विधायक पांडे ने दिया अल्टीमेटम
कहाः‘भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा’ भ्रष्ट अधिकारी कर रहे सरकार को बदनाम…
रुद्रपुर(राजीव चावला)। उधम सिंह नगर में जिला विकास प्राधिकरण (डीडीए) के गठन के बाद से प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त में आ रही दिक्कतों को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में गदरपुर के भाजपा विधायक अरविंद पांडे अचानक जिला अधिकारी कैंप कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया व अपर जिलाधिकारी एवं जिला विकास प्राधिकरण सचिव पंकज उपाध्याय से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया से रूबरू होते हुए विधायक पांडे ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में कुछ ऐसे भ्रष्ट अधिकारी तैनात हैं जो जनता को परेशान कर रहे हैं और उनकी कार्यप्रणाली से सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 18 फरवरी तक प्रॉपर्टी से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला जाएगा।
प्रॉपर्टी कारोबारियों और आम लोगों में बढ़ रही नाराजगी
विधायक पांडे ने कहा कि जिला विकास प्राधिकरण के गठन के बाद से ही रजिस्ट्री और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया जटिल हो गई है। आम नागरिकों को अपनी खरीदी गई जमीन की रजिस्ट्री कराने में अड़चनें आ रही हैं, वहीं प्रॉपर्टी डीलर भी बिक्री प्रक्रिया में बाधाओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग महीनों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा है। इससे न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि कारोबार भी प्रभावित हो रहा है।
पहले भी उठ चुका है मामला
गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने भी जिला विकास प्राधिकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उन्होंने अधिकारियों से वार्ता कर चेतावनी दी थी कि यदि जल्द रजिस्ट्री प्रक्रिया नहीं खोली गई और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब सत्ताधारी दल के विधायक अरविंद पांडे का भी इसी मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना प्रशासन पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा कर रहा है।
“सरकार को बदनाम कर रहे कुछ अधिकारी”
विधायक पांडे ने मीडिया के सामने कहा,
“हमारी सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन जिले में कुछ अधिकारी ऐसे हैं जो जनता के काम नहीं कर रहे और सरकार को बदनाम कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जनता को बेवजह परेशान नहीं होने दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि यदि तय समय सीमा तक व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन या अन्य लोकतांत्रिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासन की ओर से क्या संकेत?
सूत्रों के अनुसार, बैठक में जिलाधिकारी ने विधायक को आश्वस्त किया कि प्राधिकरण से संबंधित समस्याओं की समीक्षा की जा रही है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर फाइलों की समीक्षा और प्रक्रिया को सरल बनाने पर चर्चा होने की जानकारी मिली है।
सियासी मायने भी अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रॉपर्टी से जुड़ा मुद्दा सीधे तौर पर मध्यम वर्ग और व्यापारिक वर्ग को प्रभावित करता है। ऐसे में इस विषय पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों का सक्रिय होना आने वाले समय में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत हो सकता है। अब सबकी नजर 18 फरवरी पर टिकी है क्या प्रशासन तय समय में समाधान देगा या जिले में प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन तेज होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
