बेरोजगार छात्रों के साथ खडे हो रहे कांग्रेसी विधायक
सीएम को सीबीआई जांच कराने को भेजे लेटर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुई राज्य स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक को लेकर सीबीआई जांच की मांग पर अडे छात्रों ने साफ सरकार को दो टूक संदेश दे रखा था कि जब तक सीबीआई जांच का आदेश नहीं हो जाता तब तक वह खामोश नहीं बैठेंगे। आठ दिन से सीबीआई जांच की मांग करने वाले छात्रों के साथ आये कांग्रेस के कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री को मामले की सीबीआई जांच कराने का लेटर लिखा तो आखिरकार मुख्यमंत्री ने पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई जांच करने का आदेश दे दिया जिससे इस मुद्दे पर चला आ रहा राजनीतिक संग्राम आज खत्म हो गया।
उत्तराखण्ड में पेपर लीक को लेकर पूर्व सरकारों में भी काफी शोर मचता रहा है और राज्य के अन्दर नकल माफियाओं के गैंग पर बडा प्रहार करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बडी पहल करते हुए सौ से ज्यादा नकल माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे डालकर यह संदेश दे दिया था कि राज्य के अन्दर नकल का धंधा नहीं चलेगा। हाकम सिंह से लेकर काफी बडे-बडे नकल माफियाओं की नाक में नकेल डालकर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के अन्दर नकल माफियाओं के वर्चस्व को नेस्तनाबूत कर दिया था जिससे यह अलख जगी थी कि अब उत्तराखण्ड के अन्दर नकल का खेल नहीं चलेगा। वहीं कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड में हुई राज्य स्तरीय परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर ऐसा भूचाल मचा कि सरकार के सामने इस आंदोलन को खत्म कराने की एक बडी चुनौती बन गई। उत्तराखण्ड के कुछ जिलों में जिस तेजी के साथ बेरोजगार छात्रों ने सीबीआई जांच कराने और परीक्षा रद्द करने को लेकर अपना आंदोलन शुरू कर रखा है उससे सरकार का बीपी जरूर बडा हुआ है। बेरोजगार छात्र पेपर लीक मामले में आर-पार की लडाई लडने के मूड मे है और उन्होंने दो टूक संदेश दे रखा है कि जब तक मामले की जांच सीबीआई के हवाले नहीं की जाती उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा। बेरोजगार छात्रों की जिद्द को देखकर अब कांग्रेस भी बेरोजगारों के साथ खडी हुई नजर आ रही है और उसी के चलते कांग्रेस और एक निर्दलीय विधायक ने उत्तराखण्ड में भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को लेटर लिखे हैं। कांग्रेसी विधायकों द्वारा सीबीआई जांच को लेकर लिखे जा रहे लेटर से बेरोजगार छात्रों को एक बडा बल मिलता हुआ दिखाई दे रहा है और उसी के चलते अब राज्य के अन्दर यह बहस भी छिडी हुई थी कि मुख्यमंत्री इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले करके इस आंदोलन पर चल रहे संग्राम को खत्म कर देंगे और आज दोपहर ऐसा ही हुआ जब मुख्यमंत्री ने बेरोजगार छात्रों के बीच जाकर सीबीआई जांच कराने का आदेश दे दिया।
उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि राज्य के अधिकांश जिलांे में बेरोजगार छात्रों का हुजूम सड़कों पर उतरा हुआ है और वह सरकार से परीक्षा रद्द कराने और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग पर अडे हुये हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी और उनका प्रशासन आंदोलनरत बेरोजगारों को समझाने के मिशन में आगे बढा हुआ है लेकिन बेरोजगार छात्र किसी भी कीमत पर एसआईटी जांच कराने को राजी नही हैं और वह दो टूक संदेश दे रहे हैं कि पेपर लीक मामले में आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया को बर्खास्त किया जाये और परीक्षा रद्द कराकर मामले की जांच सीबीआई के हवाले की जाये। हजारों बेरोजगार छात्र अपनी मांग पर अडिग हैं तो वहीं यमनोत्री विधानसभा से विधायक संजय डोभाल, खानपूर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार, धारचूला विधानसभा से कांग्रेसी विधायक हरीश धामी, पिथौरागढ़ से कांग्रेसी विधायक मयूख सिंह मेहर, खटीमा से कांग्रेसी विधायक भूवन चंद कापडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा 21 सितम्बर को सनातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में हुई गडबडी की सीबीआई द्वारा जांच कराये जाने एवं विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किये जाने को लेटर लिखा है। कांग्रेसी विधायकों और निर्दलीय विधायक का जिस तरह से बेरोजगारों को खुला साथ सीबीआई जांच कराने को लेकर मिला उसके चलते आज आखिरकार मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच कराने की संस्तुति कर सबको चौका दिया।

