तो क्या तीन दिन बाद फिर लगने लगेंगे मीटर?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के अन्दर स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली चोरी रोकने और बिजली की गुणवत्ता में बढोत्तरी करने के बडे दावे किये थे और इन दावों पर विपक्ष से लेकर राज्यवासी यकीन नहीं कर रहा था और उनका साफ आरोप था कि इन मीटरों के लगने से लोगों के घरों में कई-कई गुना बिजली का बिल आ रहा है जो कि उनके लिए एक बडा सिर दर्द बन गया है कि वह आखिरकार बिजली का भारी भरकम बिल कैसे चुका पायेंगे? स्मार्ट मीटरों को लेकर कुछ जनपदों में कांग्रेस के नेताओं ने बडा बवाल मचाया था और उधमसिंहनगर में एक पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक ने इन स्मार्ट मीटरों को लेकर सरकार और बिजली महकमे के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया था। पूर्व मंत्री व विधायक ने तो सरेआम इन स्मार्ट मीटरों को सड़क पर लाकर उन्हें तोडकर इनका खूब तमाशा बनाया था और दो टूक चेतावनी दे डाली थी कि अगर उनके इलाके में किसी ने भी स्मार्ट मीटर लगाने का दुसाहस किया तो उनको इसका खामियाजा भुगतना पडेगा। लम्बे समय से स्मार्ट मीटरों को लेकर मच रहे बवाल और उससे मिल रही शिकायतों को लेकर आखिरकार मुख्य अभियंता (संबद्ध) निदेशक (परिचालन) ने अधिक्षण अभियंता एवं सीईओ स्मार्ट मीटरिंग उत्तराखण्ड पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड विद्युत वितरण मण्डल को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से मीटर बदलने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। मीटर बदलने पर रोक के इस आदेश ने आवाम के मन में एक बडी शंका पैदा कर दी है कि आखिरकार जिनके घरों और प्रतिष्ठानों में स्मार्ट मीटर लग गये हैं उन्हें हटाने के लिए आखिर महकमा अब क्या करेगा?
उत्तराखण्ड के अन्दर जब स्मार्ट मीटरों को लगाने की शुरूआत की जा रही थी तो सरकार और अफसरशाही ने यह संदेश दिया था कि इन स्मार्ट मीटरों के लगने से बिजली चोरी पर बडा अंकुश लगेगा और बिजली वितरण में एक गुणवत्ता देखने को मिलेगी। सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों ने भी राज्यवासियों को संदेश दिया था कि इन मीटरों के लगने से बिजली चोरी रूकेगी तो वहीं बिजली में एक बडी गुणवत्ता देखने को मिलेगी। सरकार के आदेश पर सिस्टम के अफसरों ने जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का दौर शुरू किया था और जिसने भी इनको न लगाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की तो उसे मुकदमों का भय दिखाकर डराया गया था। विपक्ष के काफी नेताओं ने इन स्मार्ट मीटरों को लेकर अपनी बडी नाराजगी प्रकट की थी और कहा था कि इन मीटरों के कारण एक आम आदमी को इसका बडा नुकसान हो रहा है क्योंकि जिसका बिल पांच सौ रूपया आया करता था वह कई गुना बढकर आने से उनके परिवार के सामने रोटी-रोटी का संकट आकर खडा हो रखा है लेकिन सरकार और सिस्टम अपनी खामोशी साधकर आम जनमानस को एक बडा झटका देने के लिए आगे आ रखे हैं?
विधायक तिलकराज बेहड ने तो सरकार और पॉवर कारपोरेशन को शुरूआती दौर से ही बडा अल्टीमेटम दे रखा है कि अगर उनके इलाके में स्मार्ट मीटर लगाने की कोशिश की गई तो इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। स्मार्ट मीटरों के खिलाफ तिलकराज बेहड ने अपने इलाके में शक्ति प्रदर्शन तक किया था और वह लगातार सिस्टम को ललकार रहे थे कि उनके इलाके में अगर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए महकमे ने अपने कदम आगे बढाये तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पडेगा। तिलकराज बेहड ने यहां तक चेतावनी दे रखी थी चाहे उन पर कितने भी मुकदमे दर्ज क्यों न हो जायें वह स्मार्ट मीटरों के खिलाफ अपने कदम पीछे नहीं करेंगे। हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड में अब तक लगभग साढे तीन लाख से अधिक मीटर घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में लग चुके हैं और अब स्मार्ट मीटरों के लगाने पर फिलहाल रोक लगाई गई है और कारण बताया जा रहा है कि इन मीटरों को लेकर जो शिकायतें आ रही थी उनका समाधान करने के बाद फिर मीटरों को स्मार्ट मीटरांे से बदलने का कार्य पुनः प्रारंभ किया जायेगा।

