सरकार से सीधा टकरा रहा उक्रांद!

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ताकतवर बनने को उक्रांद का दिखता ‘जोश’
पहाड़ों में अपना रूतबा बढ़ा रही यूकेडी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद क्षेत्रीय दल की कमी महसूस हुई तो आवाम ने उक्रांद पर विश्वास किया और उसे भाजपा व कांग्रेस का विकल्प मानते हुए उस पर भरोसा करना शुरू किया था। उक्रांद पर आम जनमानस उस तरह से विश्वास नहीं कर पाया था जैसा उक्रांद ने उम्मीद पाली थी। उक्रांद के कुछ नेताओं ने जिस तरह से कुर्सी के लालच में अपने आपको भाजपा व कांग्रेस के सामने परोसा था उसके चलते आम जनमानस में ऐसे राजनेताओं के खिलाफ एक बडी नाराजगी पनपने लगी थी और धीरे-धीरे राज्य के अन्दर उक्रांद का अस्तित्व खत्म होता चला गया? उक्रांद में जबसे युवा पीढी ने अपनी दस्तक दी है तबसे वह सरकार के खिलाफ हर मोर्चे पर आक्रामक होकर उससे दो-दो हाथ करने के लिए आगे बढा हुआ है। उक्रांद ने अंकिता भंडारी से लेकर चंद बडे मामलों में जिस तरह से सरकार को ललकारने के लिए अपने आपको आगे किया उससे पहाड के अन्दर उसका राजनीतिक रूतबा तेजी के साथ बढता जा रहा है। उक्रांद ने अब सरकार को ललकारने के लिए दो टूक संदेश देना शुरू किया है उससे साफ नजर आ रहा है कि वह 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस का विकल्प बनने के लिए अपने आपको पहाडों में तो मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गई है।
उत्तराखण्ड के अन्दर सत्ता पर कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस विराजमान होती चली गई और इन दोनो सरकारों के कार्यकाल में खनन माफियाओं से लेकर भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों के काले कारनामों ने आम जनमानस को झंझोर कर रखा हुआ है? आम जनमानस के मन में हमेशा एक टीस दिखाई देती रही है कि कोई तो ऐसा दल मजबूत होकर आगे आये जो भाजपा व कांग्रेस का विकल्प बनकर आवाम की उम्मीदों पर खरा उतर सके। एक समय में भाजपा व कांग्रेस का विकल्प बनने के लिए तेजी के साथ आम आदमी पार्टी आगे आती हुई जरूर दिखाई दी थी लेकिन जिस तरह से उसके कुछ नेताओं के मन में अपने आपको उत्तराखण्ड का दिग्गज बनने की ख्वाईश जागी तो आम आदमी पार्टी का अस्तित्व ही खत्म होता चला गया और आज के इस दौर में राज्य के किसी भी जनपद में आम आदमी पार्टी का कोई अस्तित्व तिनकाभर भी आम जनमानस को दिखाई नहीं दे रहा है जिससे अब राज्य के अन्दर तीसरे विकल्प के रूप में उक्रांद अपने आपको तेजी के साथ आगे ले जाने की दिशा में बढता जा रहा है जिससे कहीं न कहीं भाजपा व कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें पडने लगी हैं।
उत्तराखण्ड में दूसरी बार भाजपा की सरकार है और अब राज्य के अन्दर कुछ मामलों को लेकर सरकार को विपक्ष और उक्रांद जिस आक्रमकता के साथ घेरता जा रहा है उससे आम जनमानस के मन में उक्रांद को लेकर एक नई उम्मीद जगने लगी है। पौडी में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद उक्रांद ने सरकार को कटघरे मे खडा करते हुए हत्याकांड में शामिल आरोपियों को बडी सजा दिलाने के लिए एक मुहिम छेडी और उन्होंने कथित वीआईपी को लेकर जो एक नई अलख पहाडों में जगाई उससे पहाडों के अन्दर उक्रांद का अस्तित्व बुलंदियों पर दिखाई दे रहा है। उक्रांद अब सीधे सरकार से टकराता हुआ नजर आ रहा है और उसकी युवा टीम ने राज्य के अन्दर फैले भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर जो अपनी आवाज बुलंद कर रखी है उससे कहीं न कहीं सरकार को अब उक्रांद से भी राजनीतिक टकराव होने का डर सताने लगा है? पहाडों के अन्दर चप्पे-चप्पे पर उक्रांद अपना राजनीतिक इकबाल बुलंद करने की दिशा मंे आगे बढा हुआ है और 2027 में उक्रांद कोई बडा करिश्मा पहाड़ों में कर दिखायेगा ऐसी चर्चाएं अब राज्य के अन्दर तेजी के साथ प्रबल होने लगी हैं।

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