पद से हटने चाहिए भूमाफियाओं के सरपरस्त पुलिस अधिकारी

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर काफी पुलिस अफसरों का भूमाफियाओं से मोह खुलकर देखा गया है और यही कारण रहा कि ऐसे अफसरों की सरपरस्ती में रहने वाले भूमाफिया उत्तराखण्ड के कुछ जिलों में अपनी दबंगता से जमीनों पर कब्जे करते चले गये और उसके बाद उन्होंने जमीन मालिकों को अपने आतंक से रूबरू कराते हुए उन्हें डरा-डराकर बेशकीमती जमीनों को कोढियों के भाव खरीदकर राज्य के अन्दर अपना दबदबा कायम किया यह किसी से छुपा नहीं है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने अपराधियों, माफियाओं और भूमाफियाओं पर नकेल लगाने का बडा अल्टीमेटम दिया हुआ है लेकिन इसके बावजूद भी काफी भूमाफिया अभी भी अपने दबदबे के चलते लोगों की जमीनों पर कब्जे करने का खुला खेल खेल रहे हैं और हैरानी वाली बात तो यह है कि एक कुख्यात गैंग जो कि जमीनें कब्जाने का सरताज बना हुआ है उनके साथ मिलकर दो पुलिसकर्मी भूमाफियागिरी करने के रूप में जब सामने आये तो एसटीएफ ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया लेकिन यह सवाल भी उठ रहा है कि इस कुख्यात गैंग से पुलिस का एक अफसर भी यारी निभा रहा है और उनके जमीनों पर किये जाने वाले कब्जों को लेकर उन्हें अपना साथ दे रहा है? एसटीएफ इस सनसनीखेज मामले की जांच कर रही है लेकिन जैसे ही गैंग के साथ एक पुलिस अफसर के गठबंधन की गंध उसे आई तो वह अपनी जांच को पुलिस अफसर की तरफ धुमाने का साहस नहीं दिखा पा रही है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि संगठित अपराध का नेटवर्क भेदने का दावा ऐसे मे तो हवा-हवाई ही नजर आ रहा है? उत्तराखण्ड में अब यह आवाज भी बुलंद होने लगी है कि भूमाफियाओं के सरपरस्त पुलिस अधिकारियों को पद से हटाना चाहिए जिससे कि यह संदेश जाये कि राज्य सरकार भूमाफियाओं के नेटवर्क को नेस्तनाबूत करने के संकल्प पर आगे बढ़ रही है।
उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के काफी पुलिस अफसरों का जमीन मोह देखने को मिला था और उन्होंने अपनी वर्दी की गरिमा को तार-तार करते हुए जिस तरह से काफी भूमाफियाओं को अपना खुला साथ दे रखा था वह किसी से छिपा नहीं था। उत्तराखण्ड के कुछ पूर्व पुलिस कप्तानों ने अपने शासनकाल में कुछ बडे भूमाफियाओं के साथ गुप्त गठजोड कर दौलत कमाने का खेल खेला था उसकी गूंज काफी दूर तक गूंजी थी लेकिन अपने अफसरों को बचाने के लिए कुछ पूर्व सरकारों ने उन्हें अभयदान देकर यह संदेश दे दिया था कि बडे अफसरों को वह हमेशा अपना लाडला मानते रहे हैं क्योंकि वह उनके इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं? राजधानी में तैनात रहे एक एसपी सिटी ने अपने शासनकाल में रायपुर इलाके में गोल्डन फारेस्ट की एक बडी जमीन पर ऐसा खेल खेला था कि उस दौर में प्रशासन के एक अफसर ने कागजों में हेरफेर करके गोल्डन फारेस्ट की जमीन को ही अधिकारी के नाम करा दिया था और यह मामला उस समय भी उठा था लेकिन पुलिस अफसर की दबंगता और काम करने की शैली से कोई भी इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाने का साहस नहीं कर पाया था?
उत्तराखण्ड के कुछ आईपीएस अफसरों ने तो भूमाफियाओं के साथ अपना खुला गठबंधन कर रखा था और उसी के चलते वह जमीनों के धंधों से दौलत कमाने के जिस रास्ते पर आगे बढे वहां दौलत ही दौलत का अम्बार उन्हें नजर आया और उसी के चलते उन्होंने इतनी दौलत अपने खजाने में भर ली जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी? उत्तराखण्ड के अन्दर भूमाफियाओं का एक बडा दबदबा आम जनमानस को हमेशा डराता रहा है और जिस अंदाज में भूमाफियाओं नेे लोगों की जमीनों के फर्जी दस्तावेज बनाकर उन पर कब्जा किया तो अफसरों के सामने अपनी जमीनों को बचाने की फरियाद करने वाले लोगों को यह पाठ पढाया जाता रहा कि जमीनों के मामले सिविल होते हैं इसलिए वह न्यायालय में जाकर अपनी जमीनों को खाली करवायें। उत्तराखण्ड में अब एक बार फिर पुलिस के कुछ लोगों और कुख्यात गैंग के बीच एक करोडो की जमीन पर कब्जा करने का जो दाग लगा है उसने उत्तराखण्डवासियों के मन में एक भय पैदा कर दिया है कि अगर पुलिस के कुछ लोग जमीन कब्जाने वाले गैंग का साथ दे रहे हैं तो फिर ऐसे में उनकी जमीनें कब तक सुरक्षित रहेगी यह एक बडा सवाल है? उत्तराखण्ड के अन्दर अब यह आवाज भी बुलंद हो रही है कि भूमाफियाओं के सरपरस्त पुलिस अधिकारियों को पद से हटाना चाहिए जो सरकार के विजन को भी चूर-चूर कर रहे हैं।

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