लहुलुहान राजधानी

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48 घंटे में दिन दहाडे़ दूसरा मर्डर
पुलिस के इकबाल का सीना छलनी!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के कुछ जनपदांे में अपराधियों ने पिछले काफी समय से पुलिस के इकबाल का सीना छलनी करके उसे खुली चुनौती देने के लिए जो ललकार लगा रखी है उसने आम जनमानस के मन में एक भय पैदा कर दिया है। आम जनमानस को खाकी से ही उम्मीद रहती है कि अगर उसके साथ किसी ने अन्याय किया तो वह पुलिस की शरण मे जाकर न्याय लेगा लेकिन जिस हैवानियत के साथ अपराधियों ने अपराध करने का दौर शुरू किया है वह सरकार और पुलिस महकमे के लिए चिंता का विषय होना चाहिए कि आखिरकार चाहे किसी का जमीनी विवाद हो या किसी का पैसे के लेनदेन और कोई भी विवाद हो तो उसमें दुसाहसिक अंदाज में अपराध होना सिस्टम और आम जनमानस के लिए बडा चिंता का विषय होना चाहिए क्योंकि पुलिस यह कहकर पल्ला नहीं झाड सकती कि आपसी रंजिश या किसी विवाद के चलते कोई हत्या या अपराध हुआ है? 48 घंटे में राजधानी के अन्दर दिन दहाडे हुये दूसरे मर्डर ने आवाम के मन में एक डर पैदा कर दिया है और जिस तरह से सडकों पर खून बह रहा है उसको लेकर आवाम के मन में यह भय बन गया है कि वह ऐसी लहुलुहान हो रही राजधानी में कैसे रह पायेंगे?
आज सुबह राजपुर रोड में स्थित सिल्वर सिटी के बाहर एक युवक को गोलियों से भूनकर बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया। सुबह हुई दिल दहला देने वाली घटना ने पुलिस महकमे के सारे सिस्टम को कटघरे में लाकर खडा कर दिया? पुलिस कप्तान से लेकर और अफसर भी मौके पर पहुंचे और पता चला कि मारा गया युवक विक्रम सिंह है जो कि लम्बे अर्से से दून मे ही रह रहा था और यहां प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। पुलिस को जांच में पता चला कि उधमसिंहनगर काशीपुर में विक्रम का स्टोन क्रेशर भी है और यह शंका भी जताई जा रही है कि इस स्टोन क्रेशर को लेकर या किसी सम्पत्ति विवाद को लेकर विक्रम का कोई बडा विवाद चल रहा था और इसी विवाद के चलते उसे दिन दहाडे़ गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुला दिया गया। बदमाशों ने जिस अंदाज में गोलियां चलाई उसे देखकर साफ नजर आ रहा है कि वह किसी बडे गैंग के शूटर हो सकते हैं क्योंकि एक गोली विक्रम के माथे पर लगी और दो-तीन गोलियां उसके सीने और उसके आसपास लगी होना बताया जा रहा है? बदमाश आये और विक्रम को गोलियों से भूनकर भाग खडे हुये तो एक बार फिर यह सवाल पनप गया कि आखिर राजधान ी को किसकी नजर लग गई जिसके चलते एक के बाद एक राजधानी के अन्दर मर्डर की वारदातें हो रही हैं और राजधानी लहुलुहान देखकर आम जनमानस के मन में एक भय पैदा होने लगा है? पुलिस कप्तान ने बदमाशों को पकडने के लिए पुलिस टीमें मैदान में उतारी हैं लेकिन सवाल खडा हो रहा है कि कल ही एक हत्याकांड में शामिल दो शूटरों की पुलिस से हुई मुठभेड में उनके पैरों में गोलियां लगी लेकिन इस मुठभेड के चौबीस घंटे बाद ही पेशेवर अपराधियों ने दिन-दहाडे़ राजपुर जैसे पॉश क्षेत्र में स्थित एक जीम के बाहर एक प्रॉपर्टी डीलर को गोलियों से भूनकर मौत की नींद सुलाकर पुलिस के इकबाल का सीना छलनी कर दिया है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड को अपराधियों और माफियाओं से आजादी दिलाने का जो वचन सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने दिया था उस वचन के चलते आम मनमानस अपने आपको सुरक्षित महसूस करने लगा था और उसे यह इल्म हो गया था कि अब उसे अपराधियों और माफियाओं के डर से आजादी मिलेगी। पिछले कुछ समय से अचानक उत्तराखण्ड के कुछ जिलों को अपराधियों ने अशांत करके जिस तरह से पुलिस महकमे को ललकारने का दुसाहस शुरू किया है उससे आम जनमानस के मन में भय का माहौल है। बहस चल उठी है कि जब पुलिस अभिरक्षा में बदमाशों ने दिन दहाडे़ एक अपराधी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया तो आम जनमानस के मन में तो अपराधियों का डर रहेगा ही? उत्तराखण्ड के अन्दर बहस चल उठी है कि अपराधी आखिर किसकी शह पर सर उठाकर एक के बाद एक सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर सड़कों पर खून बहा रहे हैं?

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