उत्तराखण्ड में राष्ट्रपति और बेखौफ भ्रष्टाचारी
विजिलेंस ने दबोच लिया भ्रष्टाचार का शैतान
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड को 2025 तक भ्रष्टाचार को मुक्त बनाने का सपना, सपना ही रह जायेगा क्योंकि जब राष्ट्रपति के उत्तराखण्ड दौरे के दौरान भी अगर भ्रष्टाचारी रिश्वत लेने से बाज नहीें आ रहे हैं तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनमें न तो सरकार का कोई भय है और न ही सिस्टम का? महिला अधिकारी से रिश्वत का खेल सिर्फ इसलिए खेला गया क्योंकि उसकी नियुक्ति उसी स्थान पर बनी रहे और जब महिला अधिकारी ने इस भ्रष्टाचारी अफसर को बेनकाब करने का मन बनाया तो विजिलेंस ने भी इस भ्रष्ट मेडिकल अफसर को हजारों रूपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचारियों का साम्राज्य खत्म करने का जो संकल्प लिया गया था वह संकल्प पूरा होता तो दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि 2025 खत्म होने में मात्र दो माह बचे हैं और ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार आज भी अपनी चरम सीमा पर है और इस भ्रष्टाचार की जडें लगता है कि इतनी विशाल हो चुकी हैं कि उसे भेद पाना एक बहुत बडी चुनौती बन गया है? अब उत्तराखण्ड के अन्दर एक ही बहस चलने लगी है कि आखिरकार उत्तराखण्ड कब भ्रष्टाचारमुक्त हो पायेगा क्योंकि जब उत्तराखण्ड के अन्दर देश की राष्ट्रपति मौजूद हैं तो उस दौर मे भी अगर एक महकमे का भ्रष्ट अफसर महकमे की ही महिला अधिकारी से सरेआम रिश्वत लेने का तांडव करने से नहीं चूका तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार का काला साया कितना विशाल हो चुका है?
उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त बनाने का बडा संकल्प मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया हुआ है और 2025 तक उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त करने का जो वचन उन्हांेने राज्य की जनता को दिया हुआ है उसको लेकर यह उम्मीद एक लम्बे अर्से से बंधी हुई थी कि भ्रष्टाचारियों की नाक में नकेल डालकर उन्हें इस बात से रूबरू कराया जायेगा कि अब उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार का खेल खेलने वाले सलाखों के पीछे ही हांेगे। उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लम्बे अर्से से एक बडा ऑपरेशन चलाया जा रहा है और भ्रष्टाचार की छोटी-छोटी मछलियां विजिलेंस के बिछाये जाल मे फंसती जा रही हैं। विजिलेंस ने भ्रष्टाचारियों को दबोचने के लिए राज्यभर में ऑपरेशन चला रखा है और भ्रष्ट तंत्र पर उनकी रडार लगी हुई है लेकिन उनके इस ऑपरेशन में सिर्फ छोटे कर्मचारी और अधिकारी ही आज तक फंसते हुए नजर आये हैं जिससे हमेशा यह बहस चलती रही है कि आखिरकार भ्रष्टाचार के बडे मगरमच्छ कब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे। उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त देखने राज्यवासियों की पहली तमन्ना है लेकिन उनकी तमन्ना कब पूरी होगी यह तो अभी भविष्य के गर्त मे कैद है लेकिन जिस तरह से अकसर कई महकमों के छोटे-छोटे कर्मचारी भ्रष्टाचार करने के दौरान सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं उससे आवाम के मन में एक ही सवाल खडा हो रहा है कि आखिरकार उत्तराखण्ड भ्रष्टाचार मुक्त होने की दिशा में कब आगे निकलता हुआ दिखाई देगा?
हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड सरकार नौ नवम्बर को अपनी रजत जयंती मनाने के लिए तैयारियों में जुटी हुई है तो वहीं राष्ट्रपति आज विधानसभा में अपना सम्बोधन मे दे रही थी तो ऐसी उम्मीद दिख रही थी अब राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार का काला साम्राज्य खत्म हो जायेगा लेकिन हैरानी वाली बात है कि विजिलेंस की टीम ने कुमांऊ मेडिकल अफसर आशुतोष त्रिपाठी को बीस हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस के अफसर का कहना है कि मेडिकल अफसर आशुतोष त्रिपाठी ने सीएचसी नैनीडांडा को अदाली खाल पीएचसी पर नियुक्त नर्सिंग अधिकारी नीतू से उसकी नियुक्ति वहीं पर बनाये रखने के एवज में बीस हजार रूपये की रिश्वत मांगी थी और विजिलेंस की टीम ने उसे रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। हैरानी वाली बात है कि जब महकमे का अफसर ही अपने महकमे के कर्मचारी से रिश्वत मांगने से पीछे नहीं हट रहा तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार का तांडव किस तरह से आम जनमानस के लिए घातक बना हुआ है। सवाल उठता है कि जब राज्य के कुछ महकमों में तैनात छोटे अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेने का खेल बडे नाटकीय ढंग से खेल रहे हैं तो उससे साफ झलक जाता है कि उनके मन में सरकार और सिस्टम का कोई डर नहीं है जिसके चलते वह रिश्वत कहीं पर भी लेने से बाज नहीं आ रहे हैं? उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस चल उठी है कि आखिरकार 2025 तक उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त करने का जो संकल्प लिया गया था वह सिर्फ हवाबाजी में ही पूरा होता हुआ दिखाई दे रहा है?

