वर्दी में ‘हिटलर’

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अफसर की गुंडई पर रहस्मय खामोशी
खाकी में कब तक कमजोरों को डरायेगा बेलगाम अफसर!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पच्चीस सालों से ढोल पीटा जा रहा है कि राज्य में पुलिस का चेहरा मित्र रूप होगा और आवाम के साथ पुलिस मित्रता निभायेगी तो वहीं अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ उसका फायर रूप हमेशा देखने को मिलेगा। राज्य के कुछ बडे-बडे पुलिस अफसर कानून का राज स्थापित करने का भोपू जरूर बजाते रहे लेकिन जिस तरह से राज्य के अन्दर इन वर्षों में पुलिस के कुछ अफसरों ने आम जनमानस को खाकी का रौब दिखाने के लिए उन्हें अपनी दबंगता के तांडव से रूबरू कराया था वह किसी से छिपा नहीं है और राज्य के अन्दर मित्र पुलिस का जो स्लोगन दिया गया था वह हमेशा राज्य की फिजाओं में हवा-हवाई ही नजर आया? उत्तराखण्ड में पुलिस का एक अफसर वर्दी पहनकर एक लम्बे दशक से हिटलर बना हुआ है और इस हिटलर अफसर की गुंडई पर सरकार पर रहस्यमय खामोशी साधे हुये है वह काफी हैरान करने जैसा ही दिखाई देता है। उत्तराखण्ड के अन्दर हमेशा यह बहस चलती रही है कि खाकी के कुछ अफसर कमजोरों को अपनी वर्दी का तांडव दिखाकर उन्हें डराते और मुकदमों में फसाने का खेल, खेलते रहेंगे?
उत्तराखण्ड जब बना तो उत्तर प्रदेश की वर्दी से भिन्न उत्तराखण्ड की वर्दी बनाने का कुछ अफसरों ने सरकार को संदेश दिया था और उसके चलते कभी पुलिस की टोपी बदली गई तो कभी वर्दी में कुछ और बदलाव किया गया था लेकिन पुलिस के काफी अफसरों और दरोगाओं का पैटर्न बदलने में न तो कोई सरकार कामयाब हो पाई थी और न ही पुलिस के अधिकांश अफसर? उत्तराखण्ड के अन्दर यह भोपू बजाया जाता था कि राज्य के अन्दर पुलिस मित्रता और सेवा के भाव पर आगे बढेगी लेकिन कुछ राजनेताओं के इशारे पर पुलिस के कुछ अफसर कटपुतली की तरह नाचते चले गये और उन्हांेने अपनी कुर्सी बचाने के लिए हमेशा कुछ राजनेताओं की आंखो मे खटकने वालों के खिलाफ फर्जी मुकदमे कायम करने और उन्हें अपनी वर्दी का रौब दिखाने में कोई कसर नहीं छोडी यह भी एक कडुवा सच है।
उत्तराखण्ड में भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल मंे पुलिस के कुछ अफसर हिटलरशाही अंदाज में काम करते हुए दिखाई दिये और उनके मन में कभी भी सरकार और सिस्टम का कोई भय देखने को नहीं मिला, भले ही उन्होंने वर्दी की गरिमा को तार-तार करने में कोई कसर न छोडी हो? पिछले कुछ वर्षों से राज्य के अन्दर एक ऐसा पुलिस अफसर देखने को मिलता आ रहा है जो हिटलर की तरह पुलिसिंग करने के लिए आगे रहता है और उसने अपनी वर्दी पहनने के दौरान जो शपथ ली थी उस शपथ को वह हमेशा हवा में उडाने में ही विश्वास रखता है यह किसी से छिपा नहीं है। उत्तराखण्ड के अन्दर कानून का राज हो इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक दशक से पुलिस के आला अफसरों को संदेश देते आ रहे हैं लेकिन इस संदेश का एक पुलिस अफसर जो आवाम को अपनी हिटलरशाही दिखाने से कभी बाज नहीं आता वह सरकार के संदेश को कभी मानता हुआ नजर ही नहीं आया? नोएडा में एक होटल व्यवसायी ने आत्महत्या की और उस आत्महत्या में जो सुसाइड नोट मिला उसको लेकर उत्तराखण्ड के उस हिटलर पुलिस अफसर पर सवालिया निशान लगे और राज्य के आला पुलिस अफसर ने इस मामले में जांच कराने का भी भोपू बजाया था लेकिन यह भोपू सिर्फ भोपू बनकर ही रह गया था जिसके चलते हिटलर अफसर को इस बात का भ्रम है कि उसके कंधों पर जो सितारे लगे हुये हैं उसके चलते वह वो सबकुछ कर सकता है जो पुलिस महकमे के अन्दर एक अपराध माना जाता है?

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