‘क्राइम कैपिटल’ में ‘योगी’ के ‘ठांय-ठांय’ की पुकार

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राजधानी पुलिस की ‘खामोश गश्त’ की 20 दिन में खुल गई कलई, बदमाश लोगों की जान लेकर पुलिस के इकबाल को दे रहे चुनौती
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। ‘क्राइम कैपिटल’ के रूप में चर्चित हो रही राजधानी को अब यूपी के बाबा के ‘ठांय-ठांय’ की आवाज की बहुत ही बेसब्री से दरकार है। अगर दून को पहले जैसा देखने और पुलिस के ‘इकबाल’ को बरकरार रखने की हसरत यहां के बाशिंदों और शासन-प्रशासन में बैठे अफसरों को है, तो यूपी के सीएम योगी के फार्मूले को अपराधों को रोकने में प्रयोग करना ही पड़ेगा, वरना जिस प्रकार से बेखौफ बदमाश और गैंगस्टर दून को अपनी शरणस्थली बनाते हुए अपराध-दर-अपराध करने से बाज नहीं आ रहे, उसकी रफ्तार दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती ही जाएगी।
यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि इधर जिस प्रकार बीस दिन के भीतर बदमाशों ने दून घाटी समेत जिले में छह हत्याओं की घटनाओं को अंजाम देकर ‘पुलिस के इकबाल’ को चुनौती दी, उससे तो यही आभास हो रहा है। राजधानी दून में पूरी सरकार जहां निवास करती है और पूरा पुलिस-प्रशासन का सरकारी अमला दिन-रात शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी करता रहता है, इसके बावजूद अपराध दर अपराध बढ़ने से जहां आम नागरिकों में बेहद ही खौफ का आलम व्याप्त हो रखा है, वहीं अपराधियों के हौंसले बुलंद हो रखे हैं। राजधानी देहरादून में अब बेधड़क और बेखौफ बदमाश रात के ‘अंधियारे’ में नहीं, बल्कि ‘दिन के उजाले’ में हत्या जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इतना ही नहीं चलती-फिरती और व्यस्त सड़कों पर दिनदहाड़े लोगों को मौत के घाट उतारकर पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं।
हां, एक बात और है कि बदमाश एक-पर-एक हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे और पुलिस है कि इन वारदातों से न तो सबक ले रही और न ही ‘सख्त गश्त’ कर खौफजदा लोगों के मन में पैदा हुए डर को कम कर रही है। पुरानी बातों को अगर एक किनारे कर दें और देखें तो इधर बीस दिन के अंदर छह लोगों की हत्याएं कर दी गईं हैं। इनमें इसी वर्ष 29 जनवरी को विकासनगर में जहां एक छात्रा की हत्या कर दी गई, वहीं एक फरवरी को ऋषिकेश में प्रेम-प्रसंग के चलते एक युवती की हत्या कर दी गई। दोनों मामले सुर्खियों में बने ही हुए थे कि दो फरवरी को शहर के बीचों बीच मच्छी बाजार में गुंजन श्रीवास्तव की चापड़ से बेरहमी से काटकर मौत के घाट सिरफिरे ने उतार दिया।इसके बाद ग्यारह फरवरी को दिनदहाड़े डालनवाला कोतवाली क्षेत्र के तिब्बती मार्केट के सामने और प्रेस क्लब के पास जीएमएस रोड स्थित एक गैस एजेंसी के मालिक अर्जुन शर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। अभी लोग इस हत्याकांड से उबरे भी नहीं थे कि तेरह फरवरी को राजपुर रोड सिल्वर सिटी मॉल स्थित जिम से निकल रहे झारखंड के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये बात दीगर है कि इस पर बीस हत्याओं समेत करीब पचास से ज्यादा संगीन प्रकार के केस दर्ज थे।
अभी राजधानी पुलिस विक्रम शर्मा हत्याकांड के बदमाशों को गिरफ्तार करने के लिए तमाम राज्यों की श्पदयात्राश् ही कर रही थी कि फिर 17 फरवरी को पुलिस ने नौ फरवरी से गायब बसंत विहार के शास्त्री नगर निवासी दिगंबर धीमन का हरिद्वार के चिड़ियापुर के जंगल से शव बरामद किया। दिगंबर की उसके ही दोस्तों ने उसी दिन हत्या कर शव को ठिकाने लगा दिया था। वैसे प्रदेश की राजधानी की जनसंख्या का आकलन किया जाए तो शायद यूपी की राजधानी लखनऊइससे चार गुना ज्यादा बड़ी होगी, लेकिन जिस तरह से योगी बाबा बदमाशों के लिए काल बने हुए हैं, वैसा ही रवैया यहां के शासन-प्रशासन को भी अपनाना पड़ेगा, साथ ही अपराधियों को यूपी सरकार की तरह सख्त संदेश देना होगा कि अगर अपराध किया तो… रामनाम सत्य करने से पुलिस पीछे नहीं हटेगी। 

इंसेट—

बाबा का फार्मूला, एक चौराहे पर बचे तो दूसरे पर यमराज…
वैसे देखा जाए तो कभी उत्तरप्रदेश का पश्चिमी उत्तर प्रदेश अपराधों के मामले में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश में भी हमेशा सुर्खियां बटोरता रहा है, लेकिन जब से प्रदेश की सत्ता योगी आदित्यनाथ के हाथ में आई, तब से न तो पश्चिमी यूपी में अपराधी सिर उठा पा रहे और न ही पूरे उत्तर प्रदेश। अब तो अपराधी अपनी जान बचाने के लिए बिलों में छिपे बैठे हैं। इसका कारण, बाबा की बिना लाग लपेट बातें हैं, जिसमें प्रदेश में बदमाशों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति ने भी असर दिखा रखा है। दूसरी, बदमाशों के लिए ‘एक चौराहे पर वारदात किया तो दूसरे या तीसरे चौराहे पर यमराज इंतजार कर रहा है, काफी असर दिखा रहा है।

अगर आप उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रह रहे हैं तो जरा संभलकर! यहां पुलिस अपने रफ्तार में भाग रही है और बेखौफ बदमाश अपनी रफ्तार में। अब अगर दोनों के बीच रेस करने की कोशिश करोगे तो फिलहाल बदमाश पूरी तरह से भारी हैं, अब आप ये न पूछे… क्यों… क्योंकि बदमाश यहां पर खुलेआम अपराध कर रहा और बेचारी पुलिस… बस उसके पीछे भाग ही रही है। … और अगर भागे न तो क्या करे? उसको भी ऊपर तक जवाब देना ही पड़ता है।

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