बिहार के जख्मों के बीच गोदियाल दहाडे़

0
94

गोदियाल-प्रीतम व हरक का पार्टी मुख्यालय में वैलकम
देहरादून। बिहार चुनाव में महागठबंधन को मिली हार के बाद उत्तराखण्ड में कांग्रेस ने 2027 का रण जीतने के लिए जीत की चौसर बिछाई है। कांग्रेस के तेज तर्रार नेता गणेश को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है तो वहीं प्रीतम और हरक को भी चुनावी संग्राम जीतने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने बडा दांव चला है। बिहार के जख्मो के बीच जब गणेश, और हरक जौलीग्रांट हवाई अड्डे पहुंचे तो वहां उनका भव्य स्वागत हुआ और वहीं से ही गोदियाल ने दहाड़ लगाई है कि भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के सारे राज वह अब राज्य की जनता के सामने बेनकाब करने के लिए आगे आयेंगे। गोदियाल ने यहां तक दहाड लगाई कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने के लिए राज्य की जनता तैयार है और अब मजबूती के साथ कांग्रेस एक साथ खडी होकर उत्तराखण्ड से भाजपा को उखाड फेंकने का संकल्प ले चुकी है।
कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का विधिवत राजतिलक आज राजधानी देहरादून के कांग्रेस भवन में हुआ। समारोह की तैयारियों को लेकर कांग्रेसियों में एक बडा उत्साह देखने को मिला और चप्पे-चप्पे पर कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता अपने तीन बडे राजनेताओं का स्वागत करने के लिए सडकों पर सुबह से ही उमडे हुये थे और पार्टी के हर खास नेता की समारोह में शिरकत देख भाजपा के दिग्गज राजनेता भी जरूर आज बेचैन हो गये होंगे। वैसे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर गोदियाल की ताजपोशी से अनेक संदेश एक साथ गए हैं। गढ़वाल और कुमाऊं के बीच संतुलन का प्रयास भी किया गया है। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर करन महरा थे तो साथ में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता प्रतिपक्ष भी कुमाऊं से ही थे। गढ़वाल उस लिहाज से हाशिए पर था। करन महरा अल्मोड़ा जिले से हैं तो यशपाल आर्य को समूचे कुमाऊं में कांग्रेस का सर्वमान्य दलित चेहरा भी गिना जाता है जबकि भुवन कापड़ी उधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट से विधायक हैं। उनकी सबसे बड़ी योग्यता यह है कि वे मुख्यमंत्री को पराजित कर विधानसभा पहुंचे थे। 2025 में परिस्थितियां क्या होंगी, इस बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी लेकिन गोदियाल की नियुक्ति के ठीक बाद उधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ से जो विरोध के स्वर उभरे हैं, वह शानदार भोज में कंकड़ की तरह कांग्रेस को चुभ सकते हैं?
उधमसिंह नगर में जिलाध्यक्ष पद पर हिमांशु गाबा की नियुक्ति ने एकाएक सियासी पारा बढ़ा दिया। कांग्रेस के बड़े नेता तिलकराज बेहड ने सीधे न सही संकेत में ही अपनी नाराजगी भरी प्रतिक्रिया दी तो उनके बेटे सौरभ बेहड़ ने एक दर्जन पार्षदों के साथ कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर एक तरह से हलचल मचा दी है? उनकी नाराजगी गोदियाल से नहीं बल्कि हिमांशु गाबा की नियुक्ति से है। उनका कहना है कि जब संगठन सृजन के दौरान रायशुमारी की गई तो हिमांशु गाबा कांग्रेसजनों की पसंद ही नहीं थे। दरअसल हिमांशु गाबा को नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का करीबी गिना जाता है। बेहड़ खेमे की नाराजगी का कारण भी यही है। विद्रोह की खबर फैलते ही हरदा ने मोर्चा संभाला और तुरंत तिलकराज बेहड़ से मिलने पहुंचे और गुफ्तगू की। उधर, पिथौरागढ़ में मुकेश पंत की ताजपोशी पर भी नाराजगी से स्वर उभरे हैं। हालांकि वहां उधमसिंह नगर की तरह विद्रोह तो नहीं हुआ किंतु मयूख महर की नाराजगी छन छन कर कांग्रेस में व्यक्त की जा रही है। मुकेश पंत ने हालांकि नियुक्ति के बाद खुद महर से मुलाकात कर स्थिति सामान्य बनाने की कोशिश की लेकिन राख में दबी चिंगारी खत्म हो गई हो, इसकी गारंटी फिलहाल तो नहीं मिलती।
आपको याद होगा पिछले दिनों कांग्रेस ने संगठन सृजन के नाम से पूरे देश में अभियान चलाया था और हर जिले में रायशुमारी कर अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष नियुक्त हुए। रुद्रपुर में इसी संगठन सृजन अभियान के दौरान लात घूंसे चले थे, कुछ लोगों के कपड़े फटे। तिलकराज बेहड़ ने उसी बात को इंगित किया कि हमलावर लोगों को ही तरजीह मिली और कुछ बड़े नेताओं ने उन्हें शह दी। उनका इशारा साफ समझा जा सकता है। अन्य जिलों में भी रायशुमारी के दौरान गुटीय नेताओं ने अपने अपने मत व्यक्त जरूर किए लेकिन रुद्रपुर जैसा प्रकरण कहीं और दिखा नहीं। अलबत्ता संगठन में जगह न मिलने से जिलों में वंचित लोगों में असंतोष होना स्वाभाविक है किंतु यह असंतोष कदाचित मुखरित नहीं हुआ और प्रदेश अध्यक्ष पद पर गणेश गोदियाल की नियुक्ति के बाद उन सभी को संतुष्ट देखा जा सकता है। गोदियाल कांग्रेस के सबसे संभ्रांत चेहरा हैं, इसमें दो राय नहीं हैं।
बता दें कि उत्तराखंड में कांग्रेस के शीर्ष पुरुष हरीश रावत ने पिछले दिनों अपनी राय वक्त करते हुए कहा था कि वे चाहते हैं कि ब्राह्मणों को संगठन में जगह दी जानी चाहिए। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने नियुक्तियां भी की। हरदा ने अगस्त माह में जब देहरादून जिले के जिला पंचायत सदस्यों का अभिनंदन समारोह हुआ तो उसमें प्रीतम सिंह को नेतृत्व देने की पैरवी की थी, फिर अचानक क्या हुआ कि हरदा का ब्राह्मण प्रेम जागा और प्रदेश अध्यक्ष पद पर गणेश गोदियाल की नियुक्ति हो गई और प्रीतम सिंह को चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी दी गयी। राजनीति की इस तरह की बारीकियां समझना आसान नहीं होता और दूसरे जो कुछ प्रकट रूप से कहा जाता है, उसके पीछे सचमुच वही मंशा भी हो, यह जरूरी नहीं होता। सच तो यह है कि उसके पीछे दूर का गणित होता है।
उधर कांग्रेस ने संगठन सृजन की इस कवायद में प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत दोनों का मान रखने की कोशिश की गई है। दोनों नेताओं को 2027 के चुनाव के मद्देनजर जिम्मेदारी दी गई है। प्रीतम को कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी दी गई तो हरक सिंह रावत को चुनाव अभियान का दायित्व देकर चेहरा बनाया गया है, यह अलग बात है कि जब चुनाव आता है तो इस तरह की कमेटियां केवल कागज तक रह जाती हैं जबकि निर्णय कोई और लेता है। यह अलग बात है कि हाईकमान की नजर में ये चेहरे महत्व जरूर रखते हैं। इस लिहाज से प्रीतम और हरक को संतुष्ट रखना कई संकेत देता है। एक संदेश तो यह है कि हरक सिंह रावत को टॉप कमेटी का इंचार्ज बनाने से शायद शीर्ष पुरुष के साथ संबंधों में जमी बर्फ पिघल गई है और प्रीतम की जो पैरवी की गई थी, उसकी पूरी न सही आधी भरपाई तो हो गई। हालांकि सुबह जब गणेश गोदियाल और कांग्रेसी नेता हरक सिंह रावत जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचे तो वहां उनके स्वागत के लिए कांग्रेसियों का हुजूम उमडा हुआ था और वह जिस जोश के साथ अपने राजनेताओं का स्वागत कर रहे थे उसे देखकर साफ झलक रहा था कि कांग्रेस अब 2027 का रण जीतने के लिए आगे आ गई है?

LEAVE A REPLY