उत्तराखण्ड में एक ही शोर सीएम साहब लोकायुक्त का चलो मास्टर स्ट्रोक

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विजिलेंस के शिकंजे में नहीं फसेंगे भ्रष्टाचार के बडे़ मगरमच्छ!
तो क्या 2027 के चुनाव में लोकायुक्त मुददा फिर उछलेगा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री चार साल से भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग का ऐलान किये हुये हैं और विजिलेंस सिर्फ उन्हीं भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों के पीछे डाल पाती है जिनके बारे में उनके पास कोई शिकायत लेकर आता है। विजिलेंस किसी भी भ्रष्टाचारी के खिलाफ सीधा एक्शन लेने के लिए अधिकृत ही नहीं है ऐसे में वह कैसे बडे भ्रष्टाचारियों को अपने शिकंजे में ले पायेगी यह अपने आप में एक बडा सवाल आज भी राज्य के अन्दर गूंज रहा है? मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद भी अगर समय-समय पर कुछ भ्रष्टाचार और घोटाले के मामले सामने आ रहे हैं तो उसको लेकर राज्य की जनता के मन में एक पीडा भी है और अब उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार यही शोर विधानसभा चुनाव से पूर्व गूंजने लगा है कि जब तक राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार के बडे मगरमच्छों को कैद में नहीं किया जाता तब तक राज्य भ्रष्टाचारमुक्त होना असम्भव है इसलिए चुनाव से पूर्व सीएम साहब लोकायुक्त का गठन करके भ्रष्टाचारियों पर नकेल लगाने के लिए एक बडा मास्टर स्ट्रोक चलें जिससे वो शोर थम जाये जो पच्चीस सालों से राज्य के गलियारों में मच रहा है कि लोकायुक्त के बिना भ्रष्टाचार के बडे मगरमच्छ बेनकाब नहीं हो पायेंगे?
उत्तराखण्ड के अन्दर एक से एक पूर्व मुख्यमंत्री देखने को मिले जिनमें से काफी मुख्यमंत्री तो भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने का ऐलान करते रहे लेकिन उनका यह ऐलान सिर्फ मीडिया में बयानबाजी तक ही सीमित होकर रह गया था। उत्तराखण्डवासी तेइस सालों से भ्रष्टाचार का जहर पीने के लिए विवश हो रखे थे लेकिन जबसे राज्य की कमान युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाली है तबसे वह राज्य के अन्दर भ्रष्टाचारियों के चेहरे एक के बाद एक बेनकाब करने की दिशा में आगे बढ़ते जा रहे हैं। मौजूदा दौर में आवाम विजिलेंस पर खूब विश्वास कर रहा है और उनसे जो भी भ्रष्टाचारी पैसे की मांग कर रहा है उसे सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए वह सीधे विजिलेंस के पास शिकायत करने के लिए आगे आ रहा है कि वह किसी भ्रष्टाचारी को पैसे नहीं देगा। मुख्यमंत्री ने आवाम के मन में भ्रष्टाचार से लड़ने की जो नई अलख जगाई है उससे भ्रष्टाचारियों का बीपी बढ़ा हुआ है और जब भी कोई भ्रष्टाचारी अपने आपको चालाक समझकर भ्रष्टाचार करने का खेल खेलने का दुसाहस करता है तो विजिलेंस के हाथ उसके गिरेबान तक पहुंच जाते हैं और उसके बाद उसका खेल खत्म हो जाता है।
उत्तराखण्डवासियों को अब पुष्कर सिंह धामी में राजनीति का एक नया अवतार देखने को मिल रहा है जिसके चलते उनकी उम्मीदें पुष्कर सिंह धामी से काफी विशाल हो चुकी हैं और आवाम पुष्कर सिंह धामी को ही समूची सरकार मानकर उससे एक बडी आस लगाने लगा है। उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार की सभी टहनियों को काटने की इच्छा अब राज्यवासियों के मन मंे उबाल मार रही हैं और यही कारण है कि आवाम की चाहत है कि पुष्कर युग में जल्द से जल्द लोकायुक्त का गठन हो और उसके बाद मुख्यमंत्री की जिन बडे-बडे भ्रष्टाचारियों पर हमेशा निगाह रहती है उन सभी भ्रष्टाचारियों की भ्रष्टाचार की कुंडली खंगालने के लिए लोकायुक्त आगे आये और उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार से अकूत दौलत कमाने वाले एक-एक भ्रष्टाचारी को बेनकाब करने का ऐसा ऑपरेशन चले जिसे देखकर देशभर के लोग भी यह कहने से न चूके कि उत्तराखण्ड में रामराज युग अब धरातल पर दिखाई देने लगा है।
उत्तराखण्ड में पच्चीस सालों से चला आ रहा भ्रष्टाचार मात्र कुछ वर्षों में तो पूरा नहीं हो सकता लेकिन इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ फेंकने का जो संकल्प लिया हुआ है उसे वह अपनी दृढ़ इच्छा से पूरा करने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ़ते जा रहे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर अब आवाम को यह समझ आ चुका है कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं वह करते हैं और उन्होंने नकल विरोधी कानून से लेकर राज्य में समान नागरिक संहिता कानून को लेकर जिस तरह से बडा कदम उठाया उससे वह उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देश-विदेश में भी एक धुरंदर मुख्यमंत्री के रूप मंे प्रसिद्धि पा चुके हैं। देश में जहां राम राज्य की कल्पना साकार करने के लिए देश के प्रधानमंत्री आगे आते हुये नजर आये हैं वहीं राज्य के मुख्यमंत्री ने भी उत्तराखण्ड के अन्दर राम राज्य की कल्पना को साकार करने का बडा बीडा उठा लिया है। अब करोडो उत्तराखण्डवासियों को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व पुष्कर युग में लोकायुक्त की चाहत फिर पनप गई है और उनका मानना है कि राज्य में जिस तरह से मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचारियों के बिग मगरमच्छो पर अपनी नजर रखी हुई है उन भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का ऑपरेशन राज्य में लोकायुक्त बनने के बाद तेजी के साथ शुरू हो जाये जिससे उन राजनेताओं और भ्रष्ट अफसरों के चेहरे बेनकाब हो जायें जिन्होंने भ्रष्टाचार से अकूत दौलत का किला खडा कर रखा है? मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के संकल्प को उत्तराखण्ड में सच करने के लिए मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन भ्रष्टाचारी चलाकर सरकार के जलवे का इकबाल दिखा रखा है और अब देखने वाली बात होगी कि पुष्कर युग में कब लोकायुक्त की एंट्री होगी?

2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही कांग्रेस ने राज्य में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ अपनी हुंकार लगानी शुरू कर रखी है। कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखण्ड कांग्रेस को एक नयापन देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जहां गणेश गोदियाल की ताजपोशी की है तो वहीं कांग्रेस के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह को भी बडी जिम्मेदारी से नवाजा गया है। त्रिदेव बने इन नेताओं ने अपनी ताजपोशी के बाद से ही राज्य सरकार और उनके कुछ नेताओं को भ्रष्टाचार के कथित मुद्दों पर धेराना शुरू कर दिया है और उनका यही ऐलान है कि राज्य के अन्दर जिस तरह से भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है वह भाजपा को सत्ता से उखाड फेंकने के लिए काफी है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष लोकायुक्त के मुद्दे को लेकर फिर आक्रामक होगा और यह मुद्दा खूब उछलेगा ऐसी प्रबल सम्भावनायें हैं।

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