यूके ट्रिपल एससी की गरिमा पर ग्रहण!

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अध्यक्ष के खिलाफ दिख रही खुली नाराजगी
देहरादून। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार यूके ट्रिपल एससी की गरिमा पर उस समय एक बडा ग्रहण लग गया जब राज्य में हुई राज्य स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक हो गया और इस पेपर लीक को लेकर जो संग्राम उत्तराखण्ड के अन्दर मचा वह किसी से छिपा नहीं रहा। यूके ट्रिपल एससी के अध्यक्ष लगातार दावा करते रहे कि पेपर लीक नहीं हुआ है और सिर्फ तीन पन्ने बाहर आये हैं जबकि हजारों बेरोजगार अध्यक्ष के इस बयान को लेकर अपनी हैरानगी जताते रहे और कांग्रेस ने भी आयोग को कटघरे मे खडा करते हुए अध्यक्ष को बर्खास्त करने की खुली दहाड लगा रखी है ऐसे में सोचने वाली बात है कि जब पेपर कराने वाली किसी संस्था और उसके अध्यक्ष को विपक्ष और हजारों बेरोजगार अपने निशाने पर ले रहे हों तो फिर वह उस आयोग पर कैसे यकीन कर पायेगा जो भविष्य में पेपर कराने का दम भर रहा है? उत्तराखण्ड के अन्दर यूके ट्रिपल एससी को लेकर छात्रों के मन में जो एक अविश्वास की भावना दिखाई दे रही है वह उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं है और हर तरफ यही सवाल खडा हो रहा है कि आखिरकार जब विपक्ष और बेरोजगारों को आयोग के अध्यक्ष पर भरोसा नहीं है तो फिर सरकार अभी तक खामोश क्यों है? आयोग पर विश्वसनीयता को बरकरार रखना सरकार का पहला दायित्व है जिसके चलते राज्य के अन्दर सभी परीक्षाओं को पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ कराया जा सके?
उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार फिर कुछ समय पूर्व यूके ट्रिपल एससी द्वारा कराई गई राज्य स्तरीय परीक्षा को लेकर उस समय एक बडा भूचाल मच गया था जब परीक्षा के कुछ समय बाद ही बेरोजगार छात्रों ने पेपर लीक होने का शोर मचा दिया था। हालांकि आयोग के अध्यक्ष का दावा था कि पेपर लीक नहीं हुआ है और सिर्फ तीन पन्ने बाहर आये हैं। अध्यक्ष के इस बयान से तो उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में एक बडा हंगामा मच गया था कि जो आयोग का अध्यक्ष जो एक पुलिस अफसर रहा हो उन्हें क्या इस बात का पता नहीं है कि पेपर के तीन पन्ने बाहर आने का मतलब पेपर लीक होता है या नहीं होेता? इस पेपर लीक को लेकर हजारों बेरोजगारों ने उत्तराखण्ड के कुछ जिलों में अपने विरोध प्रदर्शन कर पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी तो सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की निगरानी में पुलिस की एक एसआईटी बनाई जिसे पेपर लीक मामले की जांच का जिम्मा सौंपा और यह एसआईटी अपनी जांच को अंजाम तक पहुंचाने के लिए आगे बढी हुई है। वहीं देहरादून में बेरोजगारों के आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके बीच जाकर मामले की सीबीआई से जांच कराने का ऐलान कर दिया था। पेपर लीक मामले की जांच के बाद यूके ट्रिपल एससी की गरिमा पर एक बडा ग्रहण लग रहा है और आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त करने की मांग को लेकर कांग्रेस से लेकर बेरोजगार भी अपनी दहाड लगा रहे हैं।
वहीं उत्तराखण्ड में एक दशक से होती आ रही सरकारी भर्तियों को लेकर कभी कोई ऐसा शोर नहीं मचा कि जिससे सरकार और सिस्टम पर सवालिया निशान लग सके। उत्तराखण्ड के बेरोजगारों के मन में हालांकि हमेशा यह रंज रहता था कि वह रात-दिन पढाई कराने के बावजूद भी आखिर परीक्षा में कैसे और क्यों पिछड रहे हैं और उनसे कम ज्ञान रखने वाले युवा परीक्षाओं में अव्वल आकर सरकारी नौकरियां पा रहे हैं। उत्तराखण्ड की कमान जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई तो दर्जनों बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग रखी कि कुछ सालों में हुई परीक्षाओं में खूब गडबडी हुई है और यह सब नकल माफियाओं का खेल रहा है। मुख्यमंत्री ने बेरोजगारों की इस मांग पर अपना समर्थन दिया और उन्होंने इसका सच सामने लाने के लिए एसटीएफ को अपनी जांच सौंपी थी। एसटीएफ ने जब अपनी जांच को आगे बढाना शुरू किया तो भाजपा के काफी राजनेताओं और कुछ अफसरों के करीबी माने जाने वाले हाकम सिंह को एसटीएफ ने उत्तरकाशी से गिरफ्तार किया था और उसकी गिरफ्तारी के बाद काफी संख्या में नकल माफिया सलाखों के पीछे पहुंचते रहे। हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड में सख्त नकल विरोधी कानून होने के बावजूद कुछ समय पूर्व हुई राज्य स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक होने पर उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में एक नया तूफान मच गया और यह तूफान उस समय भी और आगे बढा जब यूके ट्रिपल एससी अध्यक्ष जीएस मार्ताेलिया ने मीडिया के सामने आकर यह बयान दिया था कि तीन पन्ने बाहर आये हैं तो उसके बाद से ही बेरोजगार छात्रों से लेकर विपक्ष के निशाने पर आयोग के अध्यक्ष आ गये और सबने एक सुर में यही सवाल दागे कि तीन पन्ने बाहर आने का सीधा मतलब है कि पेपर लीक हुआ है इसलिए आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्ताेलिया को बर्खास्त किया जाये और इस परीक्षा को निरस्त किया जाये। आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त करने को लेकर गढवाल से लेकर कुमांऊ तक एक बडा भूचाल मचा हुआ है लेकिन सरकार आयोग के अध्यक्ष पर लगे दाग के बावजूद भी अभी तक खामोश नजर आ रही है। आयोग के अध्यक्ष पर सरकार की खामोशी से कांग्रेस बेहद नाराज है और उसने अपनी नाराजगी दिखाने के लिए हजारों कांग्रेसियों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री आवास कूच करने के दौरान एक बार फिर जीएस मार्ताेलिया को आयोग के अध्यक्ष से बर्खास्त करने की खुली दहाड़ लगाई और इस परीक्षा को एक सिरे से रद्द करने की मांग उठाकर सरकार को कहीं न कहीं कटघरे में लाकर खडा कर रखा है। हल्द्वानी में पेपर लीक को आंदोलित बेरोजगार छात्र खुली चेतावनी दे रहे हैं कि आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त कर परीक्षा को रद्द किया जाये। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार एक ऐसी सरकारी संस्था पर विपक्ष और बेरोजगार दहाड रहे हैं जिसकी अपनी एक गरिमा होती है लेकिन जब आयोग के अध्यक्ष को ही कटघरे में खडा किया जाये तो फिर उस संस्था की गरिमा कैसे बचेगी यह अपने आप में एक बडा सवाल है?

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