आंदोलनकारियों का दो टूक अल्टीमेटम

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मछली की आंख तो वीआईपी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत में एक बार फिर भूचाल मचा रहा अंकिता भंडारी हत्याकांड सरकार के लिए उस समय भी सरदर्द बना हुआ है जब मुख्यमंत्री ने इस हत्याकांड प्रकरण में वीआईपी की जांच के लिए सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति कर दी है। मुख्यमंत्री ने जिस दिन से अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई से जांच के आदेश दिये हैं तबसे राजधानी की सडकों पर इस मामले को लेकर जहां मुख्यमंत्री को बधाई देने के फलैक्स लगे हुये हैं वहीं कुछ विधायक भी मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने को लेकर अपनी शुभकामनायें देने के लिए उनके पास पहुंचे तो वहीं अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लडाई लड रहे कुछ आंदोलनकारियों का दो टूक अल्टीमेटम है कि उनके लिए मछली की आंख तो वो वीआईपी है जिसका चेहरा उजागर करने के लिए अंकिता के माता-पिता भी सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर जो ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल की थी उसने तो उत्तराखण्ड से लेकर देशभर की सियासत में एक बडा भूचाल मचाकर रखा हुआ है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सरकार की ओर से बार-बार दावा किया गया कि इस मामले में कोई वीआईपी नहीं है लेकिन उनके इस दावे को अंकिता के माता-पिता से लेकर कांग्रेस, उक्रांद, महिला मंच, भाकपा और कुछ संगठन के लोग एक होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं कि हत्याकांड की वजह तो वो वीआईपी है जिसका चेहरा अभी तक बेनकाब नहीं हो पाया है। वीआईपी कौन था और कौन नहीं यह तो अभी हवा मे ही लटका हुआ है लेकिन सुरेश राठौर की ऑडियो क्लिप में एक कथित वीआईपी के नाम का शोर मचने के बाद से ही उत्तराखण्ड की सियासत में एक बडी तपिश आ रखी है। कांग्रेस और उक्रांद तो सरकार पर लगातार हमलावर नजर आ रहे हैं और उनका एक ही कहना है कि हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में सीबीआई से करानी चाहिए।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को आवाम के बीच बेनकाब करने के लिए पहाड से लेकर मैदान तक की जनता एक बडा आंदोलन चलाये हुये है और उसका दो टूक कहना है कि इस मामले की जांच सीबीआई से तभी स्वीकार्य होगी जब वह जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में कराई जायेगी। जन दबाव के चलते आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर उसकी जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की है। हालांकि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग पर अडे सभी दल यह सवाल दाग रहे हैं कि सरकार के मुखिया ने जो सीबीआई को अपनी संस्तुति भेजी है उसका पत्र वह आम जनमानस के बीच वायरल कर दें जिससे कि यह पता चल सके कि उन्होंने आखिर सीबीआई को कौन सी जांच कराने के लिए अपनी संस्तुति की है। मुख्यमंत्री ने जिस दिन से अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को लेकर सीबीआई जांच कराने की संस्तुति की है तबसे अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आगे आये सभी आंदोलनकारी दो टूक कह रहे हैं कि उनका एकमात्र मिशन वो वीआईपी है जिस पर आज तक सरकार ने मौन धारण किया हुआ था?

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