मार्तोलिया को बर्खास्त करने की तेज होती मांग
सीबीआई जल्द टेक ओवर करेगी पेपर लीक जांच!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चला रहे मुख्यमंत्री को यूकेएसएसएससी आयोग के अध्यक्ष की नाकामी का दंश उस समय झेलना पडा था जब हजारों बेरोजगारों ने पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए उत्तराखण्ड के चप्पे-चप्पे पर आंदोलन का बिगुल बजा दिया था। बेरोजगारों के आंदोलन ने सरकार के सामने एक बडा संकट खडा किया तो मुख्यमंत्री ने बडा दिल दिखाते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने का ऐलान किया और अब पेपर लीक जांच के लिए बनाये गये आयोग की रिपोट पर स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द कर दिया गया। वहीं बेरोजगारों के सवालों की बौछार अभी भी आयोग और उसके अध्यक्ष को कटघरे में खडा कर रही है और सवाल दागे जा रहे हैं कि परीक्षा लीक प्रकरण में सामान्य बातें जो आम जनमानस को मालूम थी उसे आयोग के अध्यक्ष आखिर क्यों नहीं समझ पाये? क्यों आयोग के अध्यक्ष परीक्षा को अभेद बनाने में चूके जिससे सवाल खडे हो रहे हैं कि आयोग के अध्यक्ष आखिर कहां सो रहे थे जिन्हें परीक्षा को अभेद बनाने का जिम्मा मिला हुआ है।
उत्तराखण्ड में हुई स्नातक परीक्षा रद्द कर दिये जाने के बाद भी बेरोजगारों द्वारा काफी गंभीर सवालों की बौछार कर रहे हैं कि आखिरकार यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष जिनका दायित्व परीक्षा को साफ सुथरा कराने की जिम्मेदारी मिली हुई है उन्होंने आखिरकार स्नातक परीक्षा में हुये पेपर को अभेद बनाने के लिए क्यों बडी रणनीति नहीं बनाई थी? कुछ छात्रों द्वारा अभी भी यह आरोप लगाये जा रहे हैं कि काफी परीक्षा केंद्रो पर चैकिंग की सही व्यवस्था नहीं थी और काफी परीक्षा केंद्रो पर जैमर काम नहीं कर रहे थे। बेरोजगार छात्रों ने यह भी सवाल दागा कि बिजली चलेे जाने पर कैमरे और जैमर बंद हुये और उसके बैकअप के लिए कोई वहां व्यवस्था नहीं थी यह आरोप भी कुछ छात्र खुले रूप से लगा रहे हैं। बेरोजगार छात्रों को इस बात को लेकर बेहद नाराजगी है कि कुछ परीक्षा केंद्रो पर मोबाइल का खुलकर प्रयोग हुआ और यह भी आरोप लगाया कि कुछ टीचर और अन्य स्टाफ भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे जो कि यह दर्शा रहा था कि वहां आयोग द्वारा मोबाइलों पर नजर रखने के लिए कोई ऐसा अभेद नेटवर्क नहंी बनाया गया था जिससे कि कोई भी स्टाफ व टीचर मोबाइल फोन का इस्तेमाल न कर पाता? कुछ बेरोजगार छात्रों ने जीएस मार्तोलिया को कटघरे में खडा करते हुए कहा कि कुछ परीक्षा केंद्र सुदूर बनाये गये थे जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि शहरों में बडे-बडे कॉलेजों को छोडकर दूर दराज गन्ने के खेतों में क्यों बनाये गये थे चंद परीक्षा केन्द्र? बेरोजगार छात्रांे का खुला आरोप यह भी है कि सामान्य बातें आम जनमानस को मालूम थी उसे आयोग के अध्यक्ष क्यों नहीं समझ पाये और बेदाग परीक्षा कराने का दम भरने वाले आयोग के अध्यक्ष स्नातक परीक्षा को लेकर आखिर कहां सोते रहे कि पेपर लीक हो गया? कुछ छात्रों का कहना था कि हरिद्वार में बहादुरपुर जट में गन्ने के खेतों से लगता हुआ परीक्षा केंद्र क्यांे बनाया गया जहां से यह पेपर लीक हुआ था? इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है लेकिन अब संभावनायें दिखाई दे रही हैं कि मामले की जांच को सीबीआई कभी भी टेक ओवर कर सकती है इसी को लेकर सबकी निगाहें इसी पर लगी हुई हैं? अब यह बात तय है कि जब सीबीआई के हाथों में पेपर लीक की जांच आयेगी तो उसमें बडे-बडे राज खुलेंगे ऐसी सम्भावना सैकडो बेरोजगार छात्रों के मन में पल रही है।

