वीआईपी पर दहाड़ता आवाम

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड़ में कुछ वर्ष पूर्व हुये अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को आजीवन कारावास होने के बाद किसी को इस बात का इल्म भी नहीं रहा होगा कि जिस कथित वीआईपी को लेकर वह अकसर अपनी आवाज बुलंद करते थे उस कथित वीआईपी के नाम का खुलासा सोशल मीडिया पर भाजपा के पूर्व विधायक की पत्नी ही कर देगी। वीआईपी के नाम का खुलासा पूर्व विधायक पत्नी ने जिस तरह से दहाड़ते हुये किया था उसने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में एक बडा भूचाल लाकर खडा कर दिया। भले ही सरकार और मामले की जांच में शामिल रहे एक अफसर ने कहा हो कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोई वीआईपी था ही नहीं यह बात आवाम को हजम नही हो रही और वह सड़कों पर आंदोलन करने के लिए आज जिस आक्रोश में आगे निकल पडा है उसने सरकार और भाजपा संगठन के माथे पर भी चिंता की लकीरें डाल दी हैं। अब सड़कों पर आवाम वीआईपी के नाम को लेकर दहाड़ने लगा है और उसका दो टूक अल्टीमेटम है कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल वीआईपी को जेल नहीं भिजवा देंगे तब तक वह शांत नहीं बैठेंगे।
आज सुबह से ही राजधानी का जिला प्रशासन अलर्ट मोड में था कि मुख्यमंत्री आवास घेराव की जो चेतावनी कुछ संगठनों ने दी हुई है उसको देखते हुए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का बडा पहरा लगाया जाये। परेड ग्राउंड के आसपास पुलिस बल को बडी संख्या में तैनात किया गया और उन्हें हर स्थिति पर नजर रखने का भी हुक्म मिला हुआ था। परेड ग्राउंड के बाहर रैली में शामिल होने वाले लोगों का तांता लगना शुरू हुआ और काफी लोगों के हाथों में अंकिता भंडारी के पोस्टर थे और उसमें साफ लिखा हुआ था कि अंकिता भंडारी को न्याय दिया जाये और इस हत्याकांड में जो भी वीआईपी दोषी है उसके खिलाफ कार्यवाही कर उसे जेल की सलाखों के पीछे डाला जाये। उत्तराखण्ड आंदोलन से जुडी निर्मला बिष्ट ने खुली दहाड़ लगाई कि राज्य का निर्माण जिस उद्देश्य से किया गया था वह तो आज तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आज पहाडों मंे शराब का चलन तेजी से बढ़ा है जबकि महिलाओं ने पहाड़ों शराब से मुक्त कराने का भी आंदोलन किया था। उन्होंने कहा कि आज राज्य के अन्दर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं तो कैसे मान लिया जाये कि आंदोलनकारियों को उनके सपनों का राज्य मिला है। निर्मला बिष्ट ने कहा कि जब उर्मिला सनावर ने वीआईपी के नाम का खुलासा कर दिया है तो सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने में आखिर क्यों डर रही है।
उत्तराखण्ड की सियासत में उस समय बडी तपिश दिखाई देने लगी जब भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने अचानक सोशल मीडिया पर आकर इस हत्याकांड में कथित रूप से शामिल रहे वीआईपी के नाम का बडा खुलासा करके आवाम को कुछ ऑडियो क्लिप भी सुनवा दी थी। उर्मिला सनावर की ऑडियो ने उत्तराखण्ड की सियासत में अचानक वो भूचाल लाकर खडा कर दिया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उर्मिला सनावर के बयान के बाद से तो मैदान से लेकर पहाड़ तक कथित वीआईपी को लेकर एक बडा आक्रोश सडकों पर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस से लेकर कुछ दल भी सड़कों पर धरना प्रदर्शन करने के साथ-साथ वीआईपी का पुतला भी फूकते हुए दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस इस मामले में काफी आक्रामक नजर आ रही है और वह पूरे प्रदेश में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित रूप से शामिल वीआईपी के खिलाफ सीबीआई जांच कराये जाने की मांग को लेकर सडकों पर धरने, प्रदर्शन करती हुई नजर आ रही है। पहाडों में अंकिता भंडारी हत्याकांड की ंिचगारी जिस तरह से सुलग रही है उसने पहाड में सियासत करने वाले राजनेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं कि अगर वह मौजूदा दौर में अंकिता भंडारी के साथ हुये अन्याय में उनकी लडाई लडने आगे नहीं आये तो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पड सकता है।

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