उत्तराखण्ड की जनता को मित्र पुलिस से नफरत!

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एक ही शोरः सीबीआई जांच… सीबीआई जांच…
भाजपा विधायक बोलेः सीबीआई से करायें किसान की मौत की जांच
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही कुछ पुलिस अफसरों ने राज्य की पुलिस को मित्र पुलिस का तमका दिया और ऐलान किया था कि पुलिस आम जनमानस के लिए मित्र रहेगी और अपराधियों कोे वह हमेशा अपना इकबाल दिखायेगी। हैरानी वाली बात है कि राज्य में मित्र पुलिस का स्वरूप जिस तरह से बदलता चला गया और पुलिस के कुछ अफसर तथा दरोगा चंद राजनेताओं के इशारे पर कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार दिखते चले गये उसने मित्र पुलिस की छवि को आवाम के बीच दागदार करने में कोई कसर नहीं छोड रखी है? उत्तराखण्ड में आज राज्य की जनता को शायद पुलिस से नफरत हो चली है जिसके चलते वह हर बडे मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए अपनी दहाड लगा रहे हैं। उधमसिंहनगर के किसान द्वारा आत्महत्या किये जाने के बाद राज्य के अन्दर मित्र पुलिस पर सवालिया निशान लगने लगे और तो और अब भाजपा विधायक ने भी किसान की आत्महत्या प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की दहाड लगाकर कहीं न कहीं यह संदेश भी दे दिया कि उन्हें भी पुलिस के कुछ अफसरों और दरोगाओं पर विश्वास नहीं है कि वह किसान की मौत की जांच को सही दिशा में ले जायंेगे?
उत्तराखण्ड के अन्दर आज हर बडे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग उठने लगी है उसने कई सवालों को जन्म दे दिया है कि क्या आवाम का आज राज्य की पुलिस से विश्वास उठ चला है जिसके चलते वह बडे-बडे मामलों की जांच सीबीआई से कराने की हुंकार लगाने लगी है? उत्तराखण्ड में पुलिस से आवाम का विश्वास क्यों टूटता जा रहा है इसके लिए सरकार से लेकर पुलिस मुखिया को भी एक बडा मंथन करना चाहिए जिससे कि यह बात साफ हो सके कि आखिरकार क्या कारण है कि जिस पुलिस को वह आवाम के लिए मित्र बनाने की दिशा में आगे बढ रहे थे वह आवाम की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रही है? उत्तराखण्ड के अन्दर जब अंकिता भंडारी हत्याकांड हुआ तो उसकी जांच सीबीआई से कराये जाने की मांग खूब उठी थी लेकिन सरकार ने हत्याकांड की जांच एसआईटी से करवाई और उसके बाद तीन गुनाहगारों को उम्रकैद की सजा हुआ। हालांकि आम जनमानस इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर अपनी आवाज बुलंद करता रहा है। अचानक कुछ समय पूर्व जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर आकर इस मामले में कथित वीआईपी के नाम को लेकर जो खुलासा किया था उसने सियासत में एक बडा भूचाल मचा दिया। काफी बवाल मचने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की। वहीं कुछ समय पूर्व जब हरिद्वार के लक्सर में पुलिस अभिरक्षा में हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी को बदमाशों ने गोलियां मारकर मौत के घात उतार दिया था तो उसके बाद उसके परिजनों ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की हुंकार लगा दी थी।
वहीं काशीपुर के एक किसान सुखवंत सिंह ने उघमसिंहनगर पुलिस को लेकर सोशल मीडिया पर मरने से पूर्व एक वीडियो वायरल की थी और यह भी उसने साफ कहा था कि उसके मरने के बाद सीबीआई मामले की जांच करे और सभी दोषियों के खिलाफ वह कार्यवाही करे। अब किसान की आत्महत्या प्रकरण में कांग्रेस और कुछ संगठन काफी नाराज दिखाई दे रहे हैं और वह भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा है कि मृतक के वीडियो के माध्यम से सही गलत नहीं कहा जा सकता। इसलिए वह सरकार से उक्त प्रकरण के लिए सीबीआई जांच की मांग करते हैं ताकि सही-गलत का पता लग सके और कोई भी दोषी बच न पाये।

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