किसके आशीर्वाद से गैंगस्टर बना क्रेशर मालिक?

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भ्रष्टाचार की गंध से महक रहा पूरा मुद्दा
बड़ी जांच होगी या डिब्बा बंद करेगी धाकड़ सरकार!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड को अपराधियों और माफियाओं से आजादी दिलाने के लिए सरकार के मुखिया ने संकल्प लिया हुआ है और उन्होंने राज्य के अन्दर हर संदिग्ध पर नजर रखने के लिए घर-घर सत्यापन अभियान चलाने का हुक्म दे रखा है। सरकार के आदेश का किस तरह से माखौल उडा यह उस समय पता चला जब देहरादून में झारखंड का एक कुख्यात गैंगेस्टर राजपुर रोड के सिल्वर सिटी में बदमाशों की गोलियों से छलनी होकर मौत की नींद सो गया था। हैरानी वाली बात है कि यह गैगेस्टर राजधानी में तो वर्षों से रहता रहा और किसी को उसके अपराधजगत का इतिहास पता ही नहीं चल पाया यह हैरान करने जैसा ही दिखाई दिया? आश्चर्यचकित बात यह है कि इस गैंगेस्टर को किससे आशीर्वाद मिला हुआ था कि वह काशीपुर में स्टोन क्रेशर का वर्षों से मालिक बना हुआ था। गैंगेस्टर मर गया लेकिन उसके पीछे के कई राज अभी भी एक पहेली बने हुये हैं और यह बात उठ रही है कि क्या उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ राजनेताओं और अफसरों ने इस गैंगेस्टर से याराना कर लिया था जिसके चलते उसे स्टोन क्रेशर का लाइसेंस तक दे दिया गया। अब बहस चल रही है कि अगर धाकड़ सरकार इस बात की बडी जांच कराये कि गैंगेस्टर को स्टोन क्रेशर दिलाने वाले कौन-कौन अफसर शामिल थे तो उन सबके चेहरे बेनकाब हो जायेंगे जो सरकारों को अपने हित के लिए धोखा देते आ रहे हैं?
राजधानी में चंद दिन पूर्व जब राजपुर के सिल्वर सिटी से जिम करके वापिस लौट रहे एक व्यक्ति को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतारा गया तो उसने समूची राजधानी के अन्दर एक डर पैदा कर दिया था। पुलिस ने इस हत्याकांड के चंद मिनटों बाद ही यह दावा कर दिया था कि मरने वाला व्यक्ति झारखंड का कुख्यात गैंगेस्टर विक्रम शर्मा था जिस पर लगभग पचास से ज्यादा सनसनीखेज अपराध दर्ज थे। सवाल यह खडा हुआ कि अगर पुलिस सत्यापन अभियान में बडो-बडो तक अपनी दस्तक देती तो जरूर उसे इस बात का इल्म हो जाता कि राजधानी में झारखंड का एक कुख्यात भी रह रहा था? झारखंड का खतरनाक गैंगेस्टर कैसे पुलिस की नजरों से हमेशा बचता रहा यह तो कई सवालों को जन्म दे रहा है लेकिन सबसे हैरत वाली बात यह है कि जिस कुख्यात गैंगेस्टर पर झारखंड मे पचास से ज्यादा मुकदमे कायम थे उसके साथ आखिरकार वो कौन-कौन राजनेता और अफसर अपना याराना निभा रहे थे जिन्होंने गैंगेस्टर को उधमसिंहनगर के काशीपुर में स्टोन क्रेशर का लाइसेंस दिलाकर उस पर अपनी दरियादिली दिखाई थी?
गैंगेस्टर की हत्या के बाद से अभी सरकार को कई सवालों का जवाब देना है कि आखिरकार वो कौन अफसर हैं जिन्होंने कुख्यात गैंगेस्टर को स्टोन क्रेशर का लाइसेंस दिलाने के लिए अपनी दिलचस्पी उसमें दिखाई थी? सवाल पनप रहे हैं कि क्या कुछ राजनेता और अफसरों की बदौलत झारखंड का यह कुख्यात काशीपुर में बेखौफ होकर अपना स्टोन क्रेशर एक लम्बे समय से चला रहा था? इस स्टोन क्रेशर का लाइसेंस दिलाने मे कहीं न कहीं अब भ्रष्टाचार की गंध की महक भी कहीं न कहीं उठने लगी है और यह बहस भी चल गई है कि अगर उत्तराखण्ड की धाकड़ सरकार कुख्यात गैंगेस्टर को स्टोन क्रेशर दिलाने वाले अफसरों की बडी जांच कराने के लिए आगे आये तो उससे कई सवालों का जवाब आवाम को भी मिलेगा? हालांकि अभी यह रहस्य है कि धाकड़ सरकार क्या इसकी बडी जांच करायेगी या फिर इस मामले को डब्बा बंद कर देगी।

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