नेताओं-अफसरों को छाने का लगा चस्का?

0
75

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर जहां मुख्यमंत्री राज्य को विकास के पथ पर तेजी के साथ आगे ले जाने के लिए आगे बढ रहे हैं वहीं राज्य के काफी अफसर व कुछ नेताओं को सोशल मीडिया पर छाने का चस्का लगा हुआ है जिससे सवाल उठ रहे हैं कि जिन्हें राज्य को विकास की बडी लकीर खींचनी चाहिए वह समय-समय पर सोशल मीडिया पर अपना गुणगान करते हुए दिखाई दे रहे हैं जिससे सवाल खडा हो रहा है कि क्या राजनेताओं और अफसरों को लगा फेसबुकिया चस्का कभी खत्म होगा?
उत्तराखण्ड में पिछले काफी समय से राज्य के चंद अफसर अपने औहदे के डेकोरम को तार-तार करते हुए नजर आ रहे हैं जिससे आवाम के मन में यह सवाल तैर रहे हैं कि जहां राज्य के मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए अफसरशाही को विकास पथ पर आगे ले जाने का पाठ पढा रहे हैं तो वहीं कुछ फेसबुकिया अफसर फिल्मी पर्दे पर छाये ‘पुष्पा’ की टू कापी करते हुए नजर आ रहे हैं ऐसे अफसरों का फेसबुकिया प्रेम इस ओर इशारा कर रहा है कि वह सरकार के विकास को चमकाने का जज्बा पाले हुये हैं या वह अपने आपको सोशल मीडिया पर हीरो बनने का खेल खेल रहे हैं? सोशल मीडिया पर एक अफसर की कुछ फोटो खूब तेजी के साथ वायरल हो रही हैं और उनका अंदाज बिल्कुल फिल्मी ‘पुष्पा’ जैसा ही देखने को मिला जिसको लेकर राज्य के गलियारों में यह बहस छिड गई कि क्या राज्य के कुछ अफसरों को फेसबुकिया ‘पुष्पा’ बनने का चस्का लग गया है?
उत्तराखण्ड का कोई राजनेता फेसबुक पर अपना गुणगान करने के लिए आगे आये तो यह बात समझ में आती है कि आवाम के बीच अपने आपको प्रसिद्धि पाने का सबसे बडा प्लेटफार्म फेसबुक और सोशल मीडिया रहता है और उससे पता चलता है कि आवाम के बीच उनकी प्रसिद्धि किस कदर बढ रही है। उत्तराखण्ड में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सोशल मीडिया पर काफी फॉलोअर्स हैं उससे साफ दिखाई दे रहा है कि राज्य के अन्दर आवाम उन्हें किस कदर पसंद कर रहा है। वहीं राज्य के काफी अफसरों को फेसबुकिया चस्का लगा हुआ है साथ में सोशल मीडिया पर भी वह अकसर छाने के लिए अपने आपको ऐसे पेस कर रहे हैं मानो वह राज्य के अफसर नहीं बल्कि फिल्मी अफसर हों? उत्तराखण्ड में आवाम को विकास चाहिए तो साथ मंे उन्हें राज्य में फैले भ्रष्टाचार, घोटाले और माफियागिरी से आजादी चाहिए? हालांकि जिन कुछ अफसरांे पर राज्य को विकास की राह में आगे ले जाने और आवाम को अपराधियों से निजात दिलाने का जिम्मा है उनमें से काफी अफसरों को पिछले लम्बे समय से सोशल मीडिया पर आये दिन छाने का जो चस्का लग गया है उस पर भले ही कोई उंगली न उठा रहा हो लेकिन चाय की दुकान से लेकर बडे-बडे व्यापारिक संस्थानों में जिस तरह से राज्य के कुछ फेसबुकिया अफसरों को लेकर मजाकिया अंदाज मंे उन पर कटाक्ष किये जा रहे हैं उस पर सरकार को भी जरूर मंथन और चिंतन करना चाहिए क्योंकि विकास की राह फेसबुक पर छाने से नहीं बल्कि धरातल पर विकास दिखने से ही नजर आयेगी? उत्तराखण्ड के अन्दर एक अफसर की कुछ फोटो सोशल मीडिया पर बीते रोज इतनी तेजी के साथ वायरल हुई कि वह फोटो अधिकांश लोगों के मोबाइलों पर देखने को मिली और जिस अंदाज में अफसर नजर आये उसे देखकर यह चटकारे लिये जा रहे थे कि साहब का लुक तो बिलकुल ‘पुष्पा’ जैसा नजर आ रहा है? सवाल यह है कि अगर अफसरों को भी अपने डेकोरम का ध्यान नहीं रहेगा तो वह अपने छोटे अफसरों को क्या शिक्षा देंगे इसका अंदाजा अपने आप लगाया जा सकता है? चंद अफसर ऐसे देखने को मिल रहे हैं जो कहीं पर भी जाते हैं तो उनके साथ वो कौन फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर होते हैं जो अपने साहब की हर एक्शन की तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं जिससे जब इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया जाये तो उसे देखकर आवाम यह कहने लगे कि साहब का तो जलवा है? अब सवाल यह है कि जिस राज्य को प्रदेश के मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार, घोटाले, भू-माफियाओं, खनन माफियाओं, बडे अपराधियों से आजाद करने का संकल्प लिये हुये हैं वहीं कुछ अफसर सिर्फ सोशल मीडिया पर ही अपने आपको ‘पुष्पा’ बनकर अपनी प्रसिद्धि का जो खेल खेल रहे हैं वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में सही नहीं माना जा रहा?

LEAVE A REPLY