बलूनी-त्रिवेंद्र-धनसिंह-ऋतु आये साथ-साथ
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत के रंग हमेशा निराले दिखते आये हैं और इन रंगों में कौन रंग जाये इसका किसी को कोई पता नहीं चल पाता? सियासत में न कोई किसी का दोस्त होता है और न ही कोई दुश्मन? कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जिस तरह से सियासत के नये-नये रूप देखने को मिले थे वो किसी से छुपे नहीं और भ्रम में रहने वाले कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपनी सत्ता जाने के बाद इस बात का एहसास हुआ था कि वह जिस पर अभेद भरोसा कर रहे थे उन्होंने ही उन्हे ंउस भवर मे लाकर डूबो दिया था जो उन्हें हर संकट से बचाये रखने का खुला दावा किया करते थे? उत्तराखण्ड में इन दिनों राजनीति के अन्दर जो एक नई हलचल पैदा हो रखी है और सोशल मीडिया पर उसको लेकर अकसर भूचाल मचा रहता है उससे कहीं न कहीं पॉवर मे रहने वाले कुछ राजनेताओं का बीपी बढा रहता है और जो अफसर अहंकार के समुद्र मे गोते लगाते हैं उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं रहता कि जिस अहंकार में वह आवाम को अपने हाथों की कठपुतली समझ रहे हैं उनकी पॉवर जाते ही वह उस दोराहे पर आकर खडे हो जायेंगे जहां उनका कोई अस्तित्व ही नहीं होगा? अब पिछले काफी समय से राज्य के दो सांसद और दो दिग्गज राजनेता एक साथ दिखाई दे रहे हैं जिसको लेकर राज्य के गलियारों में यह गीत भी गुनगुनाया जा रहा है कि बंधन है ये यारी का…।
इन दिनों उत्तराखण्ड भाजपा में यारी दोस्ती का मौसम चल रहा है। कभी एक दूसरे के विरोधी समझे जाने वाले एक मंच पर नजर आ रहे हैं। मेल मुलाकातों का दौर जारी है। हाल ही में दिल्ली में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद अनिल बलूनी और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत एक मंच पर नजर आए। इसके अलावा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी व अनिल बलूनी की वार्ता करते फोटो वॉयरल हुई। सूत्रों का कहना है कि भाजपा में सत्ता की लड़ाई ने निर्णायक मोड़ ले लिया है? चर्चाएं तो यहां तक हैं कि इन मुलाकातों को सीएम की कुर्सी से जोड़कर देखा जा रहा है? कई विधायक व सांसद भी दिल्ली हाईकमान से मुलाकात कर रहे है। सूत्रों का कहना है कि अंकिता हत्याकांड के ‘वीआईपी’ को लेकर राज्य की राजनीति में संग्राम छिड़ा हुआ है। ऐसे में भाजपा के महारथी एक दूसरे से मिलकर संगठन व कैबिनेट में अपने लोगों की ताजपोशी में जुट गया है। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री व हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत हमेशा कई मुद्दों पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खडा करने से पीछे नहीं हट रहे। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जब संसद के अन्दर उत्तराखण्ड में अवैध खनन के मुद्दे को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी तो उससे उत्तराखण्ड सरकार से लेकर काफी अफसर सहम गये थे और उसके बाद त्रिवेंद्र रावत के बयान पर पलटवार करने का दौर भी शुरू हुआ था लेकिन त्रिवेंद्र रावत अपनी बात पर अडिग रहे। वहीं अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बाद उन्होंने जिस तरह से बेबाक होकर मामले की जांच सीबीआई से कराने की बात कही थी उससे भी सरकार कहीं न कहीं असहज नजर आई थी? इन दिनों पौडी से सांसद अनिल बलूनी, हरिद्वार से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्य के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी एक साथ दिखाई दे रहे हैं और उनका एक साथ आना और उनकी सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने से राजनीतिक हल्कों में एक नई हलचल मची हुई है? जहां कुछ दिन पूर्व अनिल बलूनी, त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत एक ही मंच पर नजर आये तो वहीं चंद दिन पूर्व पौडी से सांसद अनिल बलूनी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूरी के बीच मंथन की फोटो वायरल होने से उत्तराखण्ड की राजनीति में एक बडी तपिश महसूस की जा रही है? यहां यह भी बता दें कि भाजपा के विधायक अरविंद पांडे और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी कई मुद्दों पर खुलकर बोलते हुए भाजपा को परेशानी में डाल चुके हैं।
