हुआ वही ढाक के तीन पात ना धामी जाएंगे न सरकार

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखंड की धामी सरकार को फिर विचलित करने के लिए कुछ सत्ता पिसाचों ने राजनीतिक गलियारों में शोर करना शुरू कर दिया था कि धामी सरकार की विदाई तय हो गयी है पूरे मंत्रिमंडल सहित मुख्यसेवक की भी सेवाएं समाप्त हो रही हैं लेकिन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही राज्य के रजत जयंती महोत्सव में आशीर्वाद देने पहुँचे और मुख्यसेवक पुष्कर सिंह धामी की जमकर तारीफ करते हुए संदेश दे गए कि 2027 का चुनाव धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। अभी तक 25 वर्ष के राज्य जीवनकाल में सबसे लम्बा नेतृत्व संभालने का रिकॉर्ड बनाने वाले धामी को हटाए जाने का शोर करने वालों पर कोई मजबूत आधार नही है कि धामी की कार्यशैली राज्य हित में नही है। यह साबित भी नही कर पा रहे हैं। स्वयं पंद्रह वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री का कार्यकाल निभाने वाले प्रधानमंत्री मोदी यह सब विरोधी चालों को झेल चुके हैं। वो जानते है सत्तासीन नेतृत्व को किस प्रकार विरोधी गतिविधियों से विचलित किया जाता है। हमेशा मुख्यमंत्री धामी को अपने अनुज समान स्नेह करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य की जनता के सामने जता जातें है कि धामी उनको कितने प्रिय हैं। फिर भी दिल्ली में बैठें राज्य के कुछ नेता बार बार सत्ता के कुएं में कंकर फेंककर केवल उठती लहरों से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन चंद दिन में ही शांत हो जाती लहरों से दो चार महीने फिर चुप हो जाते।
जब जब राज्य में कोई आपदा या हादसा हुआ तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धरातल पर जाकर मोर्चा संभाला है। सिलक्यारा टनल हादसा हो,थराली आपदा हो, हरिद्वार मनसादेवी भगदड़ हो या उधमसिंह नगर में अतिवृष्टि से आहत तराई का किसान परेशान हो हमेशा मुख्यमंत्री धामी ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालातों को संभाला है।
पेपरलीक मामले का षड्यंत्र भी प्रदेश ने देख लिया है कि किस प्रकार धामी सरकार को हलकान करने के लिए ही यह खेल रचा गया। उसमे भी मुख्यमंत्री धामी ने धरना स्थल पर ही पहुंचकर छात्रों की मांगों को मान लिया। उसमें भी विरोधियों की टाय टाय फीस हो गयी थी। राजनीतिक जानकारों का तो यह तक कहना है कि विधानसभा सत्र में पहाड़-मैदान का मामला जो गरमाया गया वह भी सत्ता पक्ष के आपसी उठापटक से ही जोड़कर देखा जा रहा है। अपनी कम उम्र और जीरो अनुभव के बावजूद भी राज्य का सबसे लंबे कार्यकाल के मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड बनाना भी काबिले तारीफ है। जिसको धामी विरोधी हजम नही कर पा रहे हैं। इसलिए हर दो चार माह में धामी विदाई का जिन्न बाहर निकाला जाता है। उत्तराखंड के ही दिल्ली वालों की कठपुतली बने कुछ कलमकार भी इसमें शामिल हो जाते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आरएसएस के सभी एजेंडों को अपने सरकार में शामिल कर धरातल पर उनको स्थापित किया है जिसकारण आरएसएस के भी नेताओं के प्रिय बने हुए है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
अभी तक ऐसा कोई चेहरा भी भाजपा के पास नही है जो सरकार संचालन में केंद्र की नजरों का तारा बन सका हो। जिन नामों को उछाला जाता है उनके साथ बहुत सारे ऐसे मिथक जुड़ें है जो 2027 के चुनाव में जाने पर भाजपा को नुकसान पहुँचते दिखते हैं। राज्य का सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरा स्थापित होने की कामयाबी अर्जित कर धामी को जबरन हलकान करने की साजिश बार बार नाकाम ही होनी है।

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