दौलत कमाने के हुनर में अव्वल बन गये ‘हुजूर’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जबसे जन्म हुआ है तबसे देखने में आ रहा है कि कुछ राजनेताओं, अफसरों और कलमवीरों के बीच ऐसा सिंडिकेट बना था कि वह दौलत कमाने के एजेंडे पर तेजी के साथ आगे बढते चले गये और यह सिंडिकेट आज की तारीख में भी काफी पॉवरफुल दिखाई दे रहा है? हैरानी वाली बात है कि यह सिंडिकेट दौलत कमाने के उस सफर पर तेजी के साथ आगे बढा हुआ है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। आपस में एक दूसरे का साथ लेकर अपने दौलत कमाने के सफर पर आगे बढने की सोच को अमलीजामा पहनाने के लिए इस सिंडिकेट के कारनामे अकसर चर्चाओं में रहते हैं लेकिन उनका सिस्टम के अन्दर भौकाल इतना बडा है कि उनकी ओर कोई देखना भी नहीं चाह रहा। सिंडिकेट में कलमवीरों का रोल अपने चेहते राजनेताओं और अफसरों को सुरक्षा प्रदान करना है और यह सुरक्षा वह अपनी लेखनी से उन्हें देते हुए दिखाई दे रहे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर मौजूदा दौर में अगर कुछ राजनेता, अफसर और कलमवीरों का आपसी गठजोड़ हो रखा है तो वह आम जनमानस के लिए बहुत घातक है जो उत्तराखण्ड को गुलजार देखने की तमन्ना एक लम्बे दशक से अपने दिल में पाले हुये है।
उत्तराखण्ड में कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल से ही कुछ राजनेताओं, अफसरों और कलमवीरों ने सोच समझकर एक सिंडिकेट तैयार किया और इस सिंडिकेट ने दौलत कमाने के जिस सफर पर अपने आपको आगे रखा वह किसी से छिपा हुआ नहीं है? भले ही इस सिंडिकेट पर कोई अपना निशाना न लगा रहा हो लेकिन सत्य यही है कि आज के दौर में तिकडी का सिंडिकेट आम जनमानस के लिए बडा घातक हो चला है। कुछ राजनेताओं और अफसरों को इस बात का इल्म है कि वह तब तक सेफ जोन मे हैं जब तक कुछ कलमवीर उनके साथ कंधा से कंधा मिलाकर खडे हुये हैं। एक लम्बे अर्से से देखने में आ रहा है कि कुछ राजनेताओं और अफसरों के काले कारनामों को आवाम के बीच बेनकाब करने के लिए जब कुछ कलमवीर आगे बढते हैं तो उसके बाद सिंडिकेट में जुडे हुये कुछ कलमवीर अपने आकाओं के बचाव में उतर आते हैं और अपने आकाओं के हाथों की कठपुतली बनकर वह जिस तरह से नृत्य करते हुए दिखाई देते हैं उससे आम जनमानस के मन में एक बडी पीडा है कि अगर राज्य के अन्दर कुछ अफसरों, राजनेताओं और कलमवीरों ने दौलत कमाने के लिए सिंडिकेट बना रखा है तो वह राज्यहित में सही नहीं माना जा सकता।
उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ चर्चित चेहरे ऐसे हैं जो दौलत कमाने के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार हैं और इसमें सबसे ज्यादा घातक बात यह है कि कुछ नेताओं, अफसरों और कलमवीरों ने एक दूसरे को आपसी सरक्षण देने के लिए जो ंिसडिकेट बनाया है उस पर आखिर सरकार की नजर कब जायेगी यह तो भविष्य के गर्त में कैद है लेकिन जिस तरह से यह सिंडिकेट लम्बे समय से पनप रहा है वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए घातक ही माना जा रहा है और देखने वाली बात होगी कि क्या इस सिंडिकेट का पर कुतरने के लिए कभी कोई आगे आयेगा?
