उत्तरकाशी(चिरंजीव सेमवाल)। दीपावली का पर्व एक ओर जहां पूरे देश- प्रदेश में भारी उत्साह के साथ मनाया गया वहीं उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित धराली में सन्नाटा पसरा रहा। पूरे गांव के लोगों ने दीपावली नहीं मनाया। धराली आपदा में अपनों और अपना सब कुछ खो चुके लोगों में गम साफ दिखाई दे रहा है। कभी धराली दीपावली पर्व पर गंगा की कल- कल धारा , सघन सेब के बागवानों और देवदार वृक्षों के बीच रात को ऐसी चमकती जैसे मानों आसमान में तारे चमक रहे हैं, लेकिन इस दीपावली के दौरान धराली में सन्नाटा छाया रहा है।
पांच अगस्त को खीरगंगा में आये जनसैलाब ने हंसते खेलते धराली को महज 34 सेंकड में धराशाई कर दिया। यह लोगों के घर, होमस्टे , बहु मंजिलें होटल ,रेस्टोरेंट तबाह हो गये। धराली आपदा में करोड़ के होटल, होम स्टे, घर, बागवान खो चुके लोगों को अब अपना रोजी-रोटी शुरू करने का भैय सता रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल जिन लोगों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए थे, उन्हें पुनर्वास और पुनस्र्थापन के लिए सहायता के रूप में पांच लाख दिये। इसके अलावा, आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों को भी घ्5 लाख का मुआवजा दिया गया है। आपदा पीडि़तों के लिए आर्थिक मदद के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप धराली में 98 परिवारों को राहत राशि के चेक वितरित किए। इस मौके पर आपदा प्रभावितों ने सहायता राशि त्वरित मिलने पर धामी सरकार का धन्यवाद भी दिया था।
जिनमें बड़े होटल व्यवसाई संजय पंवार, जयभगवान पंवार, दुर्गेश्वर पंवार,सचेन्द्र पंवार, कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राकेश पंवार, भूपेंद्र पंवार आदि कहीं लोगों की पूरे जीवन की कमाई और आजीविका के साधन पल भर में नष्ट हुई हो गई। वहीं मृतकों में मुकेश और उनकी धर्मपत्नी व बच्चे सहित धनेन्द्र पंवार,गौरव पंवार (गोली),शुभम पंवार, सुमित नेगी आदि ने इस आपदा में ‘काल के गालÓ लोगों की स्मृति में ग्रामीणों ने कैंडील जलाकर श्रद्धांजलि दी। होटल व्यवसाय संजय पंवार का कहना है कि हमारी दीपावली तो पांच अगस्त को हो गई। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ की तर्ज पर धराली का पुनर्वास विस्थापित करेंगे।

