अभी भी नेताओं को मंत्रिमण्डल का इंतजार!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में चार साल से सरकार चला रहे मुख्यमंत्री से हमेशा पार्टी विधायकों में एक उम्मीद लगी हुई है कि उन्हें भी मंत्रिमण्डल में जगह मिल जाये। हालांकि चार साल में बार-बार विधायकों के मन में मंत्री बनने की चाहत जगने लगती है लेकिन बाद में उनके सपनों पर जिस तरह से ग्रहण लगता है वह किसी से छिपा नहीं है। भाजपा के कुछ दिग्गज नेता भी यह शिगुफा छोड देते हैं कि राज्य के अन्दर मंत्रिमण्डल का विस्तार जल्द होगा लेकिन यह विस्तार कब होगा इस पर हमेशा एक रहस्य ही बना रहता है? पिछले कुछ महीनों से एक बार फिर मुख्यमंत्री दरबार में एक के बाद एक विधायकों का मुख्यमंत्री से मिलना और उसके बाद यह कयासबाजी होना कि कभी भी राज्य के अन्दर मंत्रिमण्डल का विस्तार हो सकता है यह एक शिगुफा सा ही अब नजर आने लगा है? सवाल यही पनप रहे हैं कि जब विधानसभा चुनाव में मात्र एक साल का ही समय रह गया है तो फिर ऐसे में भाजपा हाईकमान राज्य के अन्दर कुछ विधायकों को मत्री बनाकर पार्टी के अन्दर एक नई बगावत का आगाज करने के लिए सम्भवतः तैयार नहीं होगी? अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं कि क्या राज्य के अन्दर मंत्रिमण्डल का विस्तार होगा या फिर उनके सपने मुंगेरीलाल के हसीन सपने की तरह बनकर रह जायेंगे?
उत्तराखण्ड में पुष्कर सरकार में कुछ मंत्रियों का पद रिक्त चला आ रहा है और जबसे कैबिनेट मंत्री रहे स्वर्गीय चंदन रामदास का निधन हुआ है तबसे लगातार यही कयासबाजी चल रही है कि जल्द से जल्द पुष्कर सरकार का मंत्रिमण्डल पूरा करने के लिए भाजपा हाईकमान अपनी हरी झंडी देगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा प्रदेश प्रभारी से लेकर भाजपा हाईकमान के बीच नये मंत्रिमण्डल को लेकर मंथन व चिंतन हो चुका है और उसके बाद से यह सम्भावना जताई जा रही है कि कुमांऊ से दो और गढवाल से दो विधायकों को मंत्रिपद सौंपा जायेगा इसके साथ यह भी कयासबाजी चल रही है कि जातीय संतुलन का भी ध्यान रखा जायेगा। पिछले काफी समय से पुष्कर सरकार के नये मंत्रिमण्डल को लेकर भाजपा के अन्दर एक बडी हलचल देखने को मिल रही है और यह भी बहस चल रही है कि आखिरकार कहीं ऐसा तो नहीं कि मौजूदा मंत्रिमण्डल में से कुछ मंत्रियों को विदाई दे दी जाये और उनके स्थान पर विधायकों को मंत्री पद से नवाजा जाये। पुष्कर सरकार के नये मंत्रिमण्डल को लेकर भले ही किसी के नाम का खुलासा न हो रहा हो कि उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन सोशल मीडिया पर इशारों इशारों में यह दम भरा जा रहा है कि एक दो मंत्रियों की पुष्कर सरकार से छुट्टी हो सकती है और उनके स्थान पर अन्य विधायकों को मंत्री का पद दिया जा सकता है। हालांकि अभी नये मंत्रिमण्डल का इंतजार आवाम को करना ही पडेगा क्योंकि सावन के महीने में भाजपा हाईकमान नये मंत्रिमण्डल के गठन को मंजूरी देगा या नहीं यह तो भविष्य के गर्त में कैद है लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संभावना है कि बैसाखी के बाद पुष्कर सरकार के नये मंत्रिमण्डल को भाजपा हाईकमान हरी झण्डी दे सकता है। अभी सबकी नजरें पुष्कर सरकार के नये मंत्रिमण्डल पर है और कितने दिन विधायकों को मंत्री पद पाने के लिए इंतजार करना पडेगा यह भाजपा हाईकमान ही तय करेगा।
उत्तराखण्ड में कयासबाजी का दौर हमेशा चलता रहा है और यह संभावना प्रबल होती रही है कि कभी भी उत्तराखण्ड के अन्दर नये मंत्रिमण्डल का गठन हो सकता है लेकिन ऐसी सम्भावनायें सिर्फ हवाबाजी में ही सिमट कर रह जाती है जिससे उन विधायकों का सपना हमेशा सपना ही बनकर रह जाता है जो राज्य के अन्दर मंत्री बनने की चाहत पालने के लिए अकसर उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक की दौड लगाते रहे हैं।

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