धामी बन गये सियासत के चाणक्य

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राजनीति का लम्बा युग निभायेंगे पुष्कर!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री ने भी यही चाहत पाली है कि राज्य के युवा मुख्यमंत्री जिस विजन के साथ काम कर रहे हैं उसके चलते उन्हें दस से पन्द्रह साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन रखा जाये क्योंकि वह एक विजन के साथ उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में रात-दिन आगे बढ रहे हैं। अब आवाम से लेकर एक्स मुख्यमंत्री ने भी यह मान लिया है कि मौजूदा दौर में सीएम सियासत के वो चाणक्य बन गये हैं जो अपनी चाणक्य नीति से उत्तराखण्ड के हर जनपद को विकास की उस उडान पर ले उडे हैं जहां आज तक कोई एक्स सीएम नहीं उड पाया था? आवाम के दिलों में मुख्यमंत्री की सियासत को लेकर जो भाव देखने को मिल रहे हैं उसको देखकर तो यही आभास हो रहा है कि मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड की राजनीति में एक लम्बा युग जरूर निभायेंगे जिसके चलते वह उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बना सकें।
एक कहावत है कि जैसा राजा वैसी प्रजा। उत्तराखण्ड के अन्दर अधिकांश एक्स सीएम सत्ता चलाने के लिए आवाम के सामने भोपू बजाते रहे कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरों टॉलरेंस के तहत सरकार चलायेंगे। हालांकि उनका यह भोपू हमेशा भ्रष्टाचार का सुर ही बजाता रहा और आवाम के मन मंे अधिकांश एक्स सीएम की कार्यशैली को लेकर बडी नाराजगी पनपती रही। उत्तराखण्ड के अन्दर हमेशा यह शोर मचता था कि जब सरकारें ईमानादारी से काम कर रही है तो फिर उनके काफी अफसर कैसे भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाते हुए बेलगाम होते रहे? चंद एक्स सीएम तो अपने कुछ अफसरों के अहंकार और भ्रष्टाचार को देखते हुए भी घृतराष्ट्र बने रहे और उसी के चलते राज्यवासी उन्हें अपनी रडार पर लेने से कभी पीछे नहीं हटे? चंद एक्स सीएम के खिलाफ उनके शासनकाल में हुये भ्रष्टाचार और घोटालों का आईना लोग सोशल मीडिया पर दिखाते रहे और इससे खफा होकर चंद एक्स सीएम कुछ मीडियाकर्मियांे के खिलाफ फर्जी मुकदमें लिखवाने से बाज नहीं आये और अपने आपको ईमानदारी का आईना बताने वाले चंद आईपीएस अफसर गुलामी की जंजीरों में कैद होकर कुछ पत्रकारों की लेखनी को कूंद करने के लिए उन पर फर्जी मुकदमें लिखवाने से पीछे नहीं हटे थे?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी एक युवा राजनेता हैं और वह उत्तराखण्ड को नजदीक से पहचानते हैं इसलिए उन्होंने जबसे सत्ता संभाली है तबसे उन्होंने एक ही संकल्प ले रखा है कि वह अपने कार्यकाल मंे द्वेष भावना के साथ काम नहीं करेंगेे और न ही मीडिया की लेखनी को गुलाम बनाने के लिए वह उन्हें अपनी पॉवर का डर दिखायेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चला रहे हैं और हैरानी वाली बात है कि उनके अब तक के कार्यकाल में किसी भी जनपद में यह आवाज सुनने को नहीं मिली कि कोई अफसर बेलगाम होकर आवाम को अपनी पॉवर का खौफ दिखा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी बच्चों के बीच बच्चा बनकर उनसे जिस तरह से गले मिलते हैं तो कभी बच्चों को जूते पहनाते हुए उनके तस्में बांधते हैं तो कभी बच्चों को प्यार से अपने पास बुलाकर वह उनके गले में फूलों की माला डालकर उन्हें खूब दुलार देते हैं तो उस दृश्य को देखकर हर कोई मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के इस सौम्य रूप को देखकर उनका कायल होता जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी बच्चों से लेकर बडे-बूढों का दिल जीतने में अव्वल आ चुके हैं उसे देखकर उत्तराखण्ड के अन्दर अब हर तरफ एक ही आवाज सुनने को मिल रही है कि ऐसा मुख्यमंत्री कहां मिलेगा…।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड बनने के बाद से देखने में आता रहा कि अदने से अदना राजनेता भी अपने आपको सीएम से कम नहीं समझता था और राज्य के अधिकांश एक्स सीएम आवाम का दिल जीतने और उत्तराखण्ड को बदलने की दिशा में कभी आगे नहीं बढ पाये? अहंकार और बदले की भावना के धमंड में उडते हुए चंद एक्स सीएम कुछ मीडियाकर्मियांे को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने में अपने आपको पॉवरफुल राजनेता दिखाने का खेल खेलते रहे? चंद एक्स सीएम और उनकी चौखट पर गुलामी की परिक्रमा करने वाले कुछ अफसरों के कारण आवाम को डराने का जो प्रपंच रचा था उसकी गूंज हमेशा सरकारों के दिल्ली मंे बैठे आला कमानों तक पहुंचती थी और उसी के चलते उत्तराखण्ड के अन्दर हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी तो उन्होंने आवाम का दिल जीतने का जो करिश्मा दिखाया था उसी के चलते भाजपा दुबारा सत्ता पर आसीन हुई थी। मुख्यमंत्री ने चार साल में एक जनसेवक बनकर सत्ता चलाने का जो पैमाना तय किया उसी के चलते आज मुख्यमंत्री को राजनीति का चाणक्य माना जा रहा है और आवाम से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी की भी चाहत है कि युवा मुख्यमंत्री को लगभग दस से पन्द्रह साल राज्य का मुख्यमंत्री रखा जाये जिससे वह उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बना दें।

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