रघुनाथ की ललकार पर सरकार खामोश!

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को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में मंत्री पर बार-बार दहाड़ता मोर्चा
आखिर इस घोटाले के सच पर कब तक रहेगा पर्दा?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत चलने के रास्ते को चुनने के लिए चार साल पहले आगे आई और उसने यही दम भरा था कि भ्रष्टाचार और घोटाला किसी ने भी करने की हिमाकत की तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। सरकार की सख्ती के बावजूद भी बार-बार कुछ भ्रष्टाचार के मामलों का शोर मचने के बाद यह बहस चल पडती है कि आखिरकार भ्रष्ट तंत्र इतना बेखौफ क्यों है कि उसे भ्रष्टाचार या घोटाला करने से भय नहीं लगता? अजीब बात है कि एक ओर तो सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधी लडाई लडने का ऐलान किये हुये हैं वहीं जन संघर्ष मोर्चा बार-बार को-ऑपरेटिव बैंक में हुये बडे घोटाले पर सहकारिता मंत्री को दहाड़ता आ रहा है। मोर्चा अध्यक्ष की ललकार सुनने के बावजूद भी सरकार हमेशा क्यों खामोश रहती है यह कई सवालों को जन्म देता आ रहा है? अब तो इस घोटाले को लेकर मोर्चे ने लेनदेन के राज को भी बेनकाब करने का काम किया और राजभवन से इस मामले की जांच कराकर सहकारिता मंत्री को मंत्रिमंडल से बाहर करने की फिर मांग बुलंद की है। सवाल तैर रहे हैं कि अगर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अपना रही है तो फिर इस घोटाले में मंत्री पर उठती उंगलियों ने कई सवालों को जन्म दे रखा है और यह बात उठ रही है कि आखिरकार इस घोटाले के सच से सरकार कब पर्दा उठाने के लिए आगे आयेगी?
उत्तराखण्ड का जबसे जन्म हुआ है तबसे राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों का ऐसा कॉकटेल चल रहा है कि आवाम को समझ ही नहीं आ रहा कि वह कब तक उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों का यह काला खेल देखते रहेंगे? सरकार ने उत्तराखण्ड के अन्दर से भ्रष्टाचार और घोटालों को खत्म करने का संकल्प लिया हुआ है लेकिन जब जन संघर्ष मोर्चा खुलेआम किसी भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्री या अफसरों को अपनी रडार पर लेकर सरकार को आईना दिखा रहा है तो भी सरकार उस घोटाले या भ्रष्टाचार पर एक्शन लेने के बजाए क्यों खामोश हो जाती है यह हमेशा एक पहेली बनी हुई है? मोर्चे के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने एक लम्बे समय से को-ऑपरेटिव बैंक में हुये घोटाले को लेकर सरकार को आईना दिखा रखा है और राजभवन से भी वह बार-बार इस घोटाले में एक्शन लेने के लिए अपनी मांग उठा रही है लेकिन इस मामले में राजभवन की चुप्पी पर भी मोर्चा अध्यक्ष सवालों की बारिश कर रहे हैं?
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाये हैं कि वर्ष 2022 में सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत की सर परस्ती में को-ऑपरेटिव भर्ती घोटाला हुआ, जिसमें प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तौर पर करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ, जिसकी पुष्टि बैंक खातों से की जा सकती है। नौकरी पाये लोगों के खातों की बैंक डिटेल से दस से पन्द्रह लाख रुपए अभ्यर्थियों ने अपने खातों से लेनदेन किया। मोर्चा लगातार भर्ती घोटाले में हुए लेनदेन की जांच की मांग कर रहा है,लेकिन सहकारिता मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि इनकी मिली भगत के चलते ही ये सारा फर्जीवाड़ा हुआ। इस मामले में मोर्चा द्वारा राज भवन के खिलाफ भी आंदोलन किया गया, लेकिन राजभवन कान में तेल डालकर सोया हुआ है,जिससे प्रतीत होता है कि उक्त मामले में राजभवन की भी मौन सहमति है। नेगी ने कहा कि सहकारी बैंक चतुर्थ श्रेणी (सहयोगी,गार्ड) भर्ती वर्ष 2022 में भारी अनियमितता हुई, जिसके तहत भर्ती में भारी लेनदेन व भाई भतीजावाद हुआ तथा बैंकों में कार्यरत अधिकारीगण व पदाधिकारी गणों ने अपने निकट संबंधियों, रिश्तेदारों को नियुक्तियां प्रदान करने में अपने माध्यम से मोटी रकम भेंट की, जिसमें नियमों को तार- तार करने का काम किया गया।
नेगी ने कहा कि उक्त घोटाले के मामले में गठित जांच कमेटी द्वारा जनपद देहरादून,उधम सिंह नगर व पिथौरागढ़ की रिपोर्ट लगभग तीन- साढ़े तीन वर्ष पूर्व यानी 20 जून 2022, 2 सितंबर 2022 व 26 सितंबर 2022 के द्वारा शासन को सौंप दी थी। नेगी ने कहा कि सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश के सहकारी बैंकों में 423 चतुर्थ श्रेणी (सहयोगी, गार्ड) कर्मचारियों की भर्ती कराई गई थी, जिसमें देहरादून, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ व उधम सिंह नगर जनपद में बड़े पैमाने पर जालसाजों ने भर्ती घोटाले को अंजाम दिया था ,जिसको लेकर सरकार ने एक अप्रैल 2022 व 4 अप्रैल 2022 को जांच कमेटी गठित की थी। सचिव, सहकारिता भी बैंक भर्ती में हुए घोटाले की पुष्टि कर चुके हैं। अब सवाल उठता है कि अगर इस घोटाले की पुष्टि 2022 में हो गई थी तो फिर इस घोटाले में एक्शन लेने के लिए सरकार ने अपने कदम आगे बढाने से क्यों संकोच कर रखा है?

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