माफियाओं के साम्राज्य पर सीएम का खतरनाक वार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने पदभार संभालते ही अपने दो रूप आवाम और माफियाओं के सामने रख दिये थे। आवाम के लिए मुख्यमंत्री फलावर बने तो वहीं भूमाफियाओं और अपराधियों के लिए वह फायर बने हुये हैं। फायर रूप में दिखाई दे रहे मुख्यमंत्री ने भूमाफियाओं के किले में जिस अंदाज में आग लगा रखी है उससे माफियाओं का साम्राज्य ध्वस्त होता हुआ नजर आ रहा है। अब राज्य के अन्दर भूमाफियागिरी करने वालों को इस बात का इल्म है कि अगर उन्होंने राज्य के अन्दर प्राइवेट या सरकारी जमीनों को कब्जाने का दुसाहस किया तो मुख्यमंत्री के खतरनाक वार से वह बच नहीं पायेंगे। गढवाल व कुमांऊ रेंज में भूमाफियाओं पर नकेल लगाने के लिए एसआईटी का गठन है और यह एसआईटी जमीनों के फर्जीवाडे के खेलों को नेस्तनाबूत करने के लिए आगे बढी हुई है। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि उत्तराखण्ड में अगर किसी ने भी भूमाफियागिरी करने का दुसाहस किया तो उसे इसका बडा अंजाम भुगतना पडेगा।
उत्तराखण्ड मंे हर सरकार के कार्यकाल में भूमाफियाओं ने आम जनमानस की खाली पडी जमीनों और सरकारी जमीनों पर कब्जे करके सरकारों को ही चुनौती दे रखी थी कि वह सरकार से बडे हैं। पूर्व सरकारों ने भूमाफियाओं की नाक में नकेल डालने के लिए कोई पहल नहीं की थी जिसके चलते भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद होते हुए चले गये थे कि वह जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन पर कब्जा करने के खेल में इतने माहिर हो गये थे कि सिस्टम के लोग भी ऐसे माफियाओं पर नकेल लगाने में सफल नहीं हो पा रहे थे। उत्तराखण्ड की कमान जब युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मिली थी तो उन्होंने भूमाफियाओं की नाक में नकेल डालने के लिए बडी दहाड लगाई थी और साफ अल्टीमेटम दिया था कि अगर किसी ने भी प्राईवेट और सरकारी जमीने कब्जाने का दुसाहस किया तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अंजाम में लाई जायेगी। मुख्यमंत्री ने भूमाफियाओं को जो अल्टीमेटम दिया था उस पर उन्होंने आगे आकर बडा वार शुरू किया और उनके इस वार को देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि आवाम के लिए जहां मुख्यमंत्री फलावर हैं तो वहीं भूमाफियाओं और अपराधियों के लिए वह फायर हैं। अपने कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने बडे-बडे माफियाओं को धूल चटा दी और उन्हें यह दो टूक संदेश दे दिया कि अगर राज्य में किसी ने भी भूमाफियागिरी करने का सपना भी देखा तो उसे इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा।
बता दें कि राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड में मुख्यमंत्री आते गए व जाते गए लेकिन असल में मुख्यमंत्री की कुर्सी व उस कुर्सी की गरिमा किसी ने बनाई रखी तो वो नाम है पुष्कर सिंह धामी। ऐसा हम नहीं कहते हैं बल्कि राज्य के हर गलियारों व कोनों से यह पुकार आ रही है कि पुष्कर ने कर दिया कमाल। कुछ वर्ष पूर्व हुए जमीन रजिस्ट्री फर्जीवाड़ा की बात करें को कई सालों से जमीन कब्जाने का कार्य कर रहे गैंग के बारे में बेदाग मुख्यमंत्री धामी को पता चला तो तुरंत ही पुलिस महकमे को एसआईटी गठन कर आरोपियों की आदेश दे दिए गए। एक-एक कर इस बडे घोटाले की परतें खुलती गयी जांच होती गयी आरोपियों की गिरफ्तारी होती गयी लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब इस प्रकरण में शहर के नामी वकील व कई ब्यूरोक्रेट्स के खासमखास कहे जाने वाले मित्र कमल विरमानी का नाम सामने आया था। उस वक्त उत्तराखंड की जनता को लगा कि अब जांच ठंडे बस्ते में चली जाएगी क्योंकि पूर्व की सरकारों में भी देखा गया कि ऐसे मामलों से सरकारों कैसे बड़ी मछलियों को बचाया गया? पर बात करें इस बार की चुनी धामी सरकार की तो पहले की तरह हालात समान न थे, अधिवक्ता कमल विरमानी का नाम जांच में आते ही मुख्यमंत्री धामी ने बड़ा फैसला करते हुए तुंरत विरमानी के गिरफ्तारी के आदेश देकर उन्हंे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था । काफी सफेदपोश और कुछ अफसरों के करीबी माने जाने वाले अधिवक्ता कमल विरमानी की गिरफ्तारी से उत्तराखण्ड के अन्दर एक बडी हलचल मच गई थी और लैंड माफियाओं को अब आभास हो गया है कि उनके किले मंे फायर कर किस तरह से मुख्यमंत्री ने उसमें आग लगा दी है?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लम्बे अर्से से भूमाफियाओं के खिलाफ आक्रामक नजर आ रहे हैं और उन्होंने प्रशासन और पुलिस अफसरों को साफ संदेश दे रखा है कि अगर किसी ने भी जमीनों पर कब्जा करने का दुसाहस किया तो उसे किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। आज राज्य के अन्दर भूमाफियाओं के मन में मुख्यमंत्री की फायर कार्यशैली ने खलबली मचा रखी है और आम जनमानस यह जान चुका है कि अगर किसी भी भूमाफिया ने उनकी जमीन पर कब्जा करने का ख्वाब भी देखा तो उन्हें इसका बडा परिणाम भुगतना पडेगा। आज राज्य के अन्दर भूमाफियाओं के मन में मुख्यमंत्री की फायर शैली से एक बडी दहशत बनी हुई है।

