अब दिल्ली में भी सुनाई दे रही अंकिता भंडारी हत्याकांड की ‘गूंज’

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सीबीआई जांचः सरकार की मंशा पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जानबूझकर जांच को किया जा रहा कमजोरः गणेश गोदियाल
संवाददाता
देहरादूनध्नई दिल्ली। उत्तराखण्ड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्या कांड अब सिर्फ राज्य तक ही सीमित नहीं रह गया है अपितु कांग्रेस ने इसे अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ऐलान के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जॉच शुरू नहीं होने पर कांग्रेस ने एक बार फिर दिल्ली में हमला बोला। इस प्रकरण में सीबीआई जांच का लेकर कांग्रेस का धामी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए यह आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर जांच को कमजोर करने का काम कर रहे है।
दिल्ली में आयेजित एक प्रेस वार्ता में कांग्रेस के उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि केंद्रीय जॉच एजेंसी सीबीआई ने धामी सरकार की ओर से मिलने की पुष्टि भी नहीं की है।
कांग्रेस ने सीबीआई को जांच से जुड़े प्रतिवेदन भेजने पर भी आशंका जताई। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार ने कोई प्रतिवेदन सीबीआई को भेजा है तो उसे सार्वजनिक करें। उस प्रतिवेदन इन जॉच से जुड़ी सेवाध्शर्तों का उल्लेख किया जाय। गोदियाल ने गृह मंत्री अमित शाह के हालिया उत्तराखण्ड दौरे पर सीबीआई जांच के सम्बंध इन कोई वक्तव्य नहीं आने पर भी हैरानी जताई। कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को भटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा के 15-17 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने वास्तव में सीबीआई को जांच सौंपने का औपचारिक प्रतिवेदन भेजा भी है या नहीं। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की थी कि अंकिता भंडारी के माता-पिता की राय लेकर इस मामले में दोबारा जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान अंकिता के माता-पिता ने लिखित रूप में दोषियों को फांसी दिए जाने, मामले में शामिल वीआईपी का नाम उजागर किए जाने और सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने यह ऐलान किया कि मामले की सीबीआई जांच कराई जाएगी।
गोदियाल ने कहा कि यह स्वाभाविक था कि मामले में पीड़ित पक्ष, यानी अंकिता के माता-पिता के प्रार्थना पत्र को आधार बनाकर सीबीआई जांच की संस्तुति की जाती। लेकिन सरकार ने पीड़ित परिवार की बजाय एक तीसरे पक्ष द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच कराने की बात की, जिससे संदेह पैदा होता है कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा सीबीआई को भेजा गया प्रतिवेदन अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भी जानकारी मिल रही है कि सरकार नई एफआईआर के आधार पर इस मामले में वीआईपी के शामिल होने को एक काल्पनिक स्थिति बनाते हुए उसकी जांच करवाना चाहती है। जबकि यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि यथार्थ है कि एक वीआईपी को सर्विस देने से मना करने पर एक लड़की की जान ली गई है। जब कांग्रेस ने यह बात कही कि जांच इस यथार्थ की ही होनी चाहिए, तो सरकार ने कदम पीछे खींच लिए और अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी है या नहीं। सीबीआई की तरफ से भी इसे लेकर कोई बयान नहीं आया है। भाजपा सरकार पर प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इस मामले में आरोपियों द्वारा स्वयं नार्को टेस्ट की मांग किए जाने के बावजूद सरकारी पक्ष ने अदालत में इसका विरोध किया, जो आपराधिक मामलों में दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस रुख से ऐसा लगता है कि उसे डर था कि नार्को टेस्ट से सत्ताधारी दल के नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं।
गोदियाल ने जांच के बिंदुओं को सार्वजनिक किए जाने की भी मांग की। साथ ही उन्होंने मांग की कि इस मामले में एसआईटी की पूर्व प्रमुख, जो अब सीबीआई में वरिष्ठ पद पर हैं, को इस जांच प्रक्रिया से दूर रखा जाए। इसके अलावा गोदियाल ने उधम सिंह नगर में एक किसान की आत्महत्या का मामला उठाते हुए बताया कि मृतक ने पुलिस अधिकारियों के नाम लेकर उन्हें अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। इसके बावजूद संबंधित एसएसपी को मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने मांग की कि उस अधिकारी को तत्काल बर्खास्त कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

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