दिल जीतने में माहिर हैं पुष्कर
उत्तराखण्ड से लेकर विदेशों में दिखाया ‘फ्लावर रूप’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने जिस अंदाज से सरकार चलाने का हुनर दिखा रखा है उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा कि अगर यह मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को वर्षों पूर्व मिल गये होते तो आज उत्तराखण्ड की तस्वीर ही बदली होती। अब राज्य की जनता से लेकर देश के कई राज्यों के लोग यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि उत्तराखण्ड का सीएम अनोखा है जो दिल जीतने में माहिर हो चुका है और उत्तराखण्ड से लेकर विदेशों में उनके फलावर रूप के सब कायल हो गये हैं। मुख्यमंत्री ने फलावर और फायर दोनो रूप धारण किये हुये हैं जो राज्य की जनता को सुकून दे रहे हैं।
उत्तराखण्ड को नौ पूर्व मुख्यमंत्री मिले लेकिन किसी ने भी आवाम का दिल जीतने की कतार में अपने आपको खडा नहीं किया जिसके चलते सभी पूर्व मुख्यमंत्री आवाम को तब तक याद रहे जब तक वह सत्ता संभाले थे? तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल अल्प कार्यकाल था लेकिन छह पूर्व मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल लम्बा देखने को मिला और उन्होंने आवाम से जो दूरी बनाकर रखी वह किसी से छिपी भी नहीं थी जिसके चलते उत्तराखण्डवासियांे के मन में हमेशा एक दर्द देखने को मिलता था कि उनके छोटे से राज्य में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने आपको राज्य का सर्वश्रेष्ठ माना और आवाम के बीच उनके दर्द सुनने की दिशा में उन्होने हमेशा अपने कदम पीछे ही रखे थे जिसके चलते उत्तराखण्ड के अन्दर वो राजनीतिक बहार देखने को नहीं मिली थी जिसके लिए राज्यवासियों ने अलग राज्य के अपनी लडाई लडी थी? वहीं युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी को जब मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली तो वह राजनीति में इतनी लम्बी लकीर खींचकर आगे बढे कि आज उत्तराखण्ड से लेकर विदेशों में मुख्यमंत्री के फ्लावर रूप से आवाम और उद्यमी उन्हें धाकड मुख्यमंत्री का खिताब देने से पीछे नहीं हट रहे हैं। मुख्यमंत्री बच्चों से लेकर बडों तक का दिल जीतने में माहिर राजनेता बन गये और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री की प्रसिद्धि का ग्राफ इतना ऊफान पर है कि उसकी कल्पना करना भी मुश्किल होगा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री जिस तरह से किसी भी राज्य मंे सुबह की सैर के लिए अकेले निकलते हैं और वह रास्ते में मिलने वाले युवाओं और लोगों से दिल खोलकर मुलाकात करते हैं उसके चलते हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही है कि उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री अनोखा है जो आवाम के बीच जाकर उनके जैसा बनकर उनके दिलों में प्रवेश कर जाता है।
उत्ततराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अल्प कार्यकाल में आवाम के दिलों में जो जगह बनाई है वह मोदी कैबिनेट को भी खूब रास आ रहा है। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री का चेहरा आवाम के लिए जहां फ्लावर दिखाई दे रहा है वहीं अपराधियों, घोटालेबाजों, माफियाओं के बीच मुख्यमंत्री का इकबाल फायर राजनेता के रूप में दिखाई दे रहा है। सबसे अह्म बात यह है कि जबसे मुख्यमंत्री ने सत्ता की कमान अपने हाथों में ली है तबसे उन पर भ्रष्टाचार और घोटाले का एक भी दाग नहीं लग पाया है और वह भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ जिस आक्रामकता से उन पर नकेल लगा रहे हैं वह राज्यवासियों को खूब रास आ रहा है और उन्हें यह आभास हो रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के अन्दर बाइस सालों से चली आ रही पुरानी फिल्म की रील को धोकर उसमें नई रील का अक्स बना रहे हैं।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड बनने के बाद सबसे पहले मुख्यमंत्री की कमान स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी को मिली थी और वह अपने कार्यकाल में आवाम का दिल जीतने के मिशन में कोई करिश्मा नहीं कर पाये थे। हालांकि उनका अल्प कार्यकाल ही आवाम के बीच में रहा। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी राज्य के मुख्यमंत्री बने लेकिन उन्होंने भी मुख्यमंत्री रहते हुए आंदोलनकारियों के उस सपने को साकार नहीं किया जिसकी आशा उनसे नजर आई थी? हालांकि भगतसिंह कोश्यारी का कार्यकाल भी अल्प कार्यकाल ही था और उन्हें अगर लम्बा समय मिला होता तो उनसे राज्यवासियों को जरूर राज्य को आगे ले जाने की एक नई आशा दिखाई देती? वहीं राज्य की कमान जब राजनीति के महापंडित माने जाने वाले स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी को मिली थी तो उन्होंने राज्यहित में काम तो काफी किया लेकिन वह पांच सालों में आवाम के दिलों में ऐसा कोई जादू नहीं कर पाये जिससे आवाम उन्हें उत्तराखण्ड की राजनीति का सुपर स्टार मानती? इसके बाद हरिद्वार से मौजूदा सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक से राज्यवासियों को काफी उम्मीद थी कि वह उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में काम करेंगे लेकिन उन पर आरोपों का जो दाग लगा वह किसी से छिपा नहीं रहा तो वहीं कडक मिजाज के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने स्वच्छता से सरकार चलाने के लिए तो अपने कदम आगे बढाये लेकिन आवाम के बीच वह उतनी प्रसिद्धि नहीं ले पाये जिसकी उनसे उम्मीद थी। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरीश रावत और त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कार्यकाल विवादों के बीच में ही तैरता रहा और उस कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का शोर आवाम को खूब दर्द देता था? वहीं पौडी से सांसद तीरथ सिंह रावत को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया तो वह सत्ता चलाने में सफलता की सीढी नहीं चढ पाये और अल्प कार्यकाल में ही उन्हे ंमुख्यमंत्री पद से आजाद कर पुष्कर ंिसह धामी को सत्ता मिल गई थी और उसी के बाद से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के सबसे अनोखे सीएम देखने को मिल गये जो बच्चों से लेकर बडों के बीच जाकर उनका दिल जीतने में माहरत हासिल कर चुके हैं।

