प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व मौजूदा हरिद्वार से सांसद ने अरविंद पांडे को लेकर अपने दिल की व्यथा मीडिया के सामने उजागर की और उन्होंने कहा कि विधायक का उन्होंने वो दौर देखा है जब वह पेड के नीचे बैठकर जनता की समस्या सुनते थे। सांसद का कहना है कि अगर पार्टी का कोई नेता किसी बात से नाराज हो तो उसे संभालने वाला भी कोई होना चाहिए। सांसद ने एक बार फिर विधायक को लेकर जो अपनी बात रखी है उससे साफ नजर आ रहा है कि वह पार्टी में बिखराव के बजाए सबको एक साथ जोडने मे ही विश्वास दिखा रहे हैं जिससे कि यह संदेश राज्य से लेकर देश में न जाये कि उत्तराखण्ड भाजपा के अन्दर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
हरिद्वार से सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया में अपनी बात साफतौर पर रखी है कि विधायक अरविंद पांडे से हमारे लोगों का संबंध सन 1985-87 से है। जब वह संघ के कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि हमारे साथ वह विधायक भी रहे मंत्री भी रहे। मेरे साथ काम मिलकर सरकार में काम किया। हमारे पुराने संबंध है और पुराने कार्यकर्ता पर किसी तरह की दिक्कत होती है तो हम लोगों का कर्तव्य है भाजपा एक परिवार है। उन्होंने कहा कि हम वहां जाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि वहां जाकर उनकी समस्या क्या है उसे सुनते लेकिन उन्होंने रात को फोन किया कि भाई साहब यहां पर वातावरण गहमागहमी का हो रहा है और आपका आशीर्वाद मिल गया और कोई समस्या होगी तो आपके पास आ जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जहां उठते बैठते है और माना अरविंद पांडेय नाराज है तो कोई संभालने वाला चाहिए सीएम से या किसी से सीनियर कार्यकर्ता नाराज है तो उससे बातचीत करते और वह काफी सीनियर लीडर है। रावत ने कहा है कि 2007 से लगातार विधायक है और जिन लोगों से वह लडकर आए वह सामान्य लोग नहीं थे। जिनके सामने चुनाव लडे वह साधारण लोग नहीं थे। उन्होंने कहा कि पेड के नीचे बैठकर जनता की समस्या अरविंद पांडेय ने विधायक होते हुए सुनी और अरविंद पांडेय की स्थिति को देखा और आज उठते हुए देख रहे है। उन्होंने कहा कि यह हमारा दायित्व बनता है कि सीनियर लीडर की बात को सुने और उसका समाधान करें। उन्होंने कहा कि ओपन फोरम में न जाए और निश्चित रूप से पांडेय की भावनाएं आहत हुई है ओर धैर्य पूर्व चले और बादल आते है चले जाते है।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व जब गदरपुर से भाजपा के पांच बार के विधायक अरविंद पांडे ने उधमसिंहनगर में हुई किसान की जांच की मौत सीबीआई से कराये जाने की बात कहीं थी तो उसके बाद उन पर अचानक कुछ लोगों द्वारा प्रहार शुरू किया गया था। विधायक के परिजनों पर जब कुछ लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया और विधायक को भी अपने निशाने पर लिया था तो विधायक अरविंद पांडे ने देहरादून पुलिस मुख्यालय में दस्तक देकर डीजीपी दीपक सेठ को पत्र दिया था कि जिन्होंने उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने का आरोप लगाया है उनकी और उनके परिवार समेत उनका नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी और यह भी कहा था कि डीजीपी जल्द से जल्द इस टेस्ट को करायें और अगर उनका परिवार इसमें दोषी पाया गया तो वह अपनी राजनीति से सन्यास ले लेंगे। उधर अरविंद पांडे के आवास पर जब अतिक्रमण को लेकर नोटिस चस्पा किया गया था तो काफी भूचाल मचा था लेकिन अब विधायक ने गदरपुर के उप जिलाधिकारी और तहसीलदार को पत्र दिया है कि संतोषनगर वार्ड नम्बर तीन में गुलरभोज स्थित उनके कैंप कार्यालय और आवास को अतिक्रमण में दर्शाते हुए 19 जनवरी को नोटिस चस्पा किया गया है इसलिए वह आग्रह करते हैं कि उनके कार्यालय और आवास का उनकी उपस्थिति में चिन्हिकरण कर अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सरकारी भूमि पर बने उनके कार्यालय एवं आवास को अपने कब्जे मे ले लें और उन्हें और उनके वारिसान को कोई आपत्ति नहीं है। त्रिवेंद्र रावत के साथ राजनीति करने वाले अरविंद पांडे आज भी अपनी बात पर अडिग हैं और उनके दिल की व्यथा को लेकर जिस तरह से त्रिवेंद्र ंिसह रावत ने उन्हें अपना साथ दिया है उससे साफ नजर आ रहा है कि वह पार्टी को एक सूत्र में ही बांधे रखने के हितैषी हैं।
