कांग्रेस के दिग्गज अब एक साथ खोल रहे मोर्चा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। एक दशक तक मित्र विपक्ष का दाग अपने ऊपर लगाने वाली कांग्रेस को जब लोकसभा नेता प्रतिपक्ष का आक्रामक रूख नजर आने लगा तो उन्हें इस बात का इल्म हो गया था कि अब सीधे राहुल गांधी की नजर उत्तराखण्ड पर टिक गई है और उनका मिशन उत्तराखण्ड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर है तो फिर कांग्रेस के सभी दिग्गज राजनेता एक मंच पर आकर सरकार के खिलाफ जन मुद्दों को लेकर सड़कों पर दहाडने लगे। उत्तराखण्ड में हुये पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस आक्रामक रूख में नजर आ रही है और उसी के चलते कांग्रेस ने उच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की दहाड लगा दी है और उन्हांेने यूके ट्रिपल एससी अध्यक्ष गणेश मर्तोलिया की बर्खास्तगी व पेपर परीक्षा को रद्द करने को लेकर आरपार की लडाई लडने का जो ऐलान किया है उससे सरकार के सामने एक बडी चुनौती खडी हुई नजर आ रही है। कांग्रेस के दिग्गज राजनेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकार को उखाड फेकने का जो संकल्प लिया है उससे अब 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव रोचक होगा ऐसी सम्भावनायें प्रबल हो चुकी हैं?
उत्तराखण्ड कांग्रेस के कुछ बडे राजनेताओं के बीच आपसी टकराव के चलते कांग्रेस हाशिये पर जाती रही और पार्टी के कुछ नेताओं पर मित्र विपक्ष का रोल निभाने का उन पर दाग लगता चला गया और कहीं न कहीं इसकी गूंज दिल्ली में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कानो में जब पडने लगी थी तो उन्होंने हर उस राज्य पर अपनी रडार लगा दी जहां कांग्रेस बार-बार चुनाव हारकर पार्टी कमजोर हो रही थी। राहुल गांधी ने कई बार खुले मंच से ऐलान किया कि अब वह बारात के धोडो को राजनीति के मैदान में नहीं दौडायेंगे और जो राजनीति की रणभूमि पर अपना दबदबा कायम कर रहे हैं उन्हें पार्टी के अन्दर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजा जायेगा। राहुल गांधी ने उत्तराखण्ड में उन राजनेताओं का इतिहास भूगोल पता करना शुरू किया जो आपसी लडाई लडकर कांग्रेस को हाशिये पर लाने के मिशन पर लगे हुये हैं। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उत्तराखण्ड की राजनीति पर अपना सारा फोकस कर दिया है और उसी को देखते हुए कांग्रेस के तमाम दिग्गज राजनेताओं को यह इल्म हो चुका है कि अगर उन्होंने अब मित्र विपक्ष की भूमिका में तिनकाभर भी अपनी भागीदारी दिखाई तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पड सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की रडार पर उत्तराखण्ड के कुछ राजनेता आने लगे तो उसके बाद से ही सभी दिग्गज राजनेताओं ने एक मंच से ऐलान करना शुरू किया कि कांग्रेस एक होकर अब 2027 का विधानसभा चुनाव जीतने के विजन पर आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि अब कांग्रेस जनहित के मुद्दों पर सरकार को सडकों पर दहाड़ती हुई नजर आ रही है।
गौरतलब है कि बीती २१ सितंबर को संपन्न यूके ट्रिपल एससी परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच, हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से कराए जाने, लीक हुई परीक्षा को रद्द कर नई परीक्षा तिथि घोषित करने व यूके ट्रिपल एससी अध्यक्ष गणेश सिंह मर्तोलिया को बर्खास्त करने की मांग को लेकर अपने पूर्व घोषित मुख्यमंत्री आवास कूच करके यह दहाड लगा दी कि वह अब सरकार से आरपार की लडाई हर उस मुद्दे पर लडेगी जो जनहित के होंगे। प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने सरकार पर राज्य के नौजवानों व बेरोजगारों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश का नौजवान जो पिछले साढ़े आठ सालों से रोजगार की तलाश में दर दर भटक रहा है आज इस बात से निराश हताश और आक्रोशित है कि प्रदेश में एक तो सारी भर्तियां बंद हैं और जो कुछ थोड़ी बहुत भर्तियां निकलती हैं उनकी परीक्षा के पेपर खुले आम नीलाम हो जाते हैं और नीलाम करने वाले कहीं ना कहीं भाजपा से जुड़े लोग होते हैं चाहे वो हाकम सिंह हो या वो संजय धारीवाल या धर्मेंद्र सिंह चौहान हों। करण माहरा ने कहा कि विगत इकीस सितंबर को यूके ट्रिपल एससी परीक्षा पेपर लीक के बाद से कांग्रेस लगातार आंदोलन कर रही है और हमारी साफ साफ मांग है कि इस पेपर लीक की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई से करवाई जाए क्योंकि केवल सीबीआई जांच काफी नहीं उसकी निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस अध्यक्ष के रहते पेपर लीक हुआ और जो तीन दिनों तक पेपर लीक स्वीकार हो नहीं कर रहे थे वो आज भी अपने पद पर बने हुए हैं तो उनके रहते निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है। माहरा ने कहा कि सरकार यूके ट्रिपल एससी अध्यक्ष गणेश मर्तोलिया को तत्काल बर्खास्त करे।

