खटीमा चुनाव में भी धामी के खिलाफ हुआ था षडयंत्र
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत का तापमान कब चरम पर पहुंच जाये यह राज्य की जनता पच्चीस साल से देखती आ रही है। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों का तख्ता पलट करने के लिए उनके अपनों ने ही हमेशा एक बडा तानाबाना बुनकर राज्य की सियासत में भूचाल मचाया था यह किसी से छिपा नहीं है। हैरानी वाली बात है कि भले ही भाजपा व कांग्रेस के शासनकाल में उनके मुख्यमंत्री धाकड़ अंदाज में सरकार चलाते रहे हों लेकिन उनके अपनों ने ही उन्हें सबसे बडी कुर्सी से बेदखल करने के लिए जिस बगावत का झंडा उठाया था उसका हश्र सबके सामने रहा है और यही कारण है कि राज्य के अन्दर हमेशा यह बहस चलती रही है कि सरकार के मुखिया के खिलाफ उनके ही अपने क्यों उन्हें सत्ता से बेदखल करने के लिए कोई न कोई बडा चक्रव्यूह रचने के लिए आगे बढ़ निकलते हैं। उत्तराखण्ड में अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री ने दबंगता के साथ जांच कराकर दोषियों को आजीवन की कारावास कराई लेकिन अचानक एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर समूचे उत्तराखण्ड में विरोध की चिंगारी सुलग गई। अब यह आशंका भी उठ रही है कि कहीं खटीमा में धामी को हरवाने के लिए जिस तरह से षडयंत्र हुआ था उस तरह का षडयंत्र कहीं अंकिता हत्याकांड की चिंगारी सुलगाकर उनका तख्ता पलट करने की कोई पटकथा तो नहीं लिखी जा रही?
उत्तराखण्ड में कांग्रेस और भाजपा जब भी सरकार बनाने के लिए आगे आई तो पार्टी के अन्दर ही उनके कुछ नेता अपने मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत की राह पर आगे बढते चले गये और इसका हश्र राज्य की जनता से लेकर देशभर के लोग देखते रह गये थे। उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में पार्टी के ही कुछ नेता अपनी ही सरकार के मुखिया के खिलाफ साजिश का चक्रव्यूह रचने के लिए आगे बढ़ जाते हैं यह भी किसी से छिपा नहीं है और जिस तरह से दोनो सरकारों में सत्ता संभालने वाले कुछ मुख्यमंत्रियों ने उनके अपनों ने ही बगावत करके कुर्सी छीनी उससे हमेशा यही बहस चलती रही कि आखिरकार वो क्या कारण हैं जिसके चलते पार्टी के कुछ नेता अपने ही मुखिया के खिलाफ बडे नाटकीय ढंग से बगावत का झंडा उठाकर आगे बढ़ चलते हैं?
उत्तराखण्ड की कमान जब युवा मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को मिली थी तो उन्होंने मात्र कुछ माह में धाकड़ राजनीति करते हुए आवाम के मन में अपनी एक बडी पैठ बना ली थी और उसी के चलते उन्होंने राज्य के अन्दर सभी मिथक तोड़ते हुए एक बार फिर राज्य के अन्दर कमल खिलाकर भाजपा हाईकमान के सामने अपनी राजनीति का आईना दिखा दिया था। पुष्कर सिंह धामी के बढते कदमों को रोकने के लिए पार्टी के ही कुछ नेताओं ने उस समय एक बडा खेल, खेल दिया था जब खटीमा में चुनाव लड रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उन्होंने षडयंत्र कर चुनाव हरवा दिया था। इस साजिश को हालांकि भाजपा हाईकमान ने परख लिया था और उसी के चलते उन्हें दुबारा मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा हाईकमान ने उन पर अपना भरोसा दिखाया था। उत्तराखण्ड के अन्दर एक नई सियासत का जन्म हो रखा है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को मानवता के साथ चलाने का जो संकल्प लिया हुआ है उसके चलते वह आये दिन कोई न कोई जनहित की योजना आवाम को भेट करते हुए नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के बढते कदमों से एक बार फिर साजिशों की एक बडी चौसर बिछा दी गई है और इसके लिए अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर सरकार की जिस तरह से घेराबंदी की जा रही है उससे आशंकाओं का दौर प्रबल हो रखा है कि कहीं इस पूरे प्रकरण में सीएम का तख्ता पलट करने की कोई बडी साजिश उनके उन अपनों ने ही तो नहीं कर दी जो उन्हें खटीमा में चुनाव हरवाने के लिए एक शातिराना खेल खेलने में सफल हो गये थे? उत्तराखण्ड में अंकिता भंडारी हत्याकांड के शोर से समूचा उत्तराखण्ड तो झुलस ही रहा है साथ में देश के अन्दर भी अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर बडा भूचाल मच रखा है जो कहीं न कहीं यह सवाल खडा कर रहा है कि आखिरकार वो कौन चेहरे हैं जो अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर राज्य के अन्दर अस्थिरता की चिंगारी सुलगा रहे हैं।
