आवाम की रडार पर दागी अफसर

0
89

सिस्टम से बडे होते चंद अफसर!
चंद एक्स सीएम की कुर्सी उजाड़ चुके हैं भ्रष्ट अफसर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड जैसे शांतप्रिय राज्य में हर सरकार के कार्यकाल में आवाम को कुछ न कुछ ऐसे दागी अफसर दिखाई दे ही जाते हैं जो अपने आपको सिस्टम से बडा समझकर कुछ भी कर गुजरने के लिए आगे बढ चलते हैं? हैरानी वाली बात है कि सरकारों को ऐसे दागी अफसर क्यों दिखाई नहीं देते यह हमेशा से ही एक बडा सवाल राज्य के अन्दर खडा होता रहा है। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों की सत्ता उनके चंद दागी अफसरों के द्वारा खेले गये भ्रष्टाचार के चलते चली गई थी और उसके बाद वह अकसर मुख्यमंत्री बनने के लिए खूब छटपटाते रहे लेकिन उन्हें सत्ता की सबसे ऊंची कुर्सी कभी नसीब नहीं हुई और शायद भविष्य में भी कभी नसीब न हो? उत्तराखण्ड में स्वच्छता के साथ सरकार चला रहे मुख्यमंत्री से आवाम को बडी उम्मीदें हैं लेकिन राज्य में कुछ दागी अफसर आवाम की रडार पर हैं कि आखिरकार यह जो सिस्टम से अपने आपको बडा समझकर अपने गुप्त खेल खेल रहे हैं वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए घातक हैं? सरकार के सामने आखिरकार ऐसे दागी अफसरों का काला चिट्ठा क्यों नहीं पहुंच रहा है यह भी एक बडा सवाल राज्य के अन्दर तेजी के साथ उठ खडा हुआ है?
उत्तराखण्ड की जनता पच्चीस सालों से दर्जनों दागी अफसरों को लेकर एक बडी नाराजगी अपने मन में सिर्फ इसलिए समेटती रही कि अगर उन्होंने इन अफसरों का विरोध करने का साहस किया तो उनके खिलाफ झूठे मुकदमें एक साजिश के तहत दर्ज कराकर उन्हें यह दागी अफसर एक बडी चोट पहुंचा सकते हैं? कुछ दागी अफसरों ने तो अपने चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने हाथों की कठपुतली बनाकर रखा था और वह भ्रष्टाचार का खेल इतनी तेजी के साथ आये दिन खेलते थे कि उसका शोर देहरादून से लेकर पिथौरागढ़ तक सुनाई देता था लेकिन उनके भ्रष्टाचार के खिलाफ डरकर कोई आवाज उठाने के लिए तैयार नहंी होता था क्योंकि सबको इस बात का इल्म रहता था कि सत्ता में रहकर जो दागी अफसर कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते रहे वह एक आम इंसान द्वारा उठाये जाने वाली आवाज को कैसे कुचल देंगे इसका अंदाज उन्हें हमेशा रहा करता था और यही कारण रहा कि ऐसे दागी अफसरों के कारण कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों की कुर्सी उनके नीचे से ऐसे खिसक गई थी कि उन्हें इसका आभास भी नहीं हो पाया था?
उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने करीब चंद ऐसे अफसरों को रखा था जो भ्रष्टाचार करने के बडे खिलाडी माने जाते थे और उन्होंने भ्रष्टाचार का जो खुला तांडव किया था उसकी गंूज उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक हमेशा गूंजती रही जिसके चलते ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री आवाम की रडार पर रहे और उन्हें इसका बडा खामियाजा भी भुगतना पडा था यह किसी से छिपा नहीं है? उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के अन्दर साफ संदेश दिया था कि अगर किसी ने भी अपने आपको ‘सरकार’ समझने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन किया जायेगा। हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री के सख्त रूख के चलते भी कुछ अफसर दागी नजर आने लगे और उन्होंने जिस रूप में अपने कामकाज को आगे बढाना शुरू किया उसे देखकर यह सवाल पनपने लगे कि आखिरकार ऐसे दागी अफसरों की कारगुजारियां क्या सरकार को दिखाई नहीं देती या फिर वह सबकुछ देखकर भी ऐसे दोगी अफसरों पर एक्शन करने के लिए तैयार नहीं है? उत्तराखण्ड के अन्दर कुछ अफसरों की कार्यशैली आवाम को रास नहीं आ रही है और उसी के चलते उनके मन में एक ही सवाल गंूज रहा है कि आखिरकार उत्तराखण्ड में हर सरकार के कार्यकाल में कुछ दागी अफसर कैसे अपने आपको सिस्टम से बडा समझकर वो खेल खेलने में जुट जाते हैं जो आवाम के मन में एक आक्रोश की ज्वाला पैदा कर देती है।

LEAVE A REPLY