पहेली बना मंत्रिमण्डल का विस्तार?

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आखिरी दौर में क्या हाईकमान मंत्री बनाने का लेगा रिस्क!
नड्डा के जाने के बाद फिर विधायकों में हो रही धुक्क-धुक्क
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में नौ साल से भाजपा की सरकार सत्ता मे है और प्रचंड बहुमत वाली सरकार मे शामिल तमाम विधायक चार साल से सपना संजोए हुये हैं कि उन्हें कब मंत्री पद का ताज मिलेगा जिसके चलते वह अपने इलाके में अपने रूतबे का इकबाल दिखाकर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी जीत को मजबूत करने की दिशा में सफल हो जायेंगे? चार साल से मंत्रिमण्डल का विस्तार एक पहेली ही बना हुआ है और भाजपा तथा संगठन के कुछ नेता बार-बार यही दम भरते आ रहे हैं कि सरकार का मंत्रिमण्डल बढेगा लेकिन यह दावा चार साल से तो हवा-हवाई होता हुआ ही नजर आ रहा है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के दून आने पर भाजपा के विधायकों में फिर धुक्क-धुक्क शुरू हो गई कि शायद अब भाजपा हाईकमान मंत्रिमण्डल विस्तार को हरी झंडी देकर कुछ विधायकों के सिर पर मंत्री पद का ताज सजा देंगे? हालांकि राज्य के अन्दर यही बहस चल रही है कि क्या भाजपा हाईकमान सरकार के आखिरी साल में मंत्री पद बाटने का रिस्क लेने को तैयार होेगा यह एक बडी पहेली अभी भी राज्य के गलियारों में बनी हुई है?
उत्तराखण्ड में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार है और राज्य सरकार के माथे पर इसलिए भी चिंता की लकीरें हैं क्योंकि आखिरी दौर में वह भाजपा के किन विधायकों को मंत्री पद देने का जोखिम उठाये यह उसकी समझ में नहीं आ रहा है? धामी सरकार में पांच मंत्री पद खाली हैं और हर कोई विधायक यही आस लगाये बैठा है कि आखिरी दौर में उसे सरकार अपने मंत्रिमण्डल में शामिल कर उनके रूतबे में चार चांद लगा दे। पांच मंत्री पद खाली होने के बावजूद भी किसी भी विधायक को मंत्री पद से नहीं नवाजा गया है क्योंेिक मंत्री पद की नियुक्ति भाजपा हाईकमान की हरी झंडी के बाद ही हो सकती है और ऐसा लगता है कि अभी तक सरकार को हाईकमान ने ऐसी कोई हरी झंडी नहीं दी है जिससे की पांच विधायकों को मंत्री का ताज पहनाया जा सके? देखने में आ रहा है कि पिछले काफी वर्षों से भाजपा के अधिकांश विधायकों के मन में मंत्री बनने की चाहत जागी हुई है और वह अकसर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करने के लिए भी उनकी चौखट पर जाते हैं जिससे की मुख्यमंत्री भाजपा हाईकमान के सामने ऐसे विधायकों की पैरवी कर सकें और उन्हें गिफ्ट के रूप में मंत्री पद का ताज मिल सके।
चार साल से मंत्री बनने का ख्वाब देखने वाले भाजपा के हर दूसरे विधायक के मन में मंत्री बनने को लेकर जो आस दिखाई दे रही थी वह कहीं न कहीं अब टूटती हुई नजर आ रही है? हालांकि चंद दिन पूर्व जब भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व केन्द्र में मंत्री जेपी नड्डा जौलीग्रांट आये तो उन्होंने वहां कोर कमेटी की बैठक भी ली। हालांकि इस बैठक में क्या हुआ और क्या नहीं यह तो भाजपा नेताओं के मन में है लेकिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने एक बार फिर धामी सरकार के मंत्रिमण्डल के विस्तार को लेकर जो दावा किया है उससे एक बार फिर उन विधायकों के मन में धुक्क-धुक्क शुरू हो गई है जो वर्षों से धामी सरकार के मंत्रिमण्डल में शामिल होने की आस लगाये हुये हैं? राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी बहस चली हुई है कि क्या भाजपा हाईकमान चुनाव के आखिरी साल को देखते हुए मंत्रिमण्डल विस्तार करने का जोखिम उठायेगा क्योंकि भाजपा के विधायकों की संख्या बहुत ज्यादा है और मंत्री पद पर आसीन होने के लिए सिर्फ पंाच विधायक ही चाहिए इसलिए ऐसा लगता है कि भाजपा हाईकमान आखिरी दौर में मंत्रिमण्डल का विस्तार करने के लिए सम्भवतः अपनी हरी झंडी नहीं देगा?

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