सीएम के खिलाफ बगावत करता आईपीएस!

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आईपीएस ने टोली के साथ खटीमा में धामी की हार का जश्न मनाया था
गजबः धामी को किसकी शह पर ललकार रहा गुंडा आईपीएस
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री अपने शासनकाल में न्यायप्रिय राजनेता के रूप में उभर कर सामने आ चुके हैं और उन्होंने न्याय के लिए हमेशा छोटे से लेकर बडों पर एक्शन लेेने से कभी अपने आपको पीछे नहीं रखा। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री को एक दबंग राजनेता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि उन्होंने कुछ माह पूर्व जिस तरह से हरिद्वार के नगर निगम में हुये बडे घोटाले में डीएम से लेकर कुछ अफसरों को निलम्बित किया था उससे यह साफ हो गया था कि वह न्यायप्रिय शासक हैं। हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के खिलाफ एक लम्बे दशक से एक आईपीएस अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर पर्दे के पीछे रहकर बगावत कर रहा है? बहस चलती आ रही है कि आखिर यह आईपीएस किसकी शह पर राज्य के मुख्यमंत्री को ललकार रहा है क्योंकि जब मुख्यमंत्री खटीमा में चुनाव हारे थे तो इस आईपीएस ने अपनी टोली के साथ एक बंगले में दावत तक की थी और वहां यह जश्न मनाया था कि अब धामी मुख्यमंत्री नहीं बन पायेंगे यह बात हमेशा सवाल खडे करती रही कि आखिर यह आईपीएस सरकार से बडा है क्या जो मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत करने का तांडव रच रहा है?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वच्छ राजनीति उन राजनेताओं और अफसरों को रास नहीं आ रही है जो भ्रष्टाचार और अपनी हैकडी से आवाम को डराने और धमकाने के एजेंडे पर चलने की कोशिश हमेशा करते आ रहे हैं? मुख्यमंत्री ने हमेशा न्याय का रास्ता चुना और उन्होंने सबको यही संदेश दे रखा है कि अगर किसी ने भी आवाम के साथ अन्याय करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। मुख्यमंत्री की न्याय व्यवस्था को देखकर राज्यवासी हमेशा गदगद नजर आते हैं लेकिन कुछ अफसरों को यह रास नहीं आ रहा है और इसी के चलते उत्तराखण्ड का एक आईपीएस मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत का झंडा साजिश के तहत लंबे समय से उठाये हुये है? हैरानी वाली बात है कि जब 2022 में विधानसभा चुनाव हुये और उसमें मुख्यमंत्री का सिक्का चला लेकिन एक साजिश के तहत खटीमा में उन्हें चुनाव हराने का जो चक्रव्यूह रचा गया था वह उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में भाजपा के दिग्गज राजनेताओं को हैरान कर गया था।
मुख्यमंत्री जब चुनाव हारे तो उनके खिलाफ बगावत करने का झंडा बुलंद करने वाले इस आईपीएस ने अपने यहां पुलिस के कुछ लोगों के साथ मिलकर जश्न मनाया था और यह कहा था कि अब पुष्कर सिंह धामी हार के बाद मुख्यमंत्री नहीं बन पायेंगे। इस पार्टी का राज वहां शामिल एक व्यक्ति ने बेनकाब किया था लेकिन मामला पुलिस अफसर का था इसलिए इस मामले में सबने इसलिए खामोशी साध ली थी कि पुष्कर सिंह धामी को हाईकमान ने दुबारा मुख्यमंत्री बना दिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खिलाफ हुई साजिश करने वालों के खिलाफ क्यों एक्शन लेने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये थे यह काफी चर्चा मे रहा था? राजधानी के गलियारों में पिछले लम्बे समय से यह सुगबुगाहट है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ अपने कुछ अफसरों के साथ बगावत का झंडा उठाने वाला आईपीएस बडी साजिश के तहत कोई तानाबाना बुनकर मुख्यमंत्री को अस्थिर करने के शातिराना खेल में जुटा हुआ है? चर्चा तो यहां तक है कि वह कुछ मीडियाकर्मियों के सामने मुख्यमंत्री को लेकर जो शब्दबाण चला रहा है उससे यह सवाल पनप रहे हैं कि आखिरकार क्या कोई आईपीएस इतना बलवान हो सकता है कि वह राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ भी बगावत करने का झंडा उठाने की ताकत रख सकता है?

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