कुर्सी के मोहजाल में फंसे राजनेता!

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मंत्री बनने की चाहत में बेचैन दिखते विधायक
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में दूसरी बार भाजपा की सरकार सत्ता पर आसीन है और राज्य के अन्दर प्रचंड बहुमत की सरकार होने से उन विधायकों में मंत्री बनने की चाहत हमेशा दिखाई देती रही है जिन्हें उनके इलाके की जनता ने विधानसभा में उन्हें विधायक बनाकर उनसे बडी उम्मीद पाली हुई है। उत्तराखण्ड में एक लम्बे दशक से कुछ मंत्री पद की कुर्सी खाली हैं और राज्य के अधिकांश विधायकों की चाहत है कि आखिरी दौर मे ही सही उन्हें सरकार के मंत्रिमण्डल में शामिल कर लिया जाये जिससे कि वह विधानसभा चुनाव से पूर्व अपनी विधानसभा में आवाम को इलाकेे के विकास में एक नया गिफ्ट दे सकें? हालांकि सरकार का मंत्रिमण्डल बनने की चर्चाएं तो हमेशा राजनीतिक गलियारों में उठती रही हैं लेकिन यह मंत्रिमण्डल आखिरकार क्यों अटका हुआ है यह हमेशा एक नई बहस को जन्म देता आ रहा है। पिछले काफी समय से देखने मे आ रहा है कि भाजपा के कुछ सीनियर विधायक यही इच्छा पाले हुये हैं कि सरकार अपना मंत्रिमण्डल का विस्तार कर उन्हें भी मंत्री पद से नवाज दें। कुर्सी के मोहजाल में फंसे यह राजनेता (विधायक) हर दिन कहीं न कहीं एक बडा ख्वाब देख रहे हैं कि शायद आने वाले किसी भी त्यौहार से पहले उन्हें मंत्री पद का तोहफा मिल जाये और मंत्री बनने की चाहत में काफी विधायक हमेशा आम जनमानस के बीच में बेचैन दिखाई देते आ रहे हैं कि उनका मंत्री पद पर आसीन होने का ख्वाब आखिर कब पूरा होगा?
उत्तराखण्ड में पिछले नौ साल से भाजपा की सरकार सत्ता में है और पार्टी के काफी नेता ऐसे हैं जो लम्बे समय से विधायक बनते आ रहे हैं लेकिन उनका मंत्री बनना एक सपना ही बना हुआ है जिसके चलते उनके मन मे कहीं न कहीं एक पीडा जरूर देखने को मिलती है कि आखिर उन्हें मंत्री पद से नवाजने के लिए सरकार में क्यों आज तक शामिल नहीं किया गया है? भाजपा प्रचंड बहुमत की सरकार से सत्ता चला रही है और अकसर राज्य के अन्दर यही आवाज उठती आ रही है कि सरकार कभी भी अपने मंत्रिमण्डल का विस्तार कर सकती है। अकसर चर्चाएं पनपने लगती हैं कि सरकार कुछ विधायकों को अपने मंत्रिमण्डल में शामिल करेगी और कुछ विधायकों के नामों की मंत्री पद को लेकर चर्चाएं भी तेज होती रहती हैं लेकिन चार साल से तो यह चर्चाएं एक जुमले से ज्यादा कभी कुछ हुई नहीं? देखने मे आ रहा है कि पिछले कुछ महीनों से भाजपा के काफी विधायक एक-एक कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुुलाकात करने के लिए उनके पास जाते रहे हैं और उसके बाद से ही चर्चाएं पनपती रही हैं कि शायद इन विधायकों को अपने मुख्यमंत्री से उम्मीद है कि वह उन्हें मंत्री बनाने के लिए भाजपा हाईकमान के सामने उनकी मजबूती के साथ पैरवी जरूर करेंगे जिससे वह मंत्री पद पर आसीन हो सकें? हालांकि ऐसे विधायकों का मंत्री बनने का सपना आज तक तो एक ख्वाब ही नजर आ रहा है और बहस चल उठी है कि आखिरकार चुनाव के आखिरी साल में क्या भाजपा हाईकमान मात्र कुछ विधायकों को मंत्री बनाने का जोखिम उठा पायेगा क्योंकि विधायकों की संख्या बडी है और हर विधायक में कहीं न कहीं मंत्री बनने की चाहत है इसलिए शायद ही भाजपा हाईकमान राज्य के अन्दर मंत्रिमण्डल के विस्तार को लेकर अपनी हरी झंडी देगा?
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि सत्ता में जब भी किसी राजनीतिक दल की सरकार आई तो उसके विधायकों की नजर कुर्सी पर जा टिकती हैं और उनके मन में बेहतर कुर्सी पाने की जो इच्छा हिचकौले मारती है वह किसी से छिपा नहीं रहा है। उत्तराखण्ड में जब सरकार सत्ता में आती है तो पार्टी के हर दूसरे राजनेता के मन में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने की चाहत जुट जाती है और वह उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक अपनी सेटिंग-गेटिंग करने के मनसूबों को धरातल पर उतारने के लिए आगे बढते रहते हैं लेकिन अधिकांश राजनेता अपनी इस चाहत में धडाम होते ही दिखाई दिये और यह सिलसिला कांग्रेस व भाजपा में हमेशा देखने को मिलता रहा है। उत्तराखण्ड में धाकड अंदाज में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सत्ता चला रहे हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति से उत्तराखण्ड के अन्दर बाइस सालों से चले आ रहे मिथक को तोडते हुए एक बार फिर भाजपा की सरकार को सत्ता में लाकर खडा कर दिया था। वहीं कुछ राजनेता अभी भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं और उनकी एक बडी कुर्सी पर दिखाई दे रही नजर किसी से छिपी नहीं है लेकिन यह भी सच है कि खुली आंखो से सपने देखने वाले चंद राजनेताओं को वो कुर्सी कभी नसीब नहीं हो पायेगी जिसका वह ख्वाब देखते रहते हैं। अब पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमण्डल में कुछ विधायकों को मंत्री पद से नवाजा जाना है जिसको लेकर अधिकांश विधायकों की नजर मंत्री पद की कुर्सी पर लगी है और वह यही आस लगाये बैठे हैं कि शायद भाजपा हाईकमान उन्हें अपना आशीर्वाद देकर मंत्री की कुर्सी उन्हें सौंप दें।

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