अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच में

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पदमश्री की एफआईआर से ‘उबाल’
महापंचायत से सरकार को ललकारने की दहाड़
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल तीन गुनाहगारों को आजीवन कारावास की सजा हुई तो उसके बाद से मामला खामोश हो चुका था। अचानक भाजपा के पूर्व विधायक की कथित पत्नी ने सोशल मीडिया पर आकर जब अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम का खुलासा किया तो उससे उत्तराखण्ड से लेकर देशभर के अन्दर एक बडा राजनीतिक भूचाल आ गया था। अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम उजागर होते ही कांग्रेस से लेकर उक्रांद और कुछ संगठन सडकों पर उतर आये और उन्होंने धरने, प्रदर्शन व जगह-जगह मशाल जुलूस निकालकर कथित वीआईपी के खिलाफ सीबीआई जांच की दहाड लगाई और दो टूक संदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराई जाये। सरकार के मुखिया ने जनदबाव के चलते कथित वीआईपी की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी। हालांकि कभी भी अंकिता को न्याय दिलाने की लडाई न लडने वाले पदमश्री ने कथित वीआईपी की सीबीआई जांच कराने के लिए डीजीपी को पत्र दिया और उसके बाद बसंत विहार थाने में कथित वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे सीबीआई के पास भेजा गया जिसके बाद सीबीआई ने पदमश्री की एफआईआर पर अपने यहां मुकदमा दर्ज किया जिससे कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं में काफी नाराजगी है कि आखिर पदमश्री कौन होता है जिसने इस मामले में अपनी शिकायत दी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच में पदमश्री की एफआईआर से एक बडा उबाल दिखाई दे रहा है और यही कारण है कि अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने कल होने वाली महापंचायत को लेकर सरकार को ललकारने की दहाड लगा दी है।
अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय दिलाने के लिए जहां कांग्रेस, उक्रांद आगे आ रखी है वहीं अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सरकार द्वारा सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में न कराने का जो फैसला लिया था उसको लेकर उनमें बडी नाराजगी है। मंच के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की जांच सीबीआई से नहीं कराई जाती तब तक वह शुरू हुई इस जांच को मानने के लिए तैयार नहीं है। कांग्रेस और उक्रांद भी दो टूक अल्टीमेटम दे चुकी है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित वीआईपी की जांच जब तक सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से नहीं कराई जाती तब तक सीबीआई जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है और कांग्र्रेेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो यहां तक आरोप लगाया था कि वीआईपी को बचाने के लिए सीबीआई जांच हो रही है।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने कल राजधानी में महापंचायत का आयोजन किया है और उसका दो टूक कहना है कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता तब तक उनका यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। मंच के पदाधिकारियों में पदमश्री अनिल जोशी की एफआईआर को लेकर भी एक बडा उबाल देखने को मिल रहा है और उनका दो टूक कहना है कि अनिल जोशी की एफआईआर को रद्द करके अंकिता के माता-पिता से इस मामले की एफआईआर करानी चाहिए जिससे कि वह अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाने के अपने सपनों को साकार होता देख सके। उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चल रही है कि आखिरकार पदमश्री अनिल जोशी जिन्हांेने आज तक न तो किसी आंदोलन में अपनी सहभागिता निभाई और न ही उन्होंने अंकिता के खिलाफ लडी जा रही लडाई में अपने आपको कभी आगे किया तो फिर क्या रहस्य है कि उन्होंने अंकिता भंडारी मामले मे कथित वीआईपी के खिलाफ जांच कराने को लेकर अपनी शिकायत डीजीपी को दी और उनकी एफआईआर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। अब सरकार के लिए पदमश्री द्वारा कराया गया मुकदमा एक चिंता की लकीर डाल चुका है और सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं कि क्या पदमश्री की एफआईआर को रद्द कर उसके स्थान पर अंकिता के माता-पिता से एफआईआर लेकर कथित वीआईपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जायेगा?

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