प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में उत्तराखण्ड की लडाई लडने वाले आंदोलनकारियों के दिलों में बसने का जो हुनर दिखाया है उसके चलते आज वह सभी आंदोलनकारी और शहीद आंदोलनकारियों के परिजन मुख्यमंत्री की सोच के कायल हो रखे हैं जो आंदोलनकारियों के हितों को पंख लगाने केे लिए पिछले चार साल से आगे बढ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बडे-बडे समारोह में आंदोलनकारियों और शहीद सैनिकों के परिजनों को सम्मान देने का सिलसिला शुरू कर रखा है उससे वह उत्तराखण्ड के जननायक बन गये हैं और आंदोलनकारियों के दिलों में वह इस कदर बस चुके हैं कि वह अपनी हर पीडा को मुख्यमंत्री से सीधे बताने के लिए आगे बढ़ निकलते हैं।
उत्तर प्रदेश से अलग होने की चाहत रखने वालों ने अपना उत्तराखण्ड बनाने के लिए सडकों पर आंदोलन की जो मशाल जलाई थी उस मशाल को थामें हजारों आंदोलनकारियों ने आखिरकार एक बडी लडाई लडने के बाद उत्तराखण्ड पा लिया था और उसके बाद पूर्व सरकारों ने उनके सपने पूरे न होने पर आंदोलनकारी हमेशा आंदोलन की एक राह पर चलते हुए दिखाई दिये जिसके चलते हमेशा यह बहस चलती रही कि आखिरकार आंदोलनकारियों की मांगे कब विराम लेंगी और शहीद आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखण्ड बन पायेगा? उत्तराखण्ड की कमान जब युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई तो उन्होंने अपने कार्यकाल में शालीनता के साथ आंदोलनकारियों को गले से लगाना शुरू किया और उन्हें बडे-बडे कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने सम्मानित करने का जो सिलसिला शुरू किया उससे आंदोलनकारियों के मन में आशा की किरण जाग गई थी कि अब आंदोलनकारियों की मांगों पर मुख्यमंत्री हरी झंडी देंगे और शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड बना देंगे। मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण देकर उनका दिल जीता है उससे लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को बहुत फायदा मिलेगा ऐसी सम्भावना भाजपा नेताओं को दिखाई दे रही है।
उत्तराखण्ड को एक बडे आंदोलन करके बनाने वाले आंदोलनकारियों के मन में बाइस सालों से यही पीडा चली आ रही थी कि जिस उद्देश्य से उत्तराखण्ड का निर्माण किया गया था वह पूरा नहीं हो पाया और आज भी आंदोलनकारियों को अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन की राह पकडनी पड रही है। आंदोलनकारियों के मन में इस बात को लेकर भी पीडा हमेशा देखने को मिलती रही कि राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री उनके बलिदान को नजरअंदाज करते रहे लेकिन उत्तराखण्ड में जैसे ही पुष्कर राज शुरू हुआ तो आंदोलनकारियों को इस बात की खुशी होने लगी कि क्या ऐसा भी कोई मुख्यमंत्री हो सकता है कि जो आंदोलनकारियों के दर्द को समझकर उनके साथ बैठकर उनकी समस्याओं का हल करने के लिए एकाएक आगे आ गया हो। पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालने के बाद से ही राज्य के अन्दर जिस तरह से आवाम को एक बडी राहत देने के मिशन में अपने कदम आगे बढाये उससे उत्तराखण्ड के अन्दर पुष्कर सिंह धामी को राजनीति का महानायक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड का निर्माण करने वाले आंदोलनकारियों को सरकारी समारोह में हमेशा सम्मान देने का जो पैमाना तय किया है उसको देखकर आंदोलनकारियों के मन में भी पुष्कर सरकार को लेकर एक बडा विश्वास दिखाई दे रहा है कि उन्होंने आंदोलनकारियों के आंदोलन के दर्द को समझते हुए उनकी मांगों पर अपनी मुहर लगानी शुरू की है वह उत्तराखण्ड के लिए शुभ संकेत माने जा रहे हैं। आंदोलनकारियों और शहीद सैनिकों के परिजनों के साथ मुख्यमंत्री कंधे से कंधा मिलाकर खडे हुए दिखाई दे रहे हैं और उसी का परिणाम है कि आज राज्य में आंदोलनकारियों और शहीद सैनिकोंं के परिजनों के मन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रति एक बडा विश्वास पैदा हुआ है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का साफ कहना है कि जिन आंदोलनकारियों ने उत्तराखण्ड बनाने में अपना योगदान दिया है उन्हें सरकार हमेशा पहले पायदान पर खडा रखेगी और जिन शहीदों ने देश की खातिर अपने प्राणों का बलिदान दिया है उन शहीद वीरों के परिजनों के साथ उनकी सरकार हमेशा खडी रहेगी। उत्तराखण्ड की रजत जयंती पर मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने आंदोलनकारियों की पेंशन बढाकर उन्हें एक बार फिर बडा सम्मान दिया है जिससे आंदोलनकारियों के मन में यह आशा बंध चुकी है कि मुख्यमंत्री उनके हितों की रक्षा करने के लिए हमेशा उनके साथ खडे हैं।

