पहाड़़ों के गांव-गांव में गूंज रहा अंकिता हत्याकांड

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उक्रांद वीआईपी के नाम को लेकर आग-बबूला
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड मंें एक बार फिर अंकिता भंडारी हत्याकांड की चिंगारी सुलगने लगी है और यह चिंगारी अब गढ़वाल के पहाड़ों में गांव-गांव सुलगती हुई नजर आ रही है। आवाम के मन में इस हत्याकांड में वीआईपी का नाम आने के बाद से जो नाराजगी दिखाई दे रही है वह सरकार के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ा सिरदर्द पैदा कर सकती है? पहाड़ों के कुछ गांव में रात को कैंडल मार्च निकालने का जो दौर शुरू हो रखा है उसने उत्तराखण्ड की सियासत में एक बडा भूचाल मचाकर रख दिया है। उक्रांद एक बार फिर आक्रामक रूख के साथ अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा के एक दिग्गज राजनेता का नाम सामने आने के बाद से ही आग बबूला दिखाई दे रही है और वह सड़कों पर जिस आक्रमकता के साथ प्रदर्शन करते हुए सरकार और अफसरों को ललकार रही है उससे उसका राजनीतिक रूतबा एक बार फिर उफान पर आता हुआ दिखाई दे रहा है।
पौडी के एक गांव में रहने वाली अंकिता भंडारी की हत्या का जब राज बेनकाब हुआ था तो उसके बाद से ही उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडी हलचल मच गई थी कि पहाड़ की बेटी को किस तरह से एक साजिश के तहत मौत की नींद सुला दिया गया था। अंकिता भंडारी हत्याकांड में पांच गुनाहगारों को पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार कर उन्हें न्यायालय से आजीवन कारावास दिलाकर यह साबित कर दिया था कि उसने अंकिता के परिवारजनों को न्याय दिला दिया है। हालांकि अंकिता भंडारी के परिजन और उसको न्याय दिलाने की लड़ाई लडने वालों के मन में एक ही नाराजगी थी कि इस हत्याकांड में उस वीआईपी को बचा लिया गया जो अंकिता की मौत का सबसे बडा गुनाहगार था? उक्रांद और कांग्रेस हमेशा वीआईपी के नाम का खुलासा किये जाने को लेकर अपनी आवाज राज्य के अन्दर बुलंद करती रही। हालांकि यह मामला गुनाहगारों के आजीवन कारावास से खामोश हो गया था लेकिन भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर आकर अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के नाम का खुलासा करने की जो दहाड़ लगाई उसने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में एक बडा भूचाल लाकर खडा कर दिया है।
उर्मिला सनावर एक के बाद एक कई खुलासे करती चली गई तो उससे भाजपा के काफी नेता भी सहम गये और उन्होंने जिस तरह से अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की ताल ठोक दी है उससे सरकार धर्म संकट में आकर खडी हो गई है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम सामने आने पर विपक्षी दल और कुछ संगठन इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए सड़कों पर उतर आये हैं और पत्रकार वार्ता करके भी वह सरकार को ललकारते हुए नजर आ रहे हैं कि वह वीआईपी का नाम सामने आने पर मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए क्यों आगे नहीं आ रही है? अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की चिंगारी पहाडों के गांव-गांव में सुलगती हुई नजर आ रही है। कुछ गांव मंे तो मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए कैंडल मार्च भी हो रहे हैं जिसमें सरकार के खिलाफ बडी नाराजगी भी देखी जा रही है। उक्रांद अपने वजूद को जिंदा रखने के लिए अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी को सजा दिलाने का संकल्प लेकर सडकों पर आग बबूला होकर निकला हुआ है और उसकी साफ दहाड है कि जब तक हत्याकांड में शामिल वीआईपी को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा देंगे तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे।

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