अब रघुनाथ ने आईजी को हटाने की लगाई हुंकार
आईजी को हटाने की माहरा भी लगा चुके दहाड़
विकासनगर(संवाददाता)। उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त करने का संकल्प ले चुके मुख्यमंत्री के सपनों पर ग्रहण लगाने के लिए कुख्यात गैंग के साथ गठबंधन करने वाले दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद से ही एक बडा भूचाल मचा हुआ है कि आखिरकार अगर आवाम के रक्षक ही बदमाशों से गठजोड़ करके आवाम के मन में भय पैदा करेंगे तो फिर कैसे एक आम आदमी अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकेगा? कुख्यात वाल्मीकि गैंग से सम्बन्ध रखने वाले दो पुलिसकर्मियों को एसटीएफ ने भले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हो लेकिन अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जनसंघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने सीधी हुंकार लगाई है कि पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल खंगालने और बडी जांच किये जाने से ही सारा राज बेनकाब होगा इसलिए सरकार को चाहिए कि पहले वह आईजी गढवाल को पद से हटाये। पार्षद, गैंगेस्टर और पुलिसकर्मियों के गठजोड के चलते आशंकाओं का दौर शुरू हो चुका है कि जमीन कब्जाने की साजिश में बडे मगरमच्छ भी शामिल जरूर होंगे और उनका राज तभी बेनकाब होगा जब इस मामले में बडी जांच कराई जाये और जांच से पहले आईजी गढवाल को उनके पद से हटाया जाये। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है जब कुख्यात गैंग और पुलिसकर्मियों के बीच एक बडा गठजोड़ सामने आया है और इस मामले में पुलिस के एक बडे अफसर पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं और सवाल तैर रहे हैं कि क्या सरकार इतने गंभीर मामले की जांच सीबीआई के हवाले करेगी क्योंकि जब वह एक भूमाफिया के खिलाफ सीबीआई जांच करा सकती है तो फिर कुख्यात गैंग और पुलिस के बीच हो रखे गठबंधन के सारे राज से पर्दा हटाने के लिए सीबीआई जांच क्यों नहीं करा सकती?
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि हाल ही में रुड़की के ग्राम सुनहरा में लगभग पचास करोड रुपए की बेशकीमती भूमि फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए हड़पने के खेल के पीछे जिस तरह से एसटीएफ द्वारा आईजी गढ़वाल (पुलिस महानिरीक्षक) कार्यालय में तैनात दो पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है, उनकी संलिप्तता सामने आई है, इससे स्पष्ट हो जाता है कि आईजी कार्यालय का कहीं न कहीं संरक्षण इन दोनों पुलिसकर्मियों को था। अगर नहीं था तो क्यों इन दो खास पुलिस कर्मियों को पिथौरागढ़ से स्थानांतरित कर (आयात कर) आईजी के कार्यालय में तैनात किया गया। यहां सवाल इस बात का है कि इनको यहां आयात करने के पीछे किसकी सिफारिश थी व इस कहानी के पीछे कौन था , इसकी भी जांच होनी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिस घोटाले की गुंज पूरे प्रदेश के अंदर सुनाई दे रही हो, वो घोटाला साधारण नहीं हो सकता। नेगी ने सवाल दागे कि इन दो छोटी-छोटी मछलियों को तो पकड़ा जा चुका है, लेकिन बड़े वाले मगरमच्छ आज भी पिक्चर से बाहर क्यों हैं। कहीं आईजी कार्यालय का संरक्षण तो इन पुलिस कर्मियों को नहीं? क्यों इन पर हाथ नहीं डाला जा रहा ! क्यों इस नेक्सस की कॉल रिकॉर्डिंग डिटेल नही खंगाली जा रही ! रघुनाथ नेगी ने साफ कहा कि पार्षद,गैंगस्टर, पुलिसकर्मियों व बड़े वाले मगरमच्छों के गठजोड़ का भी पर्दाफाश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आश्चर्य इस बात का है कि बदमाशों, लुटेरों से अपनी संपत्ति की रक्षा करने हेतु जनता को पुलिस पर भरोसा होता है, लेकिन यहां तो पुलिस ही खुद भक्षक बनकर लोगों को लूटने का काम कर रही है। सरकार को चाहिए कि न्याय के सिद्धांत के दृष्टिगत आईजी राजीव स्वरूप को पदमुक्त कर प्रदेश को एक संदेश देना चाहिए कि प्रदेश में आज भी सुशासन का राज है। मोर्चा सरकार से मांग करता है कि इस घोटाले की प्रवृत्ति को देखते हुए इसमें शामिल तमाम बड़े मगरमच्छों को लपेटे में लेने हेतु उच्च स्तरीय जांच कराये।पत्रकार वार्ता में- दिलबाग सिंह व प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद थे।

