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पौडी की ठंड बर्दाश्त है लेकिन गैरसैंण की ठंड बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमे मुझे बहुत हंसी आती है कि हमने कैसे विधायकों को चुना है। उन्होंने कहा कि हमें जो कुछ भी मिला है वो आंदोलन से मिला है।

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