शिखर पर धामी

0
134

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा पूर्व मुख्यमंत्री होगा जिसने अपने कार्यकाल में आवाम का दिल जीतने का हुनर दिखाया हो? सत्ता पर काबिज होकर कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने तो अपने आपको प्रदेश का राजा मानकर सत्ता चलाई और उनके राज में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटालों पर किसी ने आवाज बुलंद करने का साहस दिखाया तो उसे सरकारी ताकत से कुचलने का बडा षडयंत्र रचा गया जिसके चलते राज्य में कुछ पूर्व मुख्यमंत्री तानाशाह के रूप में अपनी पहचान बना गये? वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा बने पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता चलाने के लिए अपना मधुर व्यवहार और खुशमिजाजी से आवाम का दिल जीता और उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में जिस तरह से भ्रष्टाचार, घोटाले व माफियाराज पर बडा प्रहार करने की दिलेरी दिखाई उससे पुष्कर सिंह धामी राज्य में उस शिखर पर अपनी बुलंदी का झंडा फहरा चुके हैं जहां पहुंचने में राजनेताओं को एक लम्बा अर्साे लग जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसंह धामी ने अपनी दूसरी पारी खेलते हुए जिस तरह से भ्रष्टाचार व घोटालों पर बडा प्रहार किया है और राज्य में आज तक हुई भर्तियों की जांच के लिए एसटीएफ को आगे किया है उससे बडे-बडे नकल माफिया और उनके साथ गठजोड रखने वाले सिंडिकेट को नेस्तानबूत करने का ऑपरेशन चल रहा है जिससे राज्य की जनता और युवा पीढी के मन में पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक बडा विश्वास पैदा हुआ है और उत्तराखण्ड की जनता भी अब यह कहने से नहीं चूक रही कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक ऐसे कुशल राजनेता हैं जो राजनीति की छुपी प्रतिभाओ को आगे लाने के मिशन में हमेशा आगे बढते हैं और उन्हीं की पसंद के पुष्कर सिंह धामी मात्र एक साल के भीतर राज्य में जिस शिखर पर पहुंच गये हैं उस शिखर पर आज तक राज्य का कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री नहीं पहुंच पाया है? मोदी के सखा पुष्कर ंिसह धामी के बढ़ते रूतबे से उत्तराखण्ड के बडे-बडे सफदेपोश हैरान और परेशान हैं और उन्हें यह आभास होता जा रहा है कि पुष्कर सिंह धामी में दिल जीतने का जो हुनर है उससे वह एक लम्बी राजनीतिक पारी खेलेेंगे।
उत्तराखण्ड में सीएम के बढते रूतबे से राज्य के बडे-बडे सफेदपोश हैरान व परेशान हैं कि जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी ने एक साल में ही राज्य की आवाम का दिल जीत लिया है उससे उनका राजनीतिक भविष्य एक लम्बे युग तक उज्जवल दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड मंे राजनेताओं के बीच पहले पायदान पर कदम रख चुके हैं जहां पहुंचना बडे-बडे राजनेताओं के बस में दिखाई नहीं दे रहा है? गजब बात है कि खटीमा से विधायक रहे पुष्कर सिंह धामी को भाजपा शासन में कभी मंत्री बनाने के लिए भी किसी ने उनकी पैरवी नहीं की और न ही उनके राजनैतिक कौशल को पहचानने का किसी ने हुनर दिखाया। पहली बार मात्र छह माह के लिए मिली सत्ता में पुष्कर सिंह धामी ने जो राजनीतिक करिश्मा करते हुए एक बार फिर राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार बनाई थी तो उसने उन्हें दिल्ली में भाजपा के दिग्गज राजनेताओं का दुलारा बना दिया था। उत्तराखण्ड के अन्दर इक्कीस सालो ंसे यही मिथक चलता था कि पांच साल बाद सत्ता पर काबिज राजनैतिक पार्टी को आवाम पांच साल का वनवास दे देती थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मात्र छह माह के भीतर ही राज्यभर में अपनी सादगी और अपनी स्वच्छ प्रशासन देने की छवि से आवाम को अपना बना लिया और उसी का नतीजा था कि राज्य की जनता ने एक स्वर मंे कहा कि जो युवा मुख्यमंत्री मात्र छह माह में राज्य को ऊचाई पर ले जा सकता है वह पांच साल में तो उत्तराखण्ड का नक्शा ही बदल देंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आपको राज्य का जनसेवक करार दे रखा है और राज्य के सभी डीएम व पुलिस कप्तानों को सख्त आदेश दिये हुये हैं कि किसी भी व्यक्ति की फरियाद अगर उन्होंने नहीं सुनी तो यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा यही कारण है कि राज्य के डीएम व पुलिस कप्तान अपने कार्यालय में आने वाले हर फरियादी को इंसाफ दिलाने के मिशन में आगे बढते जा रहे हैं।

LEAVE A REPLY