उत्तराखण्ड के अन्दर उठ रही आवाज

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धामी से सीखें कैसे होती है ‘राजनीति’
सत्ता मिली और पाल लेते हैं अंहकार!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार की कमान उस युवा राजनेता के हाथों में है जिसे भाजपा सरकारों में कभी मंत्री तक नहीं बनाया गया था। मुख्यमंत्री को भले ही मंत्री पद का तर्जुबा न रहा हो लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने के बाद उन्होंने सियासत में जो धाकड़पन दिखाया उसने विपक्ष और भाजपा के बडे-बडे राजनेताओं का चार साल से बीपी बढ़ा रखा है। उत्तराखण्ड में आवाम देखती आई है कि अधिकांश विधायक और राजनेता जब पॉवर में आते रहे तो उन्होंने खुद को राज्य का सम्राट समझकर जो अहंकार पाला उससे वह आवाम की नजरों में हीरो के बजाए जीरो होते चले गये और अब तो उत्तराखण्ड के अन्दर यह आवाज भी उठने लगी है कि मुख्यमंत्री जिस शैली से सरकार चला रहे हैं और उनकी राजनीति करने का पैमाना सबसे अनोखा है उस राह पर चलने के लिए भाजपा विधायकों को उनसे कुशल राजनीति का पाठ पढना चाहिए कि किस तरह से सत्ता में रहते हुए आवाम का दिल जीता जाता है।
उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार में भाजपा के अधिकांश मंत्री व विधायक सत्ता के नशे में इतने चूर हो रहे हैं कि वह अपने इलाके की उस जनता को ही नजर अंदाज करने से पीछे नहीं हट रहे? हैरानी वाली बात है कि जिस जनता ने उन्हें पॉवर में लाने के लिए अपना वोट दिया उनमे से अधिकांश मंत्री व विधायक की कुर्सी पर आसीन होकर आवाम को अपने पॉवर का अहंकार दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं जिसके चलते आम जनमानस के मन में ऐसे राजनेताओं को लेकर हमेशा बडी नाराजगी पनपती दिखाई दे रही है? प्रचंड बहुमत की सरकार मिलने के बाद भले ही राज्य के पूर्व मंत्री व विधायक इस गुमान में रहे कि जनता के बीच उनकी बडी पकड के चलते उन्हें जीत हासिल हुई है लेकिन वास्तविकता यह है कि 2022 में हुये विधानसभा चुनाव में सभी विधायकों की जीत का सेहरा सिर्फ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिर पर ही बंधा था। जनसेवा करने का ढोल पिटने वाले अधिकांश पूर्व मंत्री व विधायक सत्ता को अपनी भपौती समझ बैठे और उन्हांेने जिस तरह से अपने आपको सरकार समझने की हठधर्मिता दिखाई उसी का परिणाम है कि राज्य के अन्दर मौजूदा समय में अधिकांश मंत्री व विधायकों के खिलाफ आवाम के मन में बडी नाराजगी दिखाई दे रही है भले ही वह इस नाराजगी को सडकों पर सार्वजनिक करने के लिए आगे न आ रहे हों? वहीं दूसरी बार सरकार की कमान संभाल रहे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने चार साल के कार्यकाल में आवाम की नब्ज पहचानते हुए उन्हें जिस तरह से अपने फलावर रूप के मोह में कैद कर लिया है उससे आज हर तरफ धामी-धामी के ही उद्घोष लगते हुए नजर आ रहे हैं। युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस सौम्य और उदारता के साथ आवाम के बीच राजपाठ चलाया उससे राज्य की अधिकांश जनता पुष्कर ंिसह धामी की कायल हो गई और वह यह कहने से भी नहीं चूक रही कि भाजपा के अधिकांश मंत्रियों व विधायकों को पुष्कर ंिसह धामी से राजनीति की ए,बी,सी,डी सिखनी चाहिए क्योंकि जो आवाम सत्ता पर किसी भी राजनेता को आसीन कर सकती है वह जनता सत्ता के घमंड में चूर उस राजनेता को पांच साल का वनवास भी दिला सकती है? कुल मिलाकर कहा जाये तो उत्तराखण्ड के अन्दर एक मात्र पुष्कर सिंह धामी ही ऐसे राजनेता दिखाई दे रहे हैं जो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक बार फिर सत्ता पर आसीन कराने के लिए रात-दिन एक किये हुये हैं और अगर राज्य में एक बार फिर कमल खिला तो उसके रियल हीरो सिर्फ और सिर्फ पुष्कर सिंह धामी ही होंगे।
उल्लेखनीय है कि भाजपा हाईकमान ने जब पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की कमान सौंपकर उन्हें राज्य में हर चुनाव के अन्दर कमल खिलाने का टास्क दिया हुआ है और वह इस टास्क को पूरा करने के लिए हमेशा पार्टी और संगठन को साथ लेकर विपक्ष को चुनावी रणभूमि में ढेर करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिन्होंने राज्य के हर जिले में आम आदमी के साथ सीधा संवाद व उनके दर्द को समझने की दिशा में अपने कदम आगे बढा रखे हैं उसके चलते राज्य के चारो ओर पुष्कर सिंह धामी का इकबाल बुलंद होता नजर आ रहा है। हालांकि उनके इस इकबाल से भाजपा के ही कुछ बडे दिग्गज नेता पर्दे के पीछे से बेचैन दिखाई दे रहे हैं और उन्हें अपनी भविष्य की राजनीति उज्जवल दिखाई नहीं दे रही है? पुष्कर सिंह धामी ने चार साल में जिस तरह से सत्ता चलाई उससे यह सवाल भी खडे हो रहे हैं कि भाजपा के अधिकांश मंत्री व विधायकों को पुष्कर सिंह धामी से राजनीति की शिक्षा लेनी चाहिए?
बता दें कि 2022 में राज्य की जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत की सरकार दी और विश्वास जताया था कि डबल इंजन सरकार राज्य के विकास का एक नया अध्याय जरूर लिखेगी और उनके इस सपने को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने दिल्ली से राज्य के विकास के लिए बडी-बडी विकास योजनायें लाकर जो एक जज्बा दिखा रखा है उसे देखकर राज्य की जनता के मन में यह विश्वास हो चला है कि उत्तराखण्ड की दशा और दिशा बदलने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से बेहतर कोई राजनेता उन्हें नहीं मिला। उत्तराखण्ड की जनता पुष्कर सिंह धामी के चमत्कारी अंदाज की कायल हो गई और राज्य में भाजपा के खिलाफ आवाम के मन मंे चली आ रही नाकारात्मक सोच का अंत होने लगा है। अब राज्य की जनता पुष्कर ंिसह धामी के सौम्य व उदार हृदय से सत्ता चलाने के अंदाज पर एक बार फिर राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी कराती है तो इस जीत के रियल हीरो पुष्कर ंिसह धामी ही माने जायेंगे।

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