अंकिता को न्याय दिलाने की यलगार

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देहरादून(नगर संवाददाता)। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आहवान पर न्याय दिलाए जाने की मांग को लेकर बुलाई गई महापंचायत में विपक्षी राजनैतिक दलों व विभिन्न सामाजिक संगठनों अपनी सहभागिता निभाई और सभी ने एक स्वर में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाया जाए और वीआईपी को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे डाला जाए। सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाए, क्योंकि वर्तमान में चल रही सीबीआई जांच पर किसी को भी विश्वास नहीं है। वहीं दूसरी ओर आरोप लगाया गया कि महापंचायत में शामिल होने आ रहे लोगों को पुलिस ने रोका। यहां परेड ग्राउंड के पास सड़क पर बुलाई गई महापंचायत में लोगों ने शिरकत की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री व इंडिया गठबंधन के सहयोगी हरीश रावत ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की वर्तमान समय में चल रही सीबीआई जांच पर किसी को विश्वास नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिल सकता है। उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच चल रही है, लेकिन अंकिता के माता पिता की शिकायत पर क्यों एफआईआर दर्ज नहीं की गई यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित शिकायत को जांच का आधार नहीं मान सकते है। उन्होंने कहा कि जो वर्तमान में सीबीआई जांच चल रही है वह केवल जनता को भ्रमित करने वाली है। उन्होंने कहा कि आज एक ही अंकिता नहीं है। अभी हाल ही में दून में तीन कामकाजी महिलाओं की हत्याएं हुई है और वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं हैै। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीति नहीं है और जो लोग कहते है कि राजनीति है तो जरूर राजनीति है। उन्होंने कहा कि राजनीति से बड़ी जनभावना होती है और जन भावनाओं के अनुरूप व जन दवाब के अनुसार प्रदेश सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी लेकिन जो जांच चल रही है वह सही तरीके से नहीं चल पाएगी क्योंकि वीआईपी सामने है और उसे बचाने का जिस प्रकार से प्रदेश की सरकार हो या दिल्ली की सरकार बचाने का काम करती आ रही है।
मंच की सदस्य कमला पंत ने कहा कि किसी भी जांच की बुनियाद एफआईआर होती है, लेकिन इस मामले में जो एफआईआर आनन फानन में की गई है वह पूरी तरह से संदिग्ध है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के माता पिता की शिकायत पर एफआईआर क्यों नहीं की गई है और उन्हें शुरू से ही इससे अलग रखा गया है। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं के अनुरूप सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई जांच की जानी चाहिए। पंत ने कहा कि जस वीआईपी की चर्चा सामने आई, उस पर सरकार जानबूझकर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा प्रायोजित एफआईआर पर की जा रही जांच को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अजीत अंजुम ने कहा है कि वीआईपी के नामों के खुलासे भाजपा के ही लोगों ने किए है तो उन्हें पद से भी नहीं हटाया गया और साक्ष्य मिटाने वालों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिससे वीआईपी की जांच कर सलाखों के पीछे जाए, लेकिन केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार वीआईपी को बचाने में जुटी हुई है, क्योंकि जो भी वीआईपी है वह भाजपा से जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित शिकायत को जांच का आधार नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष को जारी रखेंगें। उन्होंने कहा कि जो वर्तमान में सीबीआई जांच चल रही है वह केवल जनता को भ्रमित करने वाली है। इन्द्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी के परिवार को जानबूझकर मामले से अलग रखा जा रहा है और उन्हें शिकायतकर्ता नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि कल जब सभी अंकिता भंडारी हत्याकांड के लिए तैयारियों में जुटे हुए थे तो भाजपाई केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का स्वागत कर रहे थे। समर भंडारी ने कहा कि बिना सुप्रीम कोर्ट की निगरानी के सीबीआई जांच से न्याय संभव नहीं है। उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था को ध्वस्त बताते हुए कहा कि भाजपा का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है। उन्होंने कहा कि वीआईपी को जल्द ही पद से हटाकर उसकी जांच कराई जाए। महापंचायत में पांच प्रस्ताव पारित किए गए।
वहीं राज्यपाल के माध्यम राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किए जाने का भी निर्णय लिया। इस दौरान अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। महापंचायत में डॉ. एस एन सचान, एस एस पांगती, प्रदीप कुकरेती, सुरेंद्र कुमार, गरिमा मेहरा, दसौनी, संजय शर्मा, हेमा वोरा, सुरेंद्र सिंह सजवाण, अतुल शर्मा, अभिनव थापर, लोकेश नवानी, अनूप नौटियाल, भावना पांडे, शकुंतला राणा, निर्मला बिष्ट, स्वाति नेगी, महेश जोशी, गीता बिष्ट, जगमोहन मेंदीरत्ता, लेखराज, अनंत आकाश, अशोक शर्मा, गजेंद्र भंडारी, पदमा गुप्ता, मोहन सिंह खत्री, सुशील त्यागी, अवधेश शर्मा, मनीष नागपाल, ़ित्रलोचन भटट, सतीश धौलाखंडी, जगदीश कुकरेती, तन्मय ममगांई, चंद्रा आदि भी उपस्थित रहे।

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